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World Kidney Day 2026 : किडनी हमारे शरीर का एक ऐसा अंग है, जो शरीर की गंदगी को फिल्टर करने का कार्य करती है। इसकी मदद से ही शरीर में जमा टॉक्सिन, एक्स्ट्रा नमक, फ्लूइड को शरीर से बाहर किया जा सकता है। ऐसे मेें किडनी ब्लड प्रेशर, हड्डियों की हेल्थ और हीमोग्लोबिन लेवल को कंट्रोल करने में मददगार हो सकती है। लेकिन अगर किडनी खराब होने लगे या फिर किडनी मेें किसी तरह की परेशानी हो, तो ब्लड प्रेशर, हड्डियों से जुड़ी समस्याएं और हीमोग्लोबिन लेवल पर असर पड़ सकता है। ऐसे में किडनी के स्वास्थ्य केे बारे में समय-समय पर जानना बहुत ही जरूरी हो जाता है। डॉक्टर कहते हैं कि 40 के बाद किडनी का काम करने का तरीका हर साल लगभग 1% कम होने लगता है। ऐसे में 40 के बाद आपको अपनी किडनी की स्क्रीनिंग करानी बहुत ही जरूरी होती है।
40 के बाद हमारे शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, ऐसे में इस दौरान शरीर के लगभग हर एक अंग पर ध्यान देने की जरूरत होती है, जिसमें किडनी भी शामिल है। डॉक्टर गीत से जानते हैं 40 के बाद किडनी की स्क्रीनिंग क्यों जरूरी है?
द्वारका में मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की प्रिंसिपल कंसल्टेंट और यूनिट हेड, नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. गीत बाजपेयी का कहना है कि लाइफस्टाइल और हेल्थ फैक्टर उम्र से जुड़े इन बदलावों को और बढ़ाते हैं। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, जो 40 के बाद आम हो गए हैं, किडनी फिल्टर को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाते हैं। खासकर लोगों में बढ़ता मोटापा, बैठे रहने की आदतें, स्मोकिंग, एनवायरनमेंटल पॉल्यूशन, गर्मी का स्ट्रेस, प्रोसेस्ड फूड और ड्रिंक्स, पेन किलर, कुछ OTC दवाएं और खुद से इलाज ये सभी आदतेें किडनी फिल्टर को नुकसान पहुंचाते हैं और मामले को और खराब करते हैं।
डॉ. गीत का कहना है कि क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) तेजी से बढ़ रही है, लगभग 10 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी तरह के CKD से प्रभावित है। शुरुआती स्टेज का CKD ज़्यादातर साइलेंट होता है, किडनी डिज़ीज़ के लक्षण कुछ खास नहीं होते हैं। कुछ लक्षण (Kidney Faliure Symptoms) जैसे- थकान, भूख कम लगना, जी मिचलाना/उल्टी, लगातार हिचकी आना, सांस लेने में दिक्कत इत्यादि दिखाई देते हैं, लेकिन लोग इनपर ध्यान नहीं देते हैं।
एडवांस स्टेज पर किडनी खराब (Advance Stage Kidney Damage signs) होने के लक्षण पैरों में सूजन या चेहरे पर सूजन, पेट के निचले हिस्से में दर्द,सूखी/खुजली वाली स्किन, झाग या गहरे रंग का यूरिन, रात में बार-बार यूरिन आना इत्यादि हो सकते हैं।
किडनी की समस्याओं का जल्दी पता लगाने का एकमात्र तरीका रेगुलर स्क्रीनिंग है, लक्षण दिखने से सालों पहले। इन स्क्रीनिंग टेस्ट में यूरिन में एल्ब्यूमिन या प्रोटीन देखने के लिए एक सिंपल यूरिन एनालिसिस शामिल है, जो किडनी फिल्टर को नुकसान का एक बहुत ही शुरुआती मार्कर है, और सीरम क्रिएटिनिन टेस्ट जो किडनी फिल्ट्रेशन कैपेसिटी (GFR) के बारे में बताता है। ये टेस्ट सिंपल, सस्ते और आसानी से उपलब्ध हैं और कुछ ही घंटों में रिज़ल्ट देते हैं। साल में दो बार ब्लड प्रेशर और सालाना शुगर चेक करना भी ज़रूरी है।
जल्दी पता लगाना सिर्फ़ प्रोएक्टिव नहीं है, यह बदलाव लाने वाला भी है। लाइफस्टाइल में बदलाव (जैसे किडनी के लिए सही डाइट), दवाइयों में बदलाव, ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल से किडनी फेलियर का बढ़ना धीमा हो सकता है या रुक भी सकता है, जिससे आज़ादी और एनर्जी बनी रहती है।
डॉक्टर कहना हैं कि 40 साल का होना कोई डेडलाइन नहीं है, यह एम्पावरमेंट का संकेत है। आज का आसान स्क्रीनिंग टेस्ट आपकी किडनी और आपकी ज़िंदगी में कई हेल्दी साल जोड़ सकता है। सावधान रहें, और इन ज़रूरी अंगों को मज़बूत बनाए रखें।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।