जानिए क्या है आर्थ्रोस्कोपी, जिससे सिर्फ एक घंटे में हो जाती है घुटनों की सर्जरी

नी आर्थ्रोस्कोपी के माध्यम से न सिर्फ घुटनों की चोट की सही जांच की जा सकती है, बल्कि सही उपचार भी संभव है।

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Written By: Atul Modi | Published : March 6, 2024 9:24 PM IST

जोड़ों का दर्द और घुटनों की चोट जैसी समस्याएं भारतीयों में बहुत ही आम हैं। मोच, फ्रैक्चर, लिगामेंट टूटना इनमें सबसे प्रमुख है। जोड़ों के दर्द की समस्याएं जो कभी 60 पार के लोगों को हुआ करती थीं, वो अब 40 की उम्र में ही उन्हें परेशान करने लगी है। हालांकि मेडिकल साइंस की उन्नति ने इन परेशानियों से बचाव का हल भी खोज निकाला है। इन्हीं में से एक है आर्थ्रोस्कोपी। नी आर्थ्रोस्कोपी के माध्यम से न सिर्फ घुटनों की चोट की सही जांच की जा सकती है, बल्कि सही उपचार भी संभव है। क्या है आर्थ्रोस्कोपी और कैसे है ये आपके लिए उपयोगी, आइए जानते हैं।

एडवांस टेक्नोलॉजी है आर्थ्रोस्कोपी

नी आर्थ्रोस्कोपी घुटनों और जोड़ों की परेशानी का आसानी से उपचार करने में सक्षम है। य​ह मेनिस्कस टियर, मिस लिंक्ड पैटेल्स, लिगामेंट इंज​री और फ्रैक्चर में प्रमुख रूप से की जाती है। इसी के साथ क्वाड टेंडन टूटने जैसी समस्याओं को भी यह हल करती है। नी आर्थ्रोस्कोपी में स्किन में एक छोटे से चीरे के जरिए आर्थोस्कोप डालकर ज्वाइंट की जांच की जाती है। आर्थ्रोस्कोप में वीडियो कैमरा, लाइट के साथ ही रिंसिंग, सक्शन डिवाइस लगा होता है, जिसके कारण यह ज्वाइंट की बारीकी से जांच कर पाता है। परेशानी का पता चलने पर सर्जन आर्थ्रोस्कोप के जरिए ही उपकरण अंदर डालते हैं और सर्जरी कर देते हैं।

इसलिए फायदेमंद है आर्थ्रोस्कोपी

घुटनों और ज्वाइंट के दर्द व चोटों से राहत के लिए सर्जन आर्थ्रोस्कोपी की सिफारिश करते हैं। इसके कई फायदे हैं।

1. होता है जल्दी उपचार: आर्थोस्कोपी घुटनों की बीमारी का पता लगाने और उपचार करने में मददगार है। यह जल्दी उपचार करने में सहायक है, क्योंकि इससे घुटनों की चोट का सटीक पता लगाया जा सकता है।

2. सुरक्षित तकनीक : आर्थोस्कोपी को बहुत ही सुरक्षित तकनीक माना जाता है। यही कारण है कि अधिकांश सर्जन इस तकनीक पर विश्वास करते हैं। हालांकि उपचार और रिकवरी चोट और क्षति की गंभीरता पर निर्भर है।

3. बहुत कम इनवेसिव : आर्थ्रोस्कोपी का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये बहुत ही कम इनवेसिव के साथ होती है। इसमें बस स्किन में छोटे चीरे लगाए जाते हैं, उन्हीं के जरिए जांच और सर्जरी की जाती हैं। उपकरण भी इसी के जरिए जाते हैं। ऐसे में रिकवरी की संभावना अधिक रहती है।

4. कम होता है दर्द : ओपन सर्जरी के मुकाबले आर्थ्रोस्कोपी में रिकवरी की संभावना ज्यादा होती है, क्योंकि इसमें शरीर में छोटे छेद किए जाते हैं। ऐसे में आपका शरीर कम स्ट्रेस में आता है, दर्द भी कम होता है।

5. बेहतर रिजल्ट : विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थ्रोस्कोपी एक बहुत ही लाभकारी सर्जरी है। इसमें घुटनों के आस-पास के ऊतक बहुत कम प्रभावित होते हैं। कैमरों और उपकरणों के कारण घुटनों के अंदरूनी हिस्सों की जांच आसानी से होती है। ऐसे में सर्जरी बेहतर होती है।

6. रिकवरी जल्दी : अधिकांश मामलों में आर्थोस्कोपी एक घंटे से भी कम समय में कर ली जाती है। इस सर्जरी के बाद मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में एडमिट रहने की जरूरत नहीं होती है। बहुत छोटे चीरे के कारण रिकवरी भी जल्दी होती है।