
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Published : June 25, 2021 12:28 PM IST
यदि टाइप 2 डायबिटीज का समय पर इलाज न किया गया तो ये न्यूरोपैथी, रेटिनोपैथी, हृदय रोग और किडनी की बीमारियों का कारण बन सकता है।
Type 2 Diabetes In Men and Women: डायबिटीज के मरीजों की संख्या को लेकर भारत विश्वभर में दूसरे नंबर है। रिसर्च के मुताबिक जितनी तेजी से भारत में डायबिटीज के मरीज बढ़ रहे हैं उससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि 2045 तक भारत डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो जाएगी और भारत विश्वभर में डायबिटीज मरीजों का गढ़ बन जाएगा। डायबिटीज दो तरह की होती है- टाइप 1 डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज। टाइप 2 डायबिटीज एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। भारत में 77 मिलियन लोग टाइप-2 डायबिटीज की चपेट में आ चुके हैं। क्यों होती है टाइप-2 डायबिटीज? जब शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम होने लगती है तो ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है जिससे टाइप 2 डायबिटीज होती है। इस स्थिति को हाइपरग्लाइसेमिक भी कहा जाता है। टाइप 2 डायबिटीज का अगर समय पर इलाज न किया जाए तो ये शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करने लगती है। हालांकि पुरुषों और महिलाओं में टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण अलग अलग दिखते हैं।
स्टडीज बताती हैं कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों को टाइप-2 डायबिटीज का ज्यादा खतरा होता है। यह टेस्टोस्टेरोन की उपस्थिति के कारण होता है। दरअसल, पुरुषों में मांसपेशियों का विकास, शरीर में बालों का उगना, आवाज का भारी होना और जननांगों का विकास टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन (Testosterone Hormone) के कारण ही होता है। यह हॉर्मोन पुरुषों के शरीर में जिंदगी भर बना रहता है जो स्पर्म और सेक्सुअल डिसायर को बनाए रखता है। लेकिन यही हार्मोन पुरुषों के शरीर में विसरल फैट के जमाव से भी जुड़ा होता है। क्योंकि यह फैट आंतों में जमा होता है जो पुरुषों के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है। इससे मेटाबॉलिक डिसऑर्डर की समस्या बढ़ती है। कई स्टडीज में यह साफ हो चुका है कि विसरल फैट के कारण टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ता है। ऐसी स्थिति में पुरुषों को और भी क्रोनिक डिजीज होने का खतरा रहता है। हालांकि महिलाओं के शरीर में भी कुछ मात्रा में टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन होता है जो मेनोपॉज के बाद हॉर्मोन को संतुलित रखने में मदद करता है।
जब शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है तो ये कई तरह से नुकसान पहुंचाता है। टाइप 2 डायबिटीज के सामान्य लक्षणों में बार बार प्यास लगना, बार बार पेशाब आना, कमजोरी, चक्कर आना और वजन कम होना जैसे लक्षण दिखते हैं। ये लक्षण पुरुष और महिला दोनों में दिखते हैं। लेकिन टाइप 2 डायबिटीज के जो लक्षणसिर्फ पुरुषों (Type 2 Diabetes Symptoms In Mens) में दिखते हैं वो हैं मसल्स मास का कम होना और जेनिटल पार्ट में इंफेक्शन हैं। जब महिलाओं में टाइप 2 डायबिटीज के लक्षणों (Type 2 Diabetes Symptoms In Women) में जेनिटल यीस्ट इंफेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) शामिल हैं। यदि टाइप 2 डायबिटीज का समय पर इलाज न किया गया तो ये न्यूरोपैथी, रेटिनोपैथी, हृदय रोग और किडनी की बीमारियों का कारण बन सकता है।