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"उन्हें गुजरे 6 साल हो गए हैं लेकिन मैनें आजतक उनकी फोटो पर माला नहीं चढ़ाई"

'ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एक्ट' (THOA) के तहत अंगों की खरीद-फरोख्त पूरी तरह से गैर-कानूनी और एक गंभीर अपराध है। कोई भी अस्पताल या डॉक्टर अपनी मर्जी से अंग किसी को नहीं दे सकता।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Published : June 25, 2026 1:03 PM IST

कहते हैं कि कुछ लोग इस दुनिया से जाने के बाद भी हमेशा जिंदा रहते हैं। हेमंत कुमार अग्रवाल भी ऐसे ही इंसान थे। परिवार के लिए जीने वाले, दोस्तों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहने वाले और हर पल को खुलकर जीने वाले हेमंत ने अपनी जिंदगी में कई सपने देखे थे। मेरठ से दिल्ली तक का रोज का लंबा सफर हो या बच्चों का बेहतर भविष्य, उन्होंने हर जिम्मेदारी को दिल से निभाया। करीब 10 साल पहले उन्होंने अपने परिवार के लिए दिल्ली के द्वारका में एक खूबसूरत घर बनवाया था। लेकिन किसे पता था कि जिस घर को उन्होंने अपने परिवार के साथ खुशियां बिताने के लिए बनाया है, उसमें रहने का समय उन्हें इतना कम मिलेगा। लेकिन जाते-जाते भी वे ऐसा काम कर गए कि आज कई परिवार उनकी वजह से मुस्कुरा रहे हैं।

12 मार्च 2020 का वो दिन

29 फरवरी 2020 वो दिन था जिसने सब कुछ हमेशा के लिए बदल दिया। हेमंत को अचानक उल्टी, तेज बुखार और मानसिक स्थिति में अचानक बदलाव महसूस हुआ। पहले उन्हें स्थानीय आकाश हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां सीटी स्कैन से पता चला कि उन्हें इंट्रावेंट्रिकुलर हैमरेज हुआ है। स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें तुरंत आर्टेमिस हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों ने हर मुमकिन कोशिश की, एक सफल प्रोसीजर भी हुआ, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 12 मार्च 2020 को डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

विदाई में भी जीवन दे गए

जब आर्टेमिस हॉस्पिटल के डॉक्टरों और मोहन फाउंडेशन (MOHAN Foundation) के काउंसलर ने परिवार से बात की, तो हेमंत जी के साले ने स्थिति को समझा। बेटी अपूर्वा पहले ही अपने पिता के अंगों को दान करने की इच्छा जता चुकी थी। पत्नी बरखा ने भारी मन लेकिन जबरदस्त हौसले के साथ सहमति दी। हेमंत जी की दोनों किडनियां और लिवर डोनेट किए गए। उनके लिवर को स्प्लिट करके एक मासूम बच्चे और एक वयस्क को नया जीवन दिया गया। उनके बेटे आर्यन कहते हैं "मैनें सिर्फ अपने पापा नहीं बल्कि अपने मेंटर, गाइड और सबसे अच्छे दोस्त को खोया है।"

Organ donation

वह आज भी जिंदा हैं...

हेमंत जी ने कभी अपनी पत्नी से कहा था कि रिटायरमेंट के बाद वे एक ऐसी लॉन्ग ड्राइव पर जाएंगे, जिसकी कोई मंजिल नहीं होगी। किसे पता था कि जिंदगी का सफर इतनी जल्दी थम जाएगा, लेकिन उनकी यह विदाई दूसरों के सफर को खूबसूरत बना गई। ZeeMedia की टीम ने जब पत्नी बरखा से बात की तो उनकी आंखों में आंसू तो थे, पर साथ ही गर्व भी था। वे बताती हैं कि हेमंत को कोई बीमारी नहीं थी, वे पूरी तरह स्वस्थ थे। बरखा ने कहा "मैंने आज तक अपने पति की तस्वीर पर फूलों की माला नहीं चढ़ाई है। क्योंकि मेरे और मेरे बच्चों के लिए वो आज भी मरे नहीं हैं बल्कि किसी और के रूप में आज भी इस दुनिया में जिंदा हैं, सांस ले रहे हैं।"

सही जानकारी नहीं है इसलिए लोग अंगदान नहीं करते

वे याद करती हैं कि हेमंत जी अपनी कमाई का एक निश्चित हिस्सा हमेशा दान करते थे। वे कहती हैं कि लोग अक्सर अंगदान करने से डरते हैं क्योंकि समाज में सही जानकारी नहीं है। लोगों को लगता है कि डॉक्टर मिले हुए होते हैं और अंगों को बेच देते हैं। लेकिन बरखा अपने अनुभव से बताती हैं, "ऐसा बिल्कुल नहीं होता। मुझे मेरे पति की देह बेहद सम्मान और आदर के साथ सौंपी गई थी।"

Organ Donor

कैसे पता चलेगा डोनेट किया गया अंग सही जगह जा रहा है?

बरखा का एक बहुत ही जरूरी सवाल था, वो चाहती हैं कि हम के माध्यम से इसका जवाब दें। सवाल है "अंगदान करने वाले परिवार को कैसे भरोसा हो कि उनका दान सही जगह जा रहा है और इसमें कोई धांधली नहीं हो रही है?" तो इसका जवाब ये है:

NOTTO: भारत सरकार की एक संस्था है जिसे NOTTO (National Organ and Tissue Transplant Organisation) कहा जाता है। देश में जब भी कोई अंगदान होता है, तो उसका पूरा रिकॉर्ड इस सरकारी नेटवर्क पर ऑनलाइन दर्ज होता है।

वेटिंग लिस्ट: अंग अमीर-गरीब के हिसाब से नहीं मिलता बल्कि वेटिंग लिस्ट के आधार पर तय होता है। जिसमें मरीज की बीमारी की गंभीरता, ब्लड ग्रुप और ऑर्गन मैचिंग के आधार पर कंप्यूटर खुद तय करता है कि अंग किसे मिलेगा। इसमें इंसानी दखल नामुमकिन है।

अंगों की बिक्री कानूनन अपराध: 'ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एक्ट' (THOA) के तहत अंगों की खरीद-फरोख्त पूरी तरह से गैर-कानूनी और एक गंभीर अपराध है। कोई भी अस्पताल या डॉक्टर अपनी मर्जी से अंग किसी को नहीं दे सकता।

गोपनीयता: अंग देने वाले और लेने वाले परिवार की पहचान को पूरी तरह गुप्त रखा जाता है ताकि किसी भी प्रकार का अनुचित दबाव या कमर्शियल लेनदेन न हो सके।

Zee Media की अपील: अंगदान महादान

अंगदान को लेकर हमारे समाज में आज भी जागरूकता की भारी कमी है। हर साल भारत में लाखों लोग सिर्फ इसलिए दम तोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें समय पर ऑर्गन नहीं मिल पाते। हेमंत कुमार अग्रवाल और उनके परिवार की यह कहानी हमें सिखाती है कि जब दुख का पहाड़ टूटा हो, तब भी हम अपनी सोच को बड़ा रखकर किसी के घर का बुझता हुआ चिराग रोशन कर सकते हैं। आइए, Zee Media के जागरूकता अभियान 'जिंदगी के बाद भी' का हिस्सा बनें, अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करें और अंगदान करने का संकल्प लें। क्योंकि आपके एक फैसले से किसी को दूसरी जिंदगी मिल सकती है। हेमंत कुमार अग्रवाल और उनके पूरे परिवार के इस जज्बे को ZeeMedia कोटि-कोटि नमन करता है।

आर्गन डोनेशन के बारे में 6 सबसे काम की जानकारियां

कौन कर सकता है अंगदान?

अंगदान दो तरह से होता है- पहला 'लिविंग डोनेशन' (जीवित रहते हुए किडनी या लिवर का एक हिस्सा देना) और दूसरा 'डिसीज्ड डोनेशन' (ब्रेन डेड घोषित होने के बाद आंखें, दिल, लिवर, किडनी आदि दान करना)। मेडिकल टीम जांच के बाद ही तय करती है कि कौन से अंग दान किए जा सकते हैं।

कैसे कर सकते हैं अंगदान?

  • जब किसी अपने की मृत्यु होने वाली हो या डॉक्टर उसे 'ब्रेन डेड' घोषित कर दें, तो बिना समय गंवाए तुरंत अस्पताल के डॉक्टर को बताएं कि आप अंगदान करना चाहते हैं, या सरकारी हेल्पलाइन 1800-11-4770 पर फोन करें।
  • डॉक्टर आपसे एक फॉर्म पर साइन करवाएंगे। इसमें कोई पैसा नहीं लगता और न ही इलाज का कोई खर्च परिवार से लिया जाता है।
  • अंग निकालने का ऑपरेशन बेहद सम्मान के साथ किया जाता है, शरीर पर कोई दाग या खराबी बाहर से नहीं दिखती और ऑपरेशन के तुरंत बाद शव परिवार को सम्मान समेत अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया जाता है।

कहां होता है अंगदान?

  • आप सीधे notto.mohfw.gov.in पर जाकर 'Register' बटन पर क्लिक करें और एक साधारण फॉर्म भरकर अपना डोनर कार्ड पा सकते हैं।
  • NOTTO के अलावा आप MOHAN Foundation या Organ India जैसी संस्थाओं की वेबसाइट पर जाकर भी ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।

NOTTO की वेबसाइट पर फॉर्म कैसे भरते हैं?

  • Notto.mohfw.gov.in वेबसाइट खोलें और होमपेज पर ऊपर दिख रहे "Register for Organ Donation" बटन पर क्लिक करें।
  • अब आपके सामने एक फॉर्म खुलेगा। इसमें अपना नाम, जन्मतिथि (DOB), जेंडर, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और अपना पूरा पता सही-सही भरें।
  • फॉर्म में अपना ब्लड ग्रुप सिलेक्ट करें। इसके बाद आपसे पूछा जाएगा कि आप कौन से अंग दान करना चाहते हैं—आप चाहें तो 'All Organs' (सभी अंग) चुन सकते हैं या अपनी मर्जी से कुछ खास अंग (जैसे सिर्फ आंखें या किडनी) पर टिक कर सकते हैं।
  • कानूनी तौर पर आपको दो गवाहों (Witness) के नाम और उनके फोन नंबर भरने होते हैं। इसमें आप अपने परिवार के किसी भी दो सदस्यों की डिटेल डाल सकते हैं।
  • आखिर में आपके मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा, उसे बॉक्स में डालकर 'Submit' कर दें। रजिस्ट्रेशन पूरा होते ही स्क्रीन पर आपका 'Organ Donor Card' आ जाएगा, जिसे आप डाउनलोड करके अपने पास रख सकते हैं।
  • फॉर्म भरने के लिए कोई फीस देनी पड़ती।
  • फॉर्म भरने के बाद अपने परिवार को इस फैसले के बारे में जरूर बताएं, क्योंकि आपके जाने के बाद उनकी कानूनी अनुमति अनिवार्य होती है।

डोनर कार्ड क्या होता है?

NOTTO या किसी संस्था द्वारा जारी किया गया एक पहचान पत्र होता है, जो यह बताता है कि आपने अपनी मृत्यु के बाद अपने अंग दान करने का संकल्प लिया है। यह कार्ड आपकी इच्छा का प्रमाण तो है, लेकिन आपके जाने के बाद अंगदान तभी हो सकता है जब आपका परिवार इसके लिए अंतिम लिखित अनुमति देता है।

अंगदान के बारे में 5 बड़े मिथ

भ्रम (Myths)सच (Facts)
अगर मैं अंगदान के लिए साइन करूंगा, तो डॉक्टर अस्पताल में मुझे बचाने की कोशिश नहीं करेंगे।डॉक्टर का पहला काम आपकी जान बचाना होता है, अंगदान की बात सिर्फ तब शुरू होती है जब मरीज 'ब्रेन डेड' घोषित हो जाए।
घर पर सामान्य मौत होने के बाद भी शरीर के सारे अंग दान किए जा सकते हैं।घर पर प्राकृतिक मौत होने पर सिर्फ आंखें दान हो सकती हैं, बाकी अंग नहीं।
अंगदान करने से मृत व्यक्ति का शरीर पूरी तरह से खराब हो जाता है।अंगों को एक सामान्य ऑपरेशन की तरह बेहद सम्मान से निकाला जाता है, जिससे शव पर बाहर से कोई खराबी या दाग न दिखे।
अंगदान के लिए परिवार को अस्पताल को बहुत सारे पैसे देने पड़ते हैं।अंगदान पूरी तरह से मुफ्त और एक नेक काम है, डोनर के परिवार से पैसा नहीं लिया जाता।
मैं बहुत बूढ़ा हूं या मुझे बीमारी है, इसलिए मेरे अंग किसी काम के नहीं हैं।उम्र मायने नहीं रखती, मौत के वक्त डॉक्टर्स मेडिकल जांच करके खुद तय करते हैं कि आपके कौन से अंग स्वस्थ हैं और जान बचा सकते हैं।
अगर अंगदान किए तो अगले जन्म में उस अंग के बिना पैदा होना पड़ेगा।यह सिर्फ एक अंधविश्वास है।
अंगदान करने से भगवान नाराज होते हैं।सभी प्रमुख धर्मों में अंगदान को इंसानियत की सबसे बड़ी सेवा और एक पुण्य का काम माना जाता है।
अंगदान के बाद डॉक्टर पूरी बॉडी को कांट छांट पर परिवार को देते हैं।अंगों को एक सामान्य और बेहद साफ-सुथरे सर्जिकल ऑपरेशन की तरह निकाला जाता है।