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Robotic Surgery kaise ki jate hai: क्या होती है रोबोटिक सर्जरी? इसका सीधा और सरल जवाब है कि रोबोटिक ज्वाईंट सर्जरी वो होती है जिसमें घुटनों के गंभीर आर्थ्राईटिस या घुटनों के गंभीर दर्द झेल रहे पीड़ित मरीजों का रोबोट द्वारा इलाज किया जाता है। घुटनों के पारंपरिक रिप्लेसमेंट की तरह ही इस प्रक्रिया में भी ऑर्थोपीडिक सर्जन घुटने के क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाकर उसकी जगह इंप्लांट लगाते हैं, जिनसे दर्द में कमी आती है और घुटनों की शक्ति, गतिशीलता एवं संतुलन फिर से वापिस आ जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस या आर्थ्राईटिस से प्रभावित हिप के जोड़ भी रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी द्वारा बदले जा सकते हैं। जहां रोबोटिक ऑर्थ्रोपीडिक सर्जरी इनोवेशन के साथ सटीकता प्रदान करती हैं, वहीं इसके बारे में अनेक मिथक और भ्रांतियां भी फैली हैं। इन भ्रांतियों से लोग इतने प्रभावित हो जाते हैं कि जल्दी रोबोटिक सर्जरी कराने के लिए तैयार नहीं होते हैं। पुणे के मणिपाल अस्पताल में कंसल्टैंट - एडल्ट ज्वाईंट रिप्लेसमेंट एवं रिकॉन्स्ट्रक्शन एंड रोबोटिक आर्थ्रोप्लास्टी (हिप एंड नी), डॉ. सिनुकुमार भास्करन हमें आज इस आर्टिकल में रोबोटिक सर्जरी से जुड़ी जरूरी बातें बता रहे हैं साथ ही कुछ कॉमन भ्रांतियों पर भी उन्होंने खुलकर बात की है।
यह प्रक्रिया पूरी तरह से रोबोट द्वारा नहीं की जाती है। इस प्रक्रिया में सर्जन एक रोबोटिक आर्म की मदद से इंप्लांट को सही जगह लगाता है। सही जगह चीरे लगाए जाते हैं, और फिर रोबोटिक आर्म की मदद से इंप्लांट को सही जगह स्थापित किया जाता है। रोबोटिक आर्म के हिलने से पहले सर्जन द्वारा उसे कमांड दी जाती है। इसलिए सर्जन की मदद के बिना यह सर्जरी नहीं हो सकती है। ऐसे में यह कहना कि ये सर्जरी सिर्फ रोबोट द्वारा होती है, कहना गलत होगा।
यह एक आम भ्रांति है कि रोबोटिक सर्जरी में आम सर्जरी के मुकाबले ज्यादा खतरा होता है। रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट के कई फायदे हैं, जैसे यह ज्यादा सटीक होती है, इसमें कम चीरे लगाने की जरूरत पड़ती है, और स्वास्थ्यलाभ ज्यादा तेजी से मिलता है। टेक्नोलॉजी की मदद से सर्जन हर मरीज की शारीरिक संरचना के आधार पर सर्जरी को बेहतर अनुकूलित कर पाते हैं, जिससे जटिलताओं का जोखिम कम हो जाता है।
कुछ लोग सोचते हैं कि रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी केवल सरल और सामान्य प्रक्रियाओं के लिए होती है। लेकिन जोड़ों के रिप्लेसमेंट, स्पाईन की सर्जरी, और फ्रैक्चर ठीक करने जैसी जटिल ऑर्थोपीडिक प्रक्रियाओं के लिए भी रोबोटिक टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाता है। अपनी सटीकता और अनुकूलन के कारण रोबोटिक सिस्टम जटिल प्रक्रियाओं के लिए काफी उपयोगी हैं, जिनमें अत्यधिक सटीकता की जरूरत होती है।
यह एक मिथक है कि रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट के बाद स्वस्थ होने में ज्यादा समय लगता है। रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी में अक्सर छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिसके कारण आस-पास के ऊतकों को कम नुकसान पहुंचता है। इससे मरीज को ज्यादा तेजी से स्वास्थ्य लाभ मिलता है और वो अपने रोज के कामों को ज्यादा तेजी से शुरू कर सकते हैं, खासकर जब इंप्लांट की ज्यादा सटीक स्थापना हो।
एक भ्रांति यह भी है कि रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी के बाद की रिकवरी में नॉर्मल सर्जरी जितना ही समय लगता है। जबकि ऐसा नहीं है! रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी में छोटे चीरे लगाए जाते हैं, खून कम निकलता है, और आस-पास के सेल्स को कम नुकसान पहुंचता है, इसलिए ठीक होने में कम समय लगता है। इन लाभों के कारण अस्पताल से ज्यादा जल्दी छुट्टी मिल जाती है और मरीज दैनिक गतिविधियां ज्यादा जल्दी से शुरू कर पाता है।
रोबोटिक ऑर्थोपीडिक सर्जरी के साथ मेडिकल टेक्नोलॉजी में एक बड़ी प्रगति हुई है। पारंपरिक सर्जरी के मुकाबले रोबोटिक सर्जरी के अनेक फायदे हैं। इन मिथकों और भ्रांतियों को दूर करके रोबोटिक असिस्टेड ऑपरेशंस की क्षमता और सुरक्षा के बारे में बेहतर समझ प्राप्त की जा सकती है, और मरीज अपने इलाज के लिए बेहतर निर्णय लेने में समर्थ बन सकते हैं।