
Also Read
डायबिटीज (Diabetes) पूरी दुनिया में जीवनशैली से जुड़ी सबसे आम बीमारी है। इससे दुनिया भर में 46 करोड़ लोग पीड़ित हैं। भारत की बहुत बड़ी आबादी इस बीमारी से जूझ रही है और चीन के बाद यहांं इसकी दर सबसे ज्यादा है। आईडीएफ (इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन) के अनुसार, साल 2019 में भारत में डायबिटीज मरीजों की संख्या 7.7 करोड़ थी। इसका मतलब है कि दुनिया में हर छठा डायबिटीज मरीज भारत में रहता है।
हाल ही में 2021 में किये गये एक सर्वेक्षण में पाया गया कि जो लोग भारत में शहरों और महानगरीय क्षेत्रों में रहते हैं, उनमें डायबिटीज होने का खतरा पहले से कहीं अधिक है। व्यापक रूप में ऐसा माना जाता है कि डायबिटीज शरीर के प्रमुख अंगों जैसे हृदय, गुर्दों, आंखों, पैरों आदि को प्रभावित करता है। हालांकि, इस तथ्य को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है कि यह मेटाबॉलिक डिजीज (Metabolic Diseases) आपकी ओरल हेल्थ (मुंह की सेहत) को भी काफी प्रभावित कर सकता है।
डॉ. दर्शनी विक्रम शाह (डेंटल कॉस्मेटिक्स एंड इम्प्लांटोलॉजी) के अनुसार, यदि किसी को डायबिटीज की समस्या है तो उनमें दांतों की सड़न, मसूड़ों और दांतों को उनके स्थान पर पकड़कर रखने वाले हड्डियों में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, डायबिटीज मुंह में रक्त संचार को कम कर सकता है। शुगर का स्तर (Sugar Level) जितना ज्यादा होगा, उनमें इन समस्याओं का खतरा उतना ज्यादा होगा। इसके अलावा, जब किसी को डायबिटीज की समस्या हो और उसकी उम्र पचास वर्ष से अधिक हो तो डायबिटीज से ग्रसित ऐसे लोगों में युवाओं की तुलना में अधिक समस्याएं होती हैं।
भले ही किसी व्यक्ति को डायबिटीज हो या न हो, दांतों से जुड़े रोगों के प्रमुख शुरूआती लक्षण इस प्रकार हैं:
हालांकि, यदि कोई डायबिटिक है तो उन्हें इसके बारे में ज्यादा सतर्क रहना चाहिये और तुरंत डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिये। क्योंकि डायबिटीज मरीजों में यह समस्या तेजी से बिगड़ सकती है और आमतौर पर ठीक होने में लंबा वक्त लगता है।
मुंह से जुड़ी प्रमुख समस्याएं जो डायबिटीज से पीड़ित लोगों को ज्यादा प्रभावित कर सकती हैं:
दांतों का सड़ना (कैविटी): कैविटी के लक्षणों में गर्म और ठंडे के प्रति संवेदनशीलता, मिठाई और मीठे पेय पदार्थों के प्रति संवेदनशीलता, दांत दर्द, दांतों पर दाग और छेद शामिल होते हैं।
समय पूर्व मसूड़ों का रोग (जिन्जवाइटिस): डायबिटीज मरीजों में समय पूर्व मसूड़ों का रोग मुंह की सबसे आम बीमारी है। यह बैक्टीरिया के कारण होता है और लक्षणों में गले में खराश और लाल या मसूड़ों से खून निकलना शामिल है। डायबिटीज बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता को कम कर देता है, जिससे व्यक्ति को मसूड़े की सूजन होने का खतरा बढ़ जाता है।
एडवांस गम डिजीज (पीरियोडोंटाइटिस): जब इसका इलाज नहीं कराया जाता है, तो प्रारंभिक मसूड़े की बीमारी से पीरियोडोंटाइटिस नामक एडवांस गम डिजीज हो सकती है। यह मसूड़े की ज्यादा गंभीर बीमारी है, जो दांतों को सहारा देने वाले कोमल ऊतकों और हड्डियों को नष्ट कर देती है। यदि समय पर इसका इलाज ना कराया जाये, तो दांतों की सबसे खराब स्थिति में वे ढीले हो जाते हैं और शायद उनके गिरने का कारण बन सकता है।
थ्रश: यह एक प्रकार का फंगल इंफेक्शन है, जो यीस्ट के कारण होता है। डायबिटीज मरीजों को इसका खतरा अधिक होता है। इसके लक्षणों में मुँह में पीड़ादायक सफेद या लाल धब्बे शामिल हैं।
ड्राई माउथ: डायबिटीज मुंह में लार बनने की गति को धीमा कर देता है, जिससे ड्राई माउथ का खतरा होता है। लार एंजाइम पैदा करती है जो बैक्टीरिया को नष्ट करती है। लार में कमी के साथ ही ये बैक्टीरिया अनियंत्रित हो जाते हैं, जिससे घाव, अल्सर, दांतों की सड़न और मसूड़ों की बीमारी हो जाती है।
हालांकि, डायबिटीज से पीड़ित लोगों को मुंह की बीमारियों का खतरा अधिक होता है, लेकिन नीचे कुछ सरल उपाय दिये गये हैं जिनसे परेशानियों को रोकने में मदद मिल सकती है:
फिजिशियन, आहार विशेषज्ञ और डेंटल हाइजिनिस्ट के साथ मिलकर डेंटिस्ट मरीज के मुंह की सेहत को बनाये रख सकते हैं और संभवत: डायबिटीज मरीजों में मेटाबॉलिक नियंत्रण में सुधार कर सकते हैं। मरीज के फिजिशियन से संपर्क कर, डेंटिस्ट संकेतों और मुंह से जुड़ी समस्या से ग्रसित मरीजों के उपचार में दवाओं के अंतर्विरोध के बारे में चर्चा कर सकते हैं। वे डायबिटीज की वजह से नजर आने वाली समस्याओं से जूझ रहे मरीजों में ऐसा कर सकते हैं। ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल करने से डायबिटीज संबंधी आपातकालीन स्थिति को बदला जा सकता है।
हालांकि, डायबिटीज जैसी जटिल जीवनशैली की बीमारी से निपटने के लिये एक डेंटिस्ट पहला चिकित्सकीय पेशेवर नहीं हो सकता है, लेकिन वे डायबिटीज प्रबंधन की दिशा में रोगी के इस सफर का अहम हिस्सा होते हैं। बीमारी से निपटने के लिये न केवल अपने दिल और गुर्दे के स्वास्थ्य की देखभाल करना आवश्यक है, बल्कि मुंह के स्वास्थ्य को नियंत्रण में रखने के लिये सही दिशा में कदम उठाना भी आवश्यक है।
(इनपुट: डॉ. दर्शनी विक्रम शाह, डायरेक्टर, डेंटल कॉस्मेटिक्स एंड इम्प्लांटोलॉजी, शेल्बी हॉस्पिटल्स)