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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 25, 2022 2:24 PM IST
अस्पतालों में इस बैक्टीरिया की वजह से फैलता है इंफेक्शन! हो सकते हैं इन 3 परेशानियों का शिकार
जोधपुर के आईआईटी और एम्स के शोधकर्ता क्लेबसिएला निमोनिया (Klebsiella pneumoniae) नाम के एक खतरनाक बैक्टीरिया पर शोध कर रहे हैं, जो कि अस्पतालों से होने वाले इंफेक्शन का सबसे बड़ा कारण है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि ये बैक्टीरिया अपने आस-पास एक सुरक्षात्मक ढाल बना लेता है, जो कि इसके तेजी से फैलने और एंटी-बायोटिक रेजिस्टेंस होने के सबसे बड़ा कारण है।
ये स्टडी वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सहयोग से की गई है, जिसमें जिनोमिक और मॉलिक्यूलर बायोलॉजी का प्रयोग कर नई जीन की पहचान करने की कोशिश की गई। ये बैक्टीरिया की शक्ति का पता लगाने का तरीका है। ये रिसर्च जर्नल माइक्रोबायोलॉजी स्पेक्ट्रम में प्रकाशित हुई है।
क्लेबसिएला निमोनिया उन रोगुणाओं में से एक है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रमुखता की सूची में शामिल है और ये अस्पतालों से होने वाली बीमारियों का एक महत्वपूर्ण वजह है। इन बीमारियों में शामिल हैंः
1-निमोनिया
2-खून में इंफेक्शन
3-आईसीयू के मरीजों और नवजातों में इंफेक्शन
अधिकारियों का कहना है चूंकि ये बैक्टीरिया बहुत तेजी से फैलता है और एंटी-बायोटिक रेजिस्टेंस होता है इसलिए दुनियाभर में मेडिकल और साइंटिफिक समुदायों के लिए इस बैक्टीरिया का प्रबंधन और उपचार दोनों एक चुनौती बना हुआ है।
आईआईटी जोधपुर के बायोसाइंस और बायोइंजिनयरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर शंकर मनोहरन का कहना है कि क्लेबसिएला निमोनिया के शरीर के इम्यून सिस्टम और एंटीबायोटिक को चकमा देने का एक तरीका ये भी है कि ये बैक्टीरिया अपने आस-पास एक चिपचिपा और सुरक्षात्मक ढाल बना लेता है।
इस ढाल की पहचान एक स्ट्रिंग टेस्ट के माध्यम से की जा सकती है। इस टेस्ट में एक एप्लीकेटर का प्रयोग कर लैब में बैक्टीरिया के समूह को छुआ जाता है। अगर ये समूह 5 एमएम की परत और उससे मोटा होता है तो ये बैक्टीरिया बहुत ही घातक और तेजी से फैलने वाला होता है।
मनोहरन ने कहा कि हम फिलहाल इन म्यूटेंट और बाधित जीन का अध्ययन कर रहे हैं, जिससे क्लेबसिएला निमोनिया पी-34 की असामान्य चिपचिपेपन और ढाल के पीछे के तंत्र की पता लगाने में मदद मिल सकती है। अगर इसका पता लग जाता है तो हम इस स्ट्रेन और इंफेक्शन का उपचार कर इसे फैलने से रोक सकते हैं।