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Written By: Jitendra Gupta | Published : June 24, 2022 5:12 PM IST
डायबिटीज रोगियों का बढ़ता ब्लड शुगर नहीं पहुंचाएगा किडनी को नुकसान, जानें किडनी को सेफ रखने के तरीके
नेफ्रोपैथी, किडनी के कामकाज में होने वाली खराबी को कहा जाता है। आपने बहुत बार ये शब्द सुना होगा, खासकर तब-जब किडनी रोग की शुरुआत होती है या फिर किडनी फेल्योर की स्थिति में। डायबिटीज रोगियों में नेफ्रोपैथी का खतरा बहुत ज्यादा होता है और सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर 3 में से 1 डायबिटीज रोगी में किडनी रोग के शुरुआती संकेत विकसित होते हैं। डायबिटीज की स्थिति हाई ब्लड प्रेशर और ह्रदय रोग के जोखिम को बढ़ाती है और इसका सही उपचार न किया जाए तो व्यक्ति गंभीर रूप से आर्गन फेल्योर का शिकार हो सकता है।
आंकड़ों के मुताबिक, करीब 40 फीसदी टाइप 2 डायबिटीज के मरीज और 30 फीसदी टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों को किडनी रोग होने का खतरा रहता है।
किडनी हमारे खून से विषाक्त पदार्थों को फिल्टर करती है और पेशाब के माध्यम से उसे बाहर निकालने का काम करती है। इतना ही नहीं ये हमारे शरीर में नमक और मिनरल्स की मात्रा को भी नियंत्रित करने में मदद करती है। इसके अलावा किडनी ऐसे हार्मोन का उत्पादन करती है, जो हमारे ब्लड प्रेशर को नियमित करने में मदद करते हैं और हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।
समय के साथ-साथ बढ़ा हुआ ब्लड ग्लूकोज लेवल किडनी में मौजूद रक्त वहिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है और किडनी कमजोर हो जाती है। किडनी को हुआ नुकसान जब एक निश्चित स्तर पर पहुंच जाता है तो उसे किडनी रोग के रूप में संदर्भित किया जाता है। अगर इस समस्या को जल्दी हल नहीं किया जाता है तो ये नुकसान एक स्तर तक पहुंच जाता है, जहां किडनी फेल होनेका खतरा रहता है। इतना ही नहीं इस स्तर पर किडनी विषाक्त को फिल्टर भी नहीं कर पाती है। जब ऐसा होता है तो व्यक्ति को किडनी बदलने की जरूरत होती है या फिर उसे डायलिसिस पर रहना होता है।
जब शुरुआत में ही इस बीमारी का पता लगा लिया जाए तो नेफ्रोपैथी को बढ़ने से रोका जा सकता है और इसके असर को धीमा किया जा सकता है। कुछ मामलों में इसे ठीक भी किया जा सकता है। हालांकि आप जो कदम उठा रहे हैं वो कितने प्रभावी साबित होंगे ये कुछ पहलुओं पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं कुछ ऐसे उपाय, जो आपकी किडनी की सेहत को सुधार सकते हैंः
1-ग्लूकोज लेवल को एक सीमित रेंज तक रखना
2-ब्लड प्रेशर का ध्यान रखना और उसे सीमित रेंज तक रखना
3-मेडिकल शॉप से ली जाने वाली दवाओं का ध्यान रखना और आपको ये पता होना चाहिए कि वो आपकी किडनी को कैसे प्रभावित करती हैं।
4-प्रोटीन, सोडियम और पोटेशियम का सीमित मात्रा में प्रयोग।
5-कोलेस्ट्रॉल लेवल का ध्यान रखना।
6-शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।
7-धूम्रपान न करें।
8-शराब का सीमित सेवन
9-तनाव को प्रबंधित करें