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Medically Verified By: Dr. Dhruv Chaturvedi
ब्रेन ट्यूमर यानी मस्तिष्क में आसामान्य रूप से बढ़ने वाला ऊतक, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं के अनियंत्रित विभाजन के कारण बनता है। यह स्थिति गंभीर हो सकती है, लेकिन जरूरी नहीं कि हर ब्रेन ट्यूमर जानलेवा या कैंसरस हो। कई बार यह ट्यूमर बिना कैंसर वाला होता है और उसका इलाज पूरी तरह संभव होता है। ट्यूमर का प्रकार, उसकी स्थिति और उसका ग्रेड यह तय करते हैं कि वह कितना खतरनाक है। विश्व ब्रेन ट्यूमर के मौके पर न्यूरोसर्जरीडॉ. ध्रुव चतुर्वेदी (Dr. Dhruv Chaturvedi, Associate Director, Neurosurgery, Brain Tumor Surgery, PSRI Hospital Delhi) से हमने ब्रेन ट्यूमर पर विस्तार से बात की है और आइए जानते हैं यह क्या है और कब जानलेवा बन सकता है।
ब्रेन ट्यूमर को मुख्य रूप से दो प्रकारों में बांटा जाता है– बेनाइन (गैर-कैंसरस) और मेलिग्नेंट (कैंसरस)। बेनाइन ट्यूमर सामान्यतः धीरे-धीरे बढ़ते हैं और मस्तिष्क के अन्य हिस्सों में नहीं फैलते। इनका इलाज अपेक्षाकृत आसान होता है और मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। वहीं, मेलिग्नेंट ट्यूमर तेजी से बढ़ते हैं, आस-पास के मस्तिष्क ऊतकों में फैल सकते हैं और इनसे जान का खतरा भी हो सकता है।
बेनाइन ट्यूमर में प्रमुख रूप से मेनिंजियोमा शामिल है, जो मस्तिष्क को ढकने वाली झिल्ली से उत्पन्न होता है। यह आमतौर पर कैंसरस नहीं होता और सर्जरी से पूरी तरह निकाला जा सकता है। इसी प्रकार पिट्यूटरी एडिनोमा पिट्यूटरी ग्रंथि में बनने वाला एक ट्यूमर है, जो हार्मोन असंतुलन का कारण बन सकता है, लेकिन यह भी कैंसरस नहीं होता। स्वेवनोमा नसों की बाहरी परत से उत्पन्न होने वाला ट्यूमर है, जो धीमी गति से बढ़ता है।
मेलिग्नेंट ट्यूमर में सबसे घातक ट्यूमर ग्लायोब्लास्टोमा मल्टीफॉर्मे माना जाता है। यह अत्यधिक आक्रामक होता है और तेजी से फैलता है। इसे ग्रेड 4 ट्यूमर कहा जाता है, जो मस्तिष्क के महत्वपूर्ण हिस्सों को प्रभावित करता है और मरीज के जीवन की अवधि को गंभीर रूप से कम कर सकता है। इसके अलावा ग्रेड 3 ग्लायोमा, मेडुलोब्लास्टोमा और एपेंडिमोमा जैसे ट्यूमर भी गंभीर माने जाते हैं।
इसके अलावा मेटास्टेटिक ब्रेन ट्यूमर भी खतरनाक होते हैं, जो शरीर के अन्य अंगों जैसे फेफड़े, स्तन, या किडनी से मस्तिष्क में फैलते हैं। ये अक्सर कैंसरस होते हैं और उनके इलाज में दोहरी चुनौती होती है – मूल कैंसर का इलाज और ब्रेन में फैले ट्यूमर का इलाज। ऐसे मामलों में मरीज की स्थिति जटिल हो सकती है।
ब्रेन ट्यूमर का पता लगाने के लिए MRI, CT स्कैन और बायोप्सी जैसे परीक्षण किए जाते हैं। उपचार की योजना ट्यूमर के प्रकार, स्थान, आकार और मरीज की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार बनाई जाती है। उपचार में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी और सहायक दवाओं का उपयोग किया जाता है।
यह समझना जरूरी है कि हर ब्रेन ट्यूमर जानलेवा नहीं होता। यदि समय पर पहचान हो जाए और सही उपचार मिले, तो मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। लगातार सिरदर्द, उलझन, देखने में समस्या, दौरे या याददाश्त की कमी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें। समय पर लिया गया निर्णय ही जीवन को सुरक्षित और स्वस्थ बना सकता है।