गुर्दे में पथरी (Kidney stones)

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गुर्दे में कैल्शियम, ऑक्सलेट और फास्फोरस से बनी ठोस संरचना को गुर्दे की पथरी या किडनी स्टोन कहा जाता है। ये सभी पदार्थ पेशाब के माध्यम से किडनी से मूत्राशय और उसके बाद शरीर से बाहर जाते हैं। लेकिन जब ये किडनी में जमा हो जाते हैं, तो ठोस संरचना के रूप में विकसित हो जाते हैं, जिन्हें पथरी कहा जाता है। गुर्दे की पथरी या तो गुर्दे में ही रहती है या फिर पेशाब के माध्यम से मूत्राशय तक पहुंच जाती है। किडनी स्टोन कई अलग-अलग प्रकार की होती है, जिसमें छोटी आमतौर पर मूत्राशय तक आ जाती है जबकि बड़ी गुर्दे में ही रहती है। हालांकि, कुछ छोटी पथरी तो पेशाब के माध्यम से मूत्राशय से होते हुए शरीर से बाहर भी निकल जाती हैं और उनका आकार छोटा होने के कारण व्यक्ति को किसी प्रकार का दर्द या तकलीफ भी महसूस नहीं होती है।

हालांकि, जैसे-जैसे पथरी का आकार बढ़ता है, तो वे पेशाब के दौरान निकलते समय किसी हिस्से में फंस जाती हैं। ऐसे में कई समस्याएं हो जाती हैं और साथ ही सामान्य रूप से पेशाब का बहाव भी नहीं बन जाता है। कई बार पेशाब का बहाव रुक जाने के कारण गंभीर दर्द होता है और पेशाब के साथ खून भी आने लगता है। इसके अलावा किडनी स्टोन से पीठ में दर्द, जी मिचलाना और उल्टी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। मूत्र पथ में बार-बार संक्रमण होना और परिवार में पहले किसी को किडनी स्टोन होना आदि कई कारक हैं, जो इस रोग के होने का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा कम पानी पीना और कुछ निश्चित प्रकार की दवाएं भी गुर्दे में पथरी होने का कारण बन सकती हैं।

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गुर्दे की पथरी के प्रकार

किडनी स्टोन के प्रमुख रूप से चार प्रकार हैं, जो निम्न हैं -

यूरिक एसिड स्टोन - गुर्दे की पथरी का हर प्रकार आमतौर पर अधिक प्रोटीन वाली डाइट लेने, कुअवशोषण, डायबिटीज, लंबे समय से डायरिया और मेटाबोलिक सिंड्रोम आदि के कारण होता है।

कैल्शियम स्टोन - यह गुर्दे की पथरी का सबसे आम प्रकार है, जो कैल्शियम ऑक्सलेट से गुर्दे में विकसित हो जाता है।

सिस्टीन स्टोन - किडनी स्टोन का यह प्रकार सिस्टीन्यूरिया (Cystinuria) नामक रोग से संबंधित है, जिसमें गुर्दे अधिक मात्रा में अमीनो एसिड निकालने लगते हैं।

स्ट्रूवाइट स्टोन - गुर्दे की पथरी का यह प्रकार आमतौर पर गुर्दे में संक्रमण के कारण होता है। स्ट्रूवाइट स्टोन आमतौर पर आकार में बड़े होते हैं और जल्दी बढ़ते हैं।

गुर्दे की पथरी के लक्षण

किडनी स्टोन से आमतौर पर तब तक कोई लक्षण पैदा नहीं होता है, जब तक ये गुर्दे में इधर-उधर हिलने न लग जाए। इसके अलावा अगर किडनी स्टोन पेशाब के माध्यम से मूत्रवाहिनी से मूत्राशय तक जाती है, तो भी इससे लक्षण विकसित होने लगते हैं। वहीं अगर स्टोन का आकार काफी छोटा है, तो इससे किसी प्रकार के लक्षण भी पैदा नहीं होते हैं। हालांकि, अगर गुर्दे की पथरी का आकार बड़ा है, तो इससे निम्न लक्षण देखने को मिल सकते हैं -


  • कमर के पिछले हिस्से में दर्द होना

  • पेशाब करते समय दर्द होना

  • पेशाब का रंग असामान्य होना

  • मतली और उल्टी होना

  • बार-बार पेशाब करने की तीव्र ईच्छा होना


डॉक्टर को कब दिखाएं


अगर आपको उपरोक्त में से किसी भी प्रकार का कोई लक्षण महसूस हो रहा है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। वहीं जिन लोगों के परिवार में पहले किसी को किडनी स्टोन हो चुका है, उन्हें भी समय-समय पर डॉक्टर से जांच करवाते रहना चाहिए।

गुर्दे की पथरी के कारण

गुर्दे में यूरिक एसिड, कैल्शियम या ऑक्सलेट अधिक मात्रा में जमा होना ही गुर्दे की पथरी का सबसे प्रमुख कारण माना जाता है। दरअसल, जब किडनी में इनका स्तर बढ़ जाता है, तो गुर्दे इन्हें पूरी तरह से पतला (Dilute) करने असफल हो जाते हैं और इस कारण से धीरे-धीरे पथरी बनने लगती है।

गुर्दे की पथरी के जोखिम


महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को किडनी स्टोन होने का खतरा अधिक होता है, क्योंकि उनमें महिलाओं से ज्यादा मांसपेशियां होती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि रोजाना मांसपेशियों का छोटे टुकड़ों में टूटना गुर्दे की पथरी के जोखिम को बढ़ता है। इसके अलावा किडनी स्टोन के कुछ अन्य जोखिम भी हो सकते हैं जैसे -

  • परिवार में पहले किसी को गुर्दे की पथरी होना

  • खुद व्यक्ति को ही पहले गुर्दे की पथरी पथरी हुई होना

  • 40 साल या उससे अधिक उम्र

  • मोटापा (कमर का आकार बढ़ना)

  • शरीर में पानी की कमी होना


इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति को निम्न स्वास्थ्य समस्याएं हैं तो उन्हें भी गुर्दे की पथरी का खतरा हो सकता है -

  • गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी

  • इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD)

  • लंबे समय से दस्त

  • पाचन प्रणाली संबंधी समस्याएं

  • थायराइड से संबंधित समस्याएं

  • सिस्टिन्यूरिया


इसके अलावा ऐसे आहार लेना जिनमें जानवरों से प्राप्त होने वाला प्रोटीन और सोडियम पाया जाता है और फाइबर कम होता है तो ऐसे में आपको गुर्दे की पथरी होने का खतरा बढ़ सकता है। हाई सोडियम डाइट भी किडनी स्टोन के खतरे को बढ़ा सकती है, क्योंकि अधिक मात्रा में सोडियम गुर्दों में कैल्शियम के प्रभाव को बढ़ा देता है जिससे गुर्दे में पथरी होने का खतरा बढ़ जाता है।

गुर्दे की पथरी का निदान

किडनी स्टोन के डायग्नोसिस के लिए आमतौर पर अल्ट्रासाउंड स्कैन का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें गुर्दे, मूत्रवाहिनियों और मूत्राशय का अल्ट्रासाउंड किया जाता है, जिसकी मदद से पथरी का पता लगाया जाता है। इसके साथ-साथ एक्स रे भी किया जा सकता है, जिससे स्थिति का निदान करने में मदद मिल सकती है। हालांकि अगर पथरी का आकार छोटा है, व्यक्ति मोटापे से ग्रसित है या फिर पेट में असाधारण रूप से गैस बनी हुई है, तो स्थिति का निदान करने के लिए सीटी स्कैन किया जा सकता है।

इसके अलावा मरीज का यूरिन टेस्ट भी किया जा सकता है, जिसकी मदद से स्टोन का कारण बनने वाले पदार्थों का पता लगाया जाता है। वहीं ब्लड टेस्ट की मदद से भी कैल्शियम और यूरिक एसिड के उच्च स्तर का पता लगाया जा सकता है।

गुर्दे की पथरी की रोकथाम

निम्न सामान्य तरीकों से किडनी स्टोन होने से बचाव किया जा सकता है -


  • खूब पानी व अन्य स्वास्थ्यकर तरल पदार्थ पिएं

  • अच्छा व संतुलित आहार लें

  • सीफूड (समुद्री जीवों) का सेवन कम से कम करें

  • कम मात्रा में नमक लें

  • शरीर का सामान्य वजन बनाए रखें

  • पेशाब को लंबे समय तक रोकने की कोशिश न करें

  • शराब व सिगरेट आदि न पीएं

गुर्दे की पथरी का इलाज

किडनी स्टोन का इलाज उसके आकार के अनुसार ही किया जाता है। अगर गुर्दे की पथरी का आकार छोटा है, तो मरीज को अधिक से अधिक मात्रा में पानी व अन्य तरल पेय पदार्थ पीने को दिए जाते हैं और साथ ही दर्द रोकने के लिए दवाएं दी जाती हैं। तरल पदार्थों की मदद से पेशाब के दौरान पथरी को बाहर निकालने में मदद मिलती है और इस दौरान हो रहे दर्द को नियंत्रित करने में दवाएं मदद करती हैं।

हालांकि, अगर पथरी का आकार बड़ा है, तो वह पेशाब की मदद से अपने आप बाहर नहीं निकल पाती है और इस कारण से कई बार वह गुर्दे, मूत्रवाहिनी या मूत्राशय में फंस जाती है। ऐसी स्थितियों का इलाज करने के लिए अलग-अलग उपचार तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है जिनमे प्रमुख रूप से साउंड वेव, परक्यूटीनियस नेफ्रोलिथोटॉमी (PNCL) और यूटेरोस्कोपिक रिमूवल शामिल हैं।

गुर्दे की पथरी की जटिलताएं

अगर गुर्दे की पथरी का समय रहते इलाज न किया जाए तो यह गुर्दे को क्षतिग्रस्त कर सकती है और कुछ मामलों में किडनी फेल भी हो सकती है। ऐसी स्थितियों में मरीज को लगातार डायलिसिस पर रहना पड़ सकता है। हालांकि, समय पर देखभाल करने और इलाज शुरू करने से पथरी के कारण गुर्दे में हुई क्षति को ठीक किया जा सकता है।

गुर्दे की पथरी के कारण कई बार कोई लक्षण नहीं होता है या बहुत ही कम लक्षण होते हैं, जिस कारण से अक्सर यह नजरअंदाज हो जाती है। जब तक व्यक्ति डॉक्टर से संपर्क करता है, जब तक गुर्दा बुरी तरह से प्रभावित हो चुका होता है और उसमें स्थायी क्षति भी हो जाती है।

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