जानिए आपकी सेहत को किस तरह प्रभावित करती है नाइट शिफ्ट

देर रात काम करने पर खुद को फ्रेश रखने के लिए हम अकसर चाय, कॉफी या चॉकलेट का सेवन करते हैं। आधी रात को चॉकलेट खाने से शुगर और फ़ैट दिन के मुकाबले कहीं देर तक ख़ून में दौड़ता रहता है।

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Written By: Yogita Yadav | Published : January 20, 2019 1:06 PM IST

कॉरपोरेट की अपेक्षाएं बढ़ने के साथ ही आप पर काम का अतिरिक्‍त बोझ आन पड़ा है, ऐसे में नाइट ड्यूटी करना अब बहुत आम बात हो गई है। पर क्‍या आप जानते हैं कि यह धीरे-धीरे किस तरह आपकी सेहत को प्रभावित कर रही है।

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अलग-अलग क्षेत्रों में होते हुए भी अब नाइट ड्यूटी करना आम बात हो गई है। मीडिया, बीपीओ से अलग डॉक्‍टर, नर्स, पुलिस और कई अन्‍य क्षेत्रों में भी आप नाइट ड्यूटी से बच नहीं सकते। बल्कि अब तो बेहतर परफॉर्मेंस के लिए कई कंपनियों ने मिड डे शिफ्ट को बढ़ाकर लेट ईवनिंग में तब्‍दील कर दिया है। युवा खुश भी हैं इस बदलाव से। खासतौर से वे लोग जो दिन में पढ़ाई करते हैं और लेट ईवनिंग शिफ्ट में काम करके अपने लिए पॉकेट मनी भी निकाल लेते हैं। पर क्‍या आप जानते हैं कि थोड़े दिन की यह खुशी आपकी सेहत को किस तरह प्रभावित कर रही हैं।

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जान लें सेहत से जुड़े ये नुकसान

असल में हमारे मस्तिष्क में कुछ हज़ार ऐसी कोशिकाएं होती हैं, जहां हमारे शरीर की मुख्य जैविक घड़ी होती है। कब सोना है, कब जगना है या भोजन पचाने के लिए लीवर को कब एंजाइम पैदा करना है, जैविक घड़ी इन सबको नियंत्रित करती है।

यह घड़ी हमारे दिल की धड़कन को भी नियंत्रित करती है, यह सुबह धड़कन को तेज़ और शाम को सुस्त करती है।

जैविक घड़ी पर 20 सालों तक काम कर चुके कैंब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर माइकल हैस्टिंग्स कहते हैं, “हमारे सभी अंग खास समय पर खास काम करने के लिए पहले से तय अनुवांशिक निर्देशों के अधीन होते हैं। ”

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यह इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन नमूना है जो क्रमिक विकास का नतीजा है। यह नीदरलैंड के गुफ़ा मानवों के लिए बिल्कुल सटीक है लेकिन 21वीं सदी के रात की पाली में काम करने वालों के लिए नहीं।

फैट और शुगर - देर रात काम करने पर खुद को फ्रेश रखने के लिए हम अकसर चाय, कॉफी या चॉकलेट का सेवन करते हैं। आधी रात को चॉकलेट खाने से शुगर और फ़ैट दिन के मुकाबले कहीं देर तक ख़ून में दौड़ता रहता है।

डायबिटीज - खून में शुगर की अधिक मात्रा से टाइप 2 डायबिटीज़ होता है और फै़ट का स्तर बढ़ने से दिल का रोग होता है। इसीलिए रात की पाली में काम करने वालों में दिल के रोग का ख़तरा डेढ़ गुना ज़्यादा होता है।

मोटापा - रात में काम करने वालों मोटापे का भी यही कारण है। कैंसर से भी इसका संबंध है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2007 में कहा था कि रात में काम करना कैंसर का कारण हो सकता है।

क्‍या कहता है नया शोध

एक हालिया शोध में पता चला है कि दस साल तक रात की पाली में काम करने वाले मज़दूर का दिमाग 6.5 साल बूढ़ा हो जाता है। उन्हें सोचने और याद रखने में दिक्कत आती है। अमरीका में उन 75,000 नर्सों पर एक अध्ययन हुआ जो पिछले 22 साल से पालियों में काम करती हैं। पता चला कि उन नर्सों में दस में से की मौत जल्दी होगी, जिन्होंने छह साल तक पालियों में काम किया।

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खानपान में बरतें परहेज  - हानिकारक चीजें खाने/पीने से परहेज करें चाहे कितना भी जी करे। दिन में कई बार आपका कॉफी पीने, चॉकलेट खाने का जी करता है पर आपकी सेहत के लिए यही बेहतर होगा कि इन चीज़ों से जहां तक मुमकिन हो परहेज करें। खाने में विभिन्न विटामिन, मिनरल्स, प्रोटीन आदि पर जोर दें जिनसे आपकी मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया सेहत और ताकत भरी हो।

कम मात्रा में लें रात का खाना - रात का खाना कम मात्रा में खाएं क्योंकि ज्यादा खाने से नींद सताएगी और काम करते हुए आप पर सुस्ती छाई रहेगी। यह भी ध्यान रखें कि रात के समय पाचन की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है इसलिए कम मात्रा में खाने का जरूर लाभ मिलेगा। नाइट शिफ्ट करने वालों के रात के खाने का उचित समय शाम 5 बजे से रात 7 बजे तक है जिसके बाद नाइट शिफ्ट शुरू होता है। सेहत भरे आहार के कई आसान विकल्प हैं जिन्हें अपनाना बेहतर होगा जैसे कि उबले अंडे, फ्रूट जूस, कम मलाई युक्त दही के साथ फलों के टुकड़े, फलों के साथ पीनट बटर आदि।

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