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Written By: Editorial Team | Published : August 30, 2017 3:17 AM IST
अधिकतर महिलाओं को यह लगता है कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीका सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद करता है। यह सच है लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आप कैंसर की स्क्रीनिंग ही ना कराएं। दिशानिर्देशों के मुताबिक, 21 से 65 साल की हर महिला को सर्वाइकल कैंसर के लिए स्क्रीनिंग करानी चाहिए क्योंकि यह शीघ्र निदान में मदद करता है। लीड क्लिनिकल पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर लता कीनीआपको सर्वाइकल कैंसर और टीकाकरण के बारे में बता रही हैं।
सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामले यौन संक्रमित संक्रमण से जुड़े हैं, जो ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से होते हैं. एक अनुमान के अनुसार 6.6 फीसदी महिलाओं को किसी भी समय सर्वाइकल एचपीवी इन्फेक्शन हो सकता है। इनमें से 75 फीसदी यौन सक्रिय व्यक्ति अपने जीवनकाल में कम से कम एक एचपीवी टाइप से संक्रमित हो सकते हैं। ज्यादातर मामलों में, एचपीवी संक्रमण अपने आप ठीक हो सकते हैं, लेकिन कुछ कैंसर का कारण बन सकते हैं।
नॉर्मल इम्यून फंक्शन वाली महिलाओं में इसे विकसित होने में 15 से 20 साल लगे हैं, जबकि कोम्प्रोमाइज्ड इम्यून वाली महिलाओं के मामले में ऐसा नहीं है। इसलिए यदि आप एचआईवी संक्रमण से पीड़ित हैं या इम्युनिटी सिस्टम कमजोर है, तो कैंसर के विकास के लिए सिर्फ 5 से 10 साल लग सकते हैं। लेकिन एचपीवी वैक्सीन के साथ जोखिम को कम किया जा सकता है।
एचपीवी वैक्सीन और स्क्रीनिंग
दो तरह के एचपीवी से बचाने के लिए वर्तमान में तो तरह के टीके उपलब्ध हैं जिनका नाम है एचपीवी 16 और 18, जो लगभग 70 फीसदी सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार हैं। अध्ययनों के अनुसार, टीके एचपीवी संक्रमण को रोकने में प्रभावी हैं। हालांकि इन टीकों को पहली बार यौन संबंध बनाने से पहले लिया जाना चाहिए। इसलिए डब्लूएचओ ने 9- 13 साल की लड़कियों के लिए इसकी सिफारिश की है ताकि सर्वाइकल कैंसर से बचा जा सके।
अगर लड़कियां इन नियमों का पालन करने लग जाएं, तो भारत में सर्वाइकल कैंसर का मामले कम हो सकते हैं। बेशक आपने टीका लगवा लिया हो लेकिन फिर भी आपको सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग करानी चाहिए, इससे आपको शुरूआती चरण में कैंसर को जानने में मदद मिल सकती है, क्योंकि टीकाकरण आपको वायरस के केवल दो प्रमुख टाइप से रोकता है।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock