
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : January 18, 2025 5:24 PM IST
Sleeping too much effects on brain: हमारे शरीर को स्वस्थ रहने और सही तरीके से काम करने के लिए पर्याप्त नींद की आवश्यकता होती है। नींद से शरीर को शारीरिक और मानसिक रूप से पुनः ऊर्जावान होने का समय मिलता है, जिससे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में सुधार होता है। यह हमारी याददाश्त, सोचने की क्षमता और मूड को बेहतर बनाने में मदद करती है। पर्याप्त नींद से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, हार्मोनल बैलेंस बनाए रहता है और शरीर के अंगों की मरम्मत होती है, लेकिन अत्यधिक नींद भी हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। आमतौर पर, एक वयस्क को हर रात 7-9 घंटे की नींद की आवश्यकता होती है, लेकिन अगर नींद का समय इससे ज्यादा बढ़ जाए, तो यह हमारे मस्तिष्क और शरीर पर कई तरह से असर डाल सकता है।
अत्यधिक नींद से ब्रेन की कार्यप्रणाली में बदलाव आ सकता है। ज्यादा सोने से मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर्स जैसे डोपामिन का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे मानसिक थकान महसूस होती है। इससे ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है और कामों में फोकस बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
अत्यधिक नींद और मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध है। कई अध्ययन बताते हैं कि ज्यादा सोने से डिप्रेशन और एंग्जायटी की समस्याएं बढ़ सकती हैं। सोने का अत्यधिक समय मस्तिष्क के मूड-नियंत्रण वाले हिस्से को प्रभावित करता है, जिससे मानसिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
अत्यधिक नींद से 'ब्रेन फॉग' यानी मस्तिष्क में सुस्ती महसूस हो सकती है। यह स्थिति उस समय उत्पन्न होती है, जब मस्तिष्क ठीक से जागृत नहीं होता, जिससे याददाश्त कमजोर पड़ सकती है। लंबे समय तक ज्यादा सोने से यह स्थिति स्थायी हो सकती है, जिससे मानसिक क्षमता पर असर पड़ता है।
अत्यधिक नींद मस्तिष्क के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकती है। इससे मेटाबोलिक बदलाव हो सकते हैं, जैसे वजन बढ़ना और इंसुलिन संवेदनशीलता कम होना। इन शारीरिक समस्याओं का मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है, क्योंकि यह ब्रेन की कार्यप्रणाली को बाधित करता है। साथ ही यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक ज्यादा सोता है, तो इससे उम्र बढ़ने के साथ-साथ मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में गिरावट आ सकती है। विशेषकर अल्जाइमर जैसी बीमारियां इस कारण से उत्पन्न हो सकती हैं।
नींद की गुणवत्ता और मात्रा दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। ज्यादा सोना मस्तिष्क और शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, इसलिए सही समय पर पर्याप्त नींद लेना आवश्यक है। 7-9 घंटे की नींद आदर्श मानी जाती है, जो मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करती है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।