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Written By: Atul Modi | Published : August 1, 2022 4:12 PM IST
कोरोना जैसी घातक बीमारी के बाद अब देश में मंकीपॉक्स भी अपनी दस्तक दे चुका है. देश से मंकीपॉक्स के मामले भी समाने निकलकर आने लगे हैं. मंकीपॉक्स को लेकर वैश्विक आपातकाल भी घोषित हो चुका है. जिसके बाद लोगों को प्रतिबंध को लेकर एक बार फिर से डर पनपने लगा है. जिसे लेकर न्यूज़ चैनलों से लेकर सोशल मीडिया तक में कई तरह की जानकारियां साझा की जा रही हैं. ये जानकारी कितनी सही और कितनी गलत इस पर कुछ भी कहता सही नहीं होगा. हालांकि ऐसे प्लेटफ़ॉर्म पर मंकीपॉक्स को लेकर साझा की गयी हर जानकारी का यूजर्स भरोसा भी कर रहे हैं. ऐसे में फर्जी जानकारियों को ट्रैक कर पाना मुश्किल हो जाता है. मंकीपॉक्स वायरस से जुड़े कई सवालों के बीच कुछ मिथ भी हैं जो तेजी से वायरल हो रहे हैं.
मंकीपॉक्स का इन्फेक्शन काफी भयानक है, और ये समलैंगिंग पुरुषों से फैल रहा है. ये सोचना बेहद शर्मनाक है. इस तरह की खबरें पूरी तरह से भ्रामक हैं. CDC यानि की यूएस सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिंवेशन सेंटर ने मंकीपॉक्स को सेक्स्युअली ट्रांसमिटेड डिसीज नहीं कहा है. मंकीपॉक्स किसी संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क या संक्रमित से सेक्स करने पर फैलता है.
इन्फेक्शन को लेकर लोगों में डर का माहौल बनाने के लिए मंकीपॉक्स को जानलेवा बता दिया है. CDC के मुताबिक, मंकीपॉक्स से किसी की मौत नहीं होती. इसके लक्षण दर्दभरे जरुर हो सकते हैं.
मंकीपॉक्स का कोई भी वैक्सीन नहीं है. ये बात सोशल मीडिया पर खूब साझा की जा रही है. CDC के मुताबिक, मंकीपॉक्स चेचक का ही एक रूप है. मंकीपॉक्स के वायरस को रोकने के लिए चेचक में इस्तेमाल किये जाने वाले वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि भारत सरकार ने मंकीपॉक्स से जुड़े वैक्सीन को खरीदने की कोई योजनां नहीं बनाई है. हेल्थ मिनिस्ट्री के मुताबिक, अगर जरूरत पड़ी तो इस ओर भी ध्यान दिया जाएगा.
लोगों का कहना है की मंकीपॉक्स चेचक के ही समान है. जो की पूरी तरह से गलत है. मंकीपॉक्स चेचक की तरह दिखता है, ना कि उसके समान है. मंकीपॉक्स का इन्फेक्शन चेचक के इन्फेक्शन से काफी अलग होते हैं. जिसके लक्षण काफी दर्द से भरे हो सकते हैं.
मंकीपॉक्स वायरस को लेकर ये ऐसी भ्रामक या मिथ बाते हैं, जिनपर लोग विश्वास तो कर लेते हैं, लेकिन उनका असल तथ्य उन्हें नहीं पता होता. इस स्थिति में सावधान रहना बेहद जरूरी है.