घुटनों का दर्द कब हो सकता है अर्थराइटिस का संकेत? इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
घुटनों के दर्द को अक्सर हम में से कई लोग सामान्य उम्र की परेशानी समझ लेते हैं। लेकिन हर मामले में ऐसा नहीं होता है। कुछ मामलों में यह अर्थराइटिस का संकेत हो सकता है। आइए जानते हैं इस विषय के बारे में विस्तार से-
अक्सर लोग घुटनों के दर्द को बढ़ती उम्र, थकान या मौसम का असर मानकर महीनों तक नजरअंदाज करते रहते हैं। लेकिन हर घुटने का दर्द सामान्य नहीं होता। कई बार यही दर्द अर्थराइटिस की शुरुआती संकेत हो सकता है। समस्या यह है कि जब तक मरीज डॉक्टर के पास पहुंचता है, तब तक जोड़ में होने वाली डैमेज काफी बढ़ चुकी होती है। ऐसे में अर्थराइटिस के संकेतों को समय पर पहचानना बहुत ही जरूरी हो जाता है। आइए इस लेख जयपुर स्थित नारायणा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट एक्सपर्ट डॉ. अमित अग्रवाल से विस्तार से जानते हैं कि आखिर कब घुटनों का दर्द अर्थराइटिस की ओर इशारा करता है?
अर्थराइटिस सिर्फ घुटनों के घिसने की समस्या नहीं
डॉ. अग्रवाल कहते हैं कि अर्थराइटिस को अक्सर लोग सिर्फ घुटने घिसने की बीमारी मानते हैं, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। इसके कई प्रकार होते हैं और हर प्रकार की शुरुआत अलग-अलग लक्षणों के साथ हो सकती है। इसलिए केवल दर्द की मौजूदगी नहीं, बल्कि दर्द कब बढ़ता है, कितनी देर रहता है और उसके साथ कौन से लक्षण दिखाई देते हैं, यह समझना जरूरी है।
सुबह की अकड़न हो सकती है आर्थराइटिस का संकेत
अगर सुबह उठने के बाद घुटना 20-30 मिनट या उससे अधिक समय तक अकड़ा रहता है और चलने-फिरने के बाद धीरे-धीरे सामान्य होता है, तो इसे सिर्फ मांसपेशियों की जकड़न नहीं समझना चाहिए। यह सूजन वाले आर्थराइटिस का संकेत हो सकता है। वहीं, अगर सीढ़ियां उतरते समय, कुर्सी से उठते समय या लंबे समय तक चलने के बाद घुटने में दर्द बढ़ता है, तो यह शुरुआती ऑस्टियोआर्थराइटिस की ओर इशारा कर सकता है।
बार-बार घुटने में सूजन को न करें नजरअंदाज
कई लोग घुटने में होने वाली सूजन को सामान्य मान लेते हैं, लेकिन यदि बिना किसी चोट के घुटना बार-बार फूल रहा है या उसमें गर्माहट महसूस हो रही है, तो यह जोड़ के अंदर चल रही सूजन का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में केवल दर्दनिवारक दवाओं से दर्द दबाना सही तरीका नहीं है। इसके लिए डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी होता है, ताकि बीमारी के सही कारण का पता लगाया जा सके।
घुटना लॉक होना भी हो सकता है चेतावनी संकेत
अगर घुटना बार-बार लॉक हो जाता है, मुड़ने में परेशानी होती है या अचानक ऐसा महसूस होता है कि घुटना शरीर का भार नहीं संभाल पा रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण सिर्फ लिगामेंट या मेनिस्कस की समस्या में ही नहीं, बल्कि बढ़ते हुए आर्थराइटिस में भी दिखाई दे सकते हैं।
हाथ-पैर के छोटे जोड़ों में दर्द हो तो हो सकती है दूसरी समस्या
अगर दोनों घुटनों के साथ-साथ हाथों की उंगलियों, कलाई या पैरों के छोटे जोड़ों में भी दर्द और सूजन हो रही है, तो यह रूमेटॉइड आर्थराइटिस जैसी ऑटोइम्यून बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी होता है।
शुरुआती आर्थराइटिस में एक्स-रे हमेशा नहीं दिखाता बीमारी
आर्थराइटिस की जांच में सिर्फ एक्स-रे ही पर्याप्त नहीं होता। शुरुआती चरण में कई बार एक्स-रे सामान्य दिखाई दे सकता है, जबकि जोड़ के अंदर सूजन या अन्य बदलाव शुरू हो चुके होते हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर मरीज के लक्षणों, शारीरिक जांच और जरूरत पड़ने पर एमआरआई, अल्ट्रासाउंड या रक्त जांच की मदद से बीमारी का सही आकलन करते हैं।
समय पर इलाज से बच सकती है सर्जरी की जरूरत
अर्थराइटिस का इलाज सिर्फ दर्द कम करना नहीं है, बल्कि जोड़ को लंबे समय तक सुरक्षित रखना भी है। अगर शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो दवाओं, फिजियोथेरेपी, वजन नियंत्रण, मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम और आधुनिक उपचारों की मदद से बीमारी की गति को धीमा किया जा सकता है। कई मरीजों में सही समय पर इलाज शुरू करने से लंबे समय तक सर्जरी की जरूरत को टाला जा सकता है।
Disclaimer : यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए तैयार की कई है। अगर आपको घुटनों का दर्द बार-बार लौट रहा है, कई सप्ताह से बना हुआ है, सुबह ज्यादा अकड़न रहती है, बार-बार सूजन आती है या चलने-फिरने में परेशानी हो रही है, तो इसे सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर सही जांच और एक्सपर्ट की सलाह लें।