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Written By: Yogita Yadav | Published : August 23, 2018 6:26 PM IST
सिर दर्द हल्का-हल्का शुरू होता है और धीरे-धीरे थोड़ा बढ़ जाता है। कभी-कभी यह इतना असहनीय हो जाता है कि आप कुछ नहीं कर पाते। कई बार दर्द की तीव्रता इतनी अधिक होती है कि कोई दवा भी उस पर पूरी तरह असर नहीं कर पाती।
क्यों होता है सिरदर्द?
सिरदर्द मुख्य रूप से तनाव, अत्यधिक शारीरिक और मानसिक परिश्रम, अपर्याप्त नींद और भूख, मोशन सिकनेस, अत्याधिक शोरगुल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अधिक प्रयोग के कारण हो सकता हैं। कभी-कभी, अधिक सोचना, अपर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी सिरदर्द के कारण बन जाते हैं।
जानें सिर दर्द के प्रमुख कारण
जब शरीर व मन में तनाव संभालना मुश्किल हो जाए, तब ये सिरदर्द का स्वरूप ले लेता है। ध्यान तनाव को कम कर सिरदर्द से छुटकारा दिलाता है। जितना ज़्यादा और जितनी बार आप ध्यान करते हैं, उतना ही तनाव आपसे दूर हो जाता हैl
दिनभर घर व काम पर भागते भागते बहुत से काम निपटाने होते हैं। यह थकान जब तन के साथ मन पर भी बढ़ जाती है तो यह दोनों मिलकर सिरदर्द का कारण बनती हैं
आपने ध्यान दिया होगा कि जब आपका पेट खराब होता है, आपको सिरदर्द होने लगता है । हमारे शरीर के सब अंग एक दूसरे से अच्छे से जुड़े हुए हैं इसलिए एक अंग में किसी भी प्रकार का असंतुलन, दूसरे अंग को प्रभावित करता है।
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सिर में अल्प रक्त प्रवाह होने पर भी सिर दर्द होने लगता है। दिन में प्रति दिन दो बार 10-20 मिनट का ध्यान न केवल शरीर व मन को गहरा विश्राम देता है बल्कि सिर के क्षेत्र में रक्त का प्रवाह भी बढ़ाता है। इस क्षेत्र में बढ़ा हुआ रक्त प्रवाह सिरदर्द की संभावना को कम कर देता है। इसके अलावा हस्तपादासन, सर्वंगासन और हलासन भी इस समस्या से छुटकारा दिलाते हैं।
लंबे समय तक काम करना, अत्यधिक काम करने की आदत या टीवी व इंटरनेट की लत, ये सभी बहाने हैं रात को देर से सोने के। यद्यपि ये अच्छा नहीं है कि इन्हे आदत बनाया जाए और रात में देर से सोया जाए लेकिन कई बार यह अपरिहार्य (जिसे टाला न जा सके) हो जाता है। जब किसी प्रॉजेक्ट की समय सीमा समाप्त हो रही हो या देर रात क्लाइंट की मीटिंग हो। यह सभी वजह अगले दिन अपने साथ सिरदर्द लेकर आती हैं।
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हम सभी ने कभी न कभी अत्यधिक शोर का अनुभव किया होगाl हम में से कुछ बिल्कुल भी शोर सह नहीं पाते हैं और जल्दी ही सिरदर्द की शिकायत करने लगते हैं।
यह एक ऐसी स्थिति है जिससे बचना कई बार मुश्किल हो जाता है। दिन भर की क्लाइंट कॉल या देश विदेश के दोस्तों के हालचाल लेना ये सब काम हम हर दिन अपने जीवन में करते हैं। कभी कभी ये फ़ोन पर ज़्यादा देर बात करना सिरदर्द का कारण बन जाता है।
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ज़रूरत से ज़्यादा सोचना
एक हल है, ज़्यादा सोचना बंद कर दें। लेकिन कई बार सोचना अवश्यंभावी हो जाता है। रोजमर्रा की जिंदगी का तनाव, काम का दबाव, परिवार का दबाव, सम्बंधों के विवाद, इन सबके बीच हम कैसे नहीं सोचें। लेकिन आप निश्चित ही दिन में कुछ समय निकाल कर आँख बंद कर विश्राम कर सकते हैं। कुछ समय के लिए बाहरी संसार को अलग रख, अपने साथ रहें इसे अपना समय समझ कर प्रयोग करें और अंतर देखें।
चित्र स्रोत:Shutterstock.