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Dry Eye
What is Dry Eye Syndrome : ड्राई आई सिंड्रोम आज एक नया लाइफस्टाइल डिसऑर्डर बनकर उभरा है, जिसका मुख्य कारण लंबे समय तक स्क्रीन और अन्य डिजिटल गैजेट्स का अत्यधिक उपयोग, बढ़ता प्रदूषण और एयर-कंडीशनिंग का (Causes of Dry Eye Syndrome) प्रभाव है। अक्सर तब तक इस समस्या को नजरअंदाज किया जाता है जब तक दृष्टि से जुड़ी परेशानियां सामने नहीं आ जातीं। वर्तमान समय में ड्राई आई सिंड्रोम बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रहा है, जिससे इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ गई है। आज इस लेख में हम गुरुग्राम स्थिति कम्प्लीट आई केयर हॉस्पिटल की आई एक्सपर्ट डॉक्टर पारुल सोनी से इस परेशानी के बारे में विस्तार से जानेंगे। आइए जानते हैं ड्राई आई के बारे में कुछ मुख्य बातें-
कम्प्लीट आई केयर की फाउंडर और डायरेक्टर डॉ. पारुल सोनी के अनुसार, ड्राई आई डिज़ीज़ दुनिया की लगभग 50 से 70 प्रतिशत आबादी को प्रभावित कर सकती है, लेकिन अधिकांश लोग अभी तक इसे एक गंभीर समस्या के रूप में नहीं पहचानते। ड्राई आई के प्रमुख लक्षण (Symptoms of Dry Eye) इस तरह हैं-
डॉक्टर का कहना है कि ये लक्षण अत्यधिक स्क्रीन टाइम, पर्यावरणीय प्रदूषण और कुछ दवाओं के सेवन से और अधिक गंभीर हो सकते हैं।
डॉक्टर पारुल का कहना गै कि जहां लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स केवल अस्थायी राहत प्रदान करती हैं, वहीं, Lumecca IPL और Forma-I ड्राई आई की जड़ पर काम करते हैं। ये ट्रीटमेंट मीबोमियन ग्लैंड्स को सक्रिय कर आंसुओं की प्राकृतिक परत को पुनः स्थापित करते हैं, जिससे मरीजों को लॉन्ग-टर्म, पेनलेस राहत मिलती है और किसी प्रकार का डाउनटाइम नहीं होता।
आई-स्पा में BlephEx जैसी सेवाएं शामिल हैं, जो पलकों की गहरी सफाई करती हैं, साथ ही पंक्टल प्लग प्लेसमेंट, जो आंखों में प्राकृतिक आंसुओं को बनाए रखने में मदद करता है। ये प्रक्रियाएं न केवल टीयर फिल्म को स्थिर रखती हैं और बीमारी की प्रगति को धीमा करती हैं, बल्कि डार्क सर्कल्स, अंडर-आई बैग्स और फाइन लाइन्स को कम करके आंखों की कम्फर्ट और अपीयरेंस में भी सुधार लाती हैं। आधुनिक सर्जिकल तकनीकों की मदद से आज लगभग 99 प्रतिशत मरीज बिना चश्मे के स्पष्ट दृष्टि प्राप्त कर सकते हैं।