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नॉर्मल नहीं है Bleeding Eye Virus, संक्रमण जल्दी लेता है अपनी गिरफ्त में

ब्लीडिंग आई वायरस जिसका साइटिंफिक नाम मारबर्ग वायरस है बहुत तेजी से अफ्रीका, ब्राजील, कोलांबिया, कांगो, युगांडा और केन्या सहित कई देशों में फैल रहा है।

नॉर्मल नहीं है Bleeding Eye Virus, संक्रमण जल्दी लेता है अपनी गिरफ्त में

Written by Puja Mehrotra |Published : December 10, 2024 3:48 PM IST

इन दिनों कई देशों में कोहराम मचा रहा ब्लीडिंग आई वायरस बहुत तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। यह एक घातक बीमारी है जिसकी चपेट में आने के बाद लोगों को खासा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। अगर समय से इसका इलाज न हो तो यह हैमरेज का कारण बन सकता है। इस वायरस की चपेट में आने वाले लोगों को आंखों में जलन होना और खून आने जैसी समस्याएं हो रही हैं। जिसके चलते जान जाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

रवांडा में तो ब्लीडिंग आईज वायरस से अब तक 15 लोगों को जान जा चुकी है, वहीं दुनियाभर में सैकड़ों लोग इससे पीड़ित हैं। ब्रिटेन में भी 5 लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। भारत सरकार ने इन देशों में ट्रैवल कर रहे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की है। हमने ब्लीडिंग आई के बचाव और प्रीकॉशन को लेकर बात की सर गंगाराम अस्पताल के सीनियर कंसलटेंट डॉ. अतुल गोगिया से, वो कहते हैं," यह मारबर्ग वायरस का संक्रमणहै जिसे कॉमन लैंग्वेज में ब्लीडिंग आईज वायरस कहा जा रहा है।"

ब्लीडिंग आइज वायरस की पहचान

डॉ. गोगिया ने बताया कि यह सामान्य बीमारी नहीं है। उन्होंने बताया कि यह आमतौर पर गुफाओं में जाने वाले या फिर अफ्रीकन देशों में रहने वाले लोगों को होती है। चूंकि यह वायरस से फैलती है इसलिए सावधानी बहुत जरूरी है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह वायरस 2 से 20 दिनों के बीच अपना प्रभाव दिखाता है। इसके लक्षणों में बुखार, लगातार सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, पेट में दर्द और उल्टी आना शामिल है। डॉ. गोगिया कहते हैं, "अगर लंबे समय से बुखार है, सिरदर्द है और शरीर में लगातार कमजोरी बनी हुई है..आंखें लाल भी हैं और आप ऐसे किसी के कांटैक्ट में आए हैं जो ये बीमारी से संक्रमित रहा है तो डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए।"

डॉ. ने हमें बताया कि अभी इसे लेकर कोई स्पेसिफिक दवा या फिर वैक्सीन नहीं आई है। लेकिन वह यह जरूर बताते हैं कि इससे बचाव के लिए आप कुछ तरीके अपना सकते हैं जिनमें जल्द से जल्द इसकी पहचान करना, शरीर में पानी की कमी न होने देना और हाइड्रेशन बनाए रखना शामिल हैं। हां वो ये जरूर कहते हैं कि घरेलू उपाय न करें क्योंकि इलाज में देरी से बीमारी के बढ़ने के चांसेज होते हैं और मॉरटेलिटी बढ़ जाने का खतरा रहता है। डॉ. गोगिया कहते हैं कि इस बीमारी से आंखों में धुंधलापन आ जाता है। अगर हैमरेज हो गया है तो आंखों में ब्लीडिंग होने लग जाती है। चूंकि यह वायरल फीवर है तो इसका शरीर के हर अंग पर प्रभाव पड़ता है।

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कैसे फैलता है ये वायरस?

चूंकि यह वायरस है तो यह बहुत तेजी से एक दूसरे के संपर्क में आने से फैलता है। डॉ. कहते हैं "ह्यूमन टू ह्यूमन कांटैक्ट में आने से तो फैलता ही है साथ ही बेडशीट व पिलो कवर जैसी चीजों के संपर्क में आने से भी यह बीमारी फैलती है। इसलिए जरूरी है कि साफ सफाई रखें और समय समय पर सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।"

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