
... Read More
Written By: Atul Modi | Updated : March 19, 2024 12:17 PM IST
अगर आप हेल्दी रहना चाहते हैं तो फिजिकल और मेंटल हेल्थ के साथ ही अपनी ओरल हेल्थ पर भी ध्यान देना भी जरूरी है। आप भले ही इसे कम महत्वपूर्ण मानें, लेकिन कई बीमारियों का कारण आपकी बिगड़ी हुई ओरल हेल्थ होती है। ओरल हेल्थ को जितनी कम तवज्जो दी जाती है, इससे जुड़े मिथक उतने ही ज्यादा प्रचलित हैं। कुछ गलतफहमियां आपकी हेल्थ के लिए मुसीबत बन सकती हैं। क्या हैं ये, आइए जानते हैं।
यह सच है कि मीठी चीजें दांतों को सड़ने का खतरा बढ़ाती हैं, लेकिन कैविटी का यह एकमात्र कारण नहीं है। स्टार्च युक्त भोजन जैसे कि ब्रेड, चावल और आलू भी भी दांतों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। ये सभी बैक्टीरिया को पनपाने हैं, जिससे एसिड बनता है और दांतों को नुकसान होता है। इसलिए सिर्फ मिठाई ही नहीं कुछ भी खाने के बाद आपको सादा पानी से कुल्ला करना चाहिए। इससे दांत कैविटी से बचते हैं।
हम हमेशा से सुनते आए हैं कि दिन में दो बार ब्रश करना अच्छा है, लेकिन यह पर्याप्त है, ऐसा बिलकुल नहीं है। भोजन खाने के बाद आपके मुंह में बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं और एसिड बनता है। इसलिए भोजन करने के बाद खासतौर पर मीठा या स्टार्च युक्त भोजन करने के बाद आप ब्रश करें। अगर ब्रश नहीं करें तो दांतों को फ्लॉस करें या माउथवॉश का यूज करें।
दूध में कैल्शियम होता है जो दांतों को मजबूत बनाने में मदद करता है। हालांकि दूध में भी चीनी होती है जो दांतों को सड़ा सकती है। इसलिए यदि आप दूध पीते हैं, तो उसके बाद अपने दांतों को ब्रश करना सुनिश्चित करें।
दांतों के रंग को उसकी सेहत का पैमाना माना जाता है। सफेद दांत स्वस्थ और पीले दांत अस्वस्थ। लेकिन यह गलत है दांतों का रंग आनुवंशिकी, उम्र और जीवन शैली सहित कई बातों से प्रभावित हो सकता है। पीले रंग के दांत जरूरी नहीं कि अस्वस्थ हों, लेकिन यदि आपको अपने दांतों के रंग के बारे में चिंता है तो आप डेंटिस्ट को जरूर दिखाएं।
आमतौर पर माना जाता है कि दांतों पर बहुत जोर लगाकर ब्रश करना चाहिए। लेकिन असल में यह एक खतरनाक मिथक है। आपके जोर से ब्रश करने से दांतों और मसूड़ों को नुकसान हो सकता है। इसलिए हमेशा सॉफ्ट ब्रिसल्स वाले टूथब्रश यूज करें।
दांतों को सेहतमंद रखने के लिए फ्लोराइड युक्त पानी पीने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इससे दांत मजबूत होते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। फ्लोराइड युक्त पानी का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। वयस्कों के लिए यह प्रति टूथपेस्ट में 1000 पीपीएम होना चाहिए। वहीं छह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए टूथपेस्ट में यह मात्रा 500 पीपीएम से भी कम होनी चाहिए। फ्लोराइड का ज्यादा सेवन फ्लोरोसिस रोग का कारण बन सकता है।
कुछ लोगों का तर्क है कि अक्ल दाढ़ हटाने से आंखों की रोशनी और याददाश्त बेहतर होती है। हालांकि यह तर्क पूरी तरह से गलत है। इस दाढ़ का आंखों और याददाश्त से कोई लेना-देना नहीं है।