
Also Read
किडनी हमारे शरीर का ‘फिल्टर’ है। एक ऐसा फिल्टर जो अपशिष्ट पदार्थों को रोककर शरीर को सिर्फ अच्छे पोषक तत्व देता है। लेकिन हमारी बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल ने हमारे शरीर के इस शक्तिशाली ‘फिल्टर’ को खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। धूम्रपान, शराब, मोटापे आदि के कारण हमारी किडनी गंभीर रोगों का शिकार हो रही है और उन्हीं में से एक है किडनी कैंसर। किडनी कैंसर पुरुषों और महिलाओं दोनों में होने वाले 10 सबसे कॉमन कैंसर में से एक है। चलिए जानते हैं क्या है किडनी कैंसर और आप इससे कैसे बच सकते हैं।
किडनी न सिर्फ हमारे शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालती है, बल्कि यह ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में भी मददगार होती है। यह शरीर में रेड ब्लड सेल्स का संतुलन बनाए रखती है। जब हमारी किडनी की एक या दोनों कोशिकाएं अनियंत्रित होकर बाहर आने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं तो किडनी कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। किडनी कैंसर को ‘रीनल सेल कार्सिनोमा’ भी कहा जाता है। चिंता की बात यह है कि भारत में किडनी कैंसर से पीड़ित एक तिहाई लोगों की उम्र 50 साल से कम है। यानी यंग इंडिया को यह रोग तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। ऐसे में समय पर इसकी पहचान और उपचार करना जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार आमतौर पर किडनी कैंसर 50 से 70 वर्ष की उम्र के लोगों को अधिक प्रभावित करता है। हालांकि अब खराब आदतों के कारण यह आंकड़ा बदल रहा है। अध्ययन बताते हैं कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों को यह गंभीर कैंसर होने की आशंका 2 से 3 गुना अधिक होती है। इसी के साथ हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी और वॉन हिप्पेल लिंडौ डिजीज से पीड़ित लोग इस कैंसर से अधिक प्रभावित हो सकते हैं। जो लोग धूम्रपान करते हैं उन्हें किडनी कैंसर होने की आशंका दोगुनी होती है। 30 प्रतिशत पुरुषों और 25 प्रतिशत महिलाओं में धूम्रपान ही किडनी कैंसर का कारण बनता है। इसी के साथ मोटापे से पीड़ित लोगों को भी किडनी कैंसर होने की आशंका दोगुनी होती है। शराब का सेवन करने वाले भी इस गंभीर रोग की चपेट में ज्यादा आ सकते हैं।
किडनी कैंसर के लक्षणों को समय पर पहचानना बेहद जरूरी है। हालांकि अगर आपका ट्यूमर छोटा है तो इसके लक्षण साफ नजर नहीं आएंगे। अगर ट्यूमर बड़ा है तो कई समस्याएं हो सकती हैं। आपको यूरिन में खून आ सकता है। पीठ के निचले हिस्से में गांठ, पीठ के निचले हिस्से में दर्द, हर समय थकान महससू होना, बिना किसी कारण वजन कम होना या फिर हर समय बुखार रहना आदि किडनी कैंसर के लक्षण हैं।
अगर आपको किडनी कैंसर के लक्षण नजर आ रहे हैं तो आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। आमतौर पर इस कैंसर की जांच के लिए सबसे पहले यूरिनलिसिस करवाया जाता है। जिसके माध्यम से यूरिन में खून और कैंसर कोशिकाओं का परीक्षण किया जाता है। इसी के साथ ब्लड टेस्ट भी करवाया जा सकता है। इससे किडनी के फंक्शन और व्हाइड ब्लड सेल्स, रेड ब्लड सेल्स व प्लेटलेट्स की संख्या जांची जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार किडनी कैंसर से पीड़ित अधिकांश लोग एनीमिया के शिकार हो जाते हैं और उनके खून में रेड ब्लड सेल्स की भी कमी हो जाती है।
कई बार किडनी का करीब से परीक्षण करने के लिए डॉक्टर किडनी स्कैन भी करते हैं। इसके लिए अल्ट्रासाउंड, कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी यानी सीटी स्कैन, एमआरआई, पाॅजिट्राॅन एमिशन टोमोग्राफी आदि करवाए जा सकते हैं। अगर आपको किडनी कैंसर की पुष्टि हुई है तो डॉक्टर यह जानने का प्रयास करते हैं कि यह कितनी तेजी से आपको प्रभावित करेगा और फैलेगा। यह किडनी कैंसर ग्रेड 1, 2, 3 या 4 हो सकता है। ग्रेड 4 सबसे गंभीर स्थिति होती है। इसमें कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं से बहुत अलग दिखती हैं और काफी तेजी से बढ़ती हैं।