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Written By: Kishori Mishra | Updated : June 23, 2020 2:54 PM IST
ये 5 इशारे करते हैं ऑब्सेसिव कम्पलसिव डिसऑर्डर (OCD) की ओर इशारा, जानें क्या है ये डिसऑर्डर
Kleptomaniac : कुछ ऐसे लोग होते हैं, जिन्हें चीजों को चुराकर उसका इस्तेमाल करने में खुशी मिलती है। उन्हें ऐसा करके बहुत ही संतुष्टि का अनुभव होता है। चीजें छुपाकर या फिर चुराकर उसका इस्तेमाल करने की धीरे-धीरे उनको आदत हो जाती है। इस आदत या लत को क्लिप्टोमेनिया (Kleptomaniac) कहते हैं, यह एक मनोवैज्ञानिक बीमारी है।
क्लेप्टोमेनिया (Kleptomaniac) में व्यक्ति को चोरी करने में काफी खुशी मिलती है। क्लेप्टोमेनिया ( Kleptomaniac) से पीड़ित व्यक्ति छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी चीजों को चुरा सकते हैं। इस डिसऑर्डर से ग्रसित व्यक्ति आमतौर पर किसी का पर्स, पैसे नहीं चुराते और ना ही किसी के घर पर जाकर चोरी करते हैं। इन्हें मार्केट से या फिर किसी होटल से चीजें चुराने में खुशी मिलती है।
इस बीमारी के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल सका है। मनोवैज्ञानिकों का इस बारे में कहना है कि ब्रेन से निकलने वाले सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे न्यूरोट्रांस्मीटर्स व्यक्ति के व्यवहार और भावनाओं कंट्रोल करते हैं। ब्रेन में इन दोनों हार्मोन की कमी के कारण यह समस्या हो सकती है। किसी व्यक्ति में पहले से ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर, बॉर्डर लाइन पर्सनैलिटी, एंग्ज़ायटी और बाइपोलर डिसॉर्डर के लक्षण मौजूद हों तो उसमें क्लेप्टोमेनिया होने की संभावना बढ़ सकती है। यह मनोरोग किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है लेकिन टीनएजर्स में यह लक्षण अधिक दिखते हैं।
आम चोरों और क्लेप्टोमैनिक से ग्रसित लोगों में बहुत ही फर्क होता है। साधारण चोर अपनी जरूरत के हिसाब से ही सामान चुराते हैं। वहीं, क्लेप्टोमैनिक से पीड़ित व्यक्ति कई बार ऐसा सामान चुराता है, जिसकी उसे जरूरत नहीं होती है। वह बहुत बार सामान चुराकर उसे फेंक देता है।
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साइकॉलोजिस्ट का कहना है कि ऐसे लोगों को पकड़े जाने का डर भी बहुत ही अधिक होता है। चोरी करने के बाद उन्हें अपनी इस हरकत पर शर्मिंदगी भी महसूस होती है। लेकिन कुछ समय बाद उनके अंदर फिर से चोरी करने की इच्छा जागृत हो जाती है। होटल से चम्मच और तौलिया ऐसे लोग किसी लालच से नहीं, बल्कि अपनी लत के कारण चुराते हैं।
अगर आपके अंदर भी यह लत है, तो समय रहते आप इसका उपचार करा सकते हैं। क्लेप्टोमेनिया एक बहुत ही जटिल मनोरोग है, क्योंकि इसमें बॉर्डर लाइन पर्सनैलिटी, डिप्रेशन, ओसीडी जैसी कई अन्य मनोरोग के भी लक्षण मौजूद होते हैं। इसका इलाज के लिए मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और साइकोथेरेपी के साथ-साथ मरीजों को कुछ दवा भी देते हैं। इस समस्या को ठीक होने में कम से कम एक साल से अधिक का समय लगता है। 1 साल के बाद भी क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट के सभी निर्देशों का पालन करना चाहिए।
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