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Written By: Yogita Yadav | Published : May 2, 2019 7:45 PM IST
गर्मी के मौसम में पीलिया के रोगियों की संख्या अचानक बढ़ जाती है, इसकी वजह है संक्रमित भोजन और गंदा पानी, इसलिए जरूरी है कि आप पीलिया के बारे में पहले से ही सब कुछ जानकर सुरक्षात्मक उपाय कर लें। © Shutterstock.
गर्मी के मौसम में पीलिया के रोगियों की संख्या अचानक बढ़ जाती है, इसकी वजह है संक्रमित भोजन और गंदा पानी, इसलिए जरूरी है कि आप पीलिया के बारे में पहले से ही सब कुछ जानकर सुरक्षात्मक उपाय कर लें। पीलिया शरीर की एक ऐसी अवस्था है जब खून में बिलिरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है। इससे मरीज की त्वचा और आंख का सफेद हिस्सा पीला पड़ने लगता है। यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह एक बीमारी या परिस्थिति का लक्षण है, जिसमें तत्काल चिकित्सकीय मदद लेने की जरूरत पड़ती है।
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क्या है बिलिरुबिन
बिलिरुबिन एक पीले रंग का पदार्थ है, जो खून में मौजूद लाल रक्त कणिकाओं के 120 दिन के साइकिल के पूरे होने पर टूटने से बनता है। बिलिरुबिन में बिलि होता है, जो लिवर में बनने वाला पाचक तरल पदार्थ होता है और यह गॉल ब्लेडर में रहता है। यह भोजन के अवशोषण और मल के उत्सर्जन में मदद करता है। जब बिलिरुबिन किसी कारण से बिलि के साथ मिश्रण नहीं बना पाता या जब लाल रक्त कणिकाएं सामान्य से कम अवधि में टूटने लगती है तो खून में बिलिरुबिन का स्तर तेजी से बढ़ने लगता है। यह अन्य अंगों में पहुंचकर उनमें भी पीलापन पैदा कर सकता है।
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बन सकता है इन बीमारियों का कारण
पीलिया इस तरह कई बीमारियों की वजह बन जाता है। मलेरिया, सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया जैसे रोग बिलिरुबिन के निर्माण की गति को तेज कर देते हैं, जबकि हेपेटाइटिस, अल्कोहलिक लिवर की बीमारी, ग्रंथियों का बुखार, लिवर का कैंसर, और यहां तक कि अत्यधिक मात्रा में शराब पीने से बिलिरुबिन को प्रोसेस करने की लिवर की क्षमता प्रभावित होती है। इसके अलावा अन्य परिस्थितियां, जैसे कि – गॉल स्टोन्स और पैनक्रियाटिटिस, शरीर से बिलिरुबिन को बाहर निकालने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करती हैं।
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पहचानें इसके लक्षण
बिलिरुबिन का स्तर खून में बढ़ने से, त्वचा, नाखून और आंख का सफेद हिस्सा तेजी से पीला होने लगता है।
लिवर की किसी भी अन्य परेशानी की ही तरह, पीलिया में भी स्पष्ट तौर पर लिवर में तकलीफ होती है। एक तरह से असुविधाजनक खुजली होती है।
अक्सर फ्लू-जैसे लक्षण विकसित होते हैं और मरीज को ठंड लगने के साथ ही या उसके बिना भी बुखार चढ़ने लगता है।
मतली, खाने के प्रति विरक्ति, भूख कम लगना।
पेट में दर्द उठना, कभी-कभी मरोड़ उठना।
वजन घटना
गहरा/पीला पेशाब होना
लगातार थकान महसूस करना
इस मौसम में बरतें ये सावधानियां
1 गर्मी के मौसम में किसी भी तरह के संक्रमण की तरह ही पीलिया होने का जोखिम भी ज्यादा बढ़ जाता है। इसलिए जरूरी है कि इस मौसम में विशेष एहतियात बरतें।
2 खाना बनाने, परोसने, खाने के पहले, बाद में और शौच जाने के बाद हाथ साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए। भोजन अलमारी में या ढक्कन से ढंककर रखना चाहिए, ताकि मक्खियों व धूल से बचाया जा सके।
3 ताजा व शुद्ध गर्म भोजन करें। दूध व पानी उबालकर काम में लें।
4 पीने के लिए पानी नल, हैंडपंप या आदर्श कुओं से ही लें। नगरीय निकायों द्वारा शुद्ध किया पानी भी ठीक है।
5 गंदे, सड़े, गले व कटे हुए फल नहीं खाएं। धूल में पड़ी या खुले हुए बाजार के पदार्थ न खाएं। स्वच्छ शौचालय का प्रयोग करें।
6 रोगी बच्चों की नियमित डॉक्टर से जांच कराएं। जब तक वे पूरी तरह स्वस्थ न हो जाएं उन्हें स्कूल या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर न जाने दें।
7 इंजेक्शन लगाते समय सिरिन्ज व नीडिल को 20 मिनट तक उबाल लें या डिस्पोजेबल सिरिंज का उपयोग करें।