जरूरत से ज्यादा विटामिन D की दवाएं लेंगे तो शरीर में चुपके से हो जाएंगी ये बीमारियां, जानें कब और कितनी मात्रा में लें

Vitamin D Side Effects: हमारे शरीर के लिए विटामिन डी बहुत जरूरी होता है, लेकिन इसके सप्लीमेंट्स जरूरत से ज्यादा लेना कई बार गंभीर स्थिति को पैदा कर सकते हैं, जिनके बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : October 7, 2025 5:39 PM IST

Sharir me Vitamin ki Adhikata: आजकल विटामिन डी की कमी एक आम समस्या बन गई है, खासकर शहरी जीवन शैली में जहां धूप में निकलना कम हो गया है। पूरे दिन ऑफिस में बैठे रहना, घर में टीवी के सामने बैठे रहना, और जब धूप में निकलते है, तब खुद को इस तरीके से कर करके निकलते हैं की थोड़ी सी भी धूप लगे ना। हालांकि कोई ही व्यक्ति यह बात नहीं जानता होगा कि हड्डियों को मजबूत बनाए रखने से लेकर इम्यून सिस्टम को बेहतर करने तक, विटामिन डी का शरीर में संतुलित मात्रा में होना बेहद जरूरी है। ऐसे में कई लोग डॉक्टर की सलाह से विटामिन डी सप्लीमेंट्स लेना शुरू कर देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन सप्लीमेंट्स का सेवन कब तक करना चाहिए? आइए जानते हैं इससे जुड़ी 5 जरूरी बातें।

जरूरत के हिसाब से ही लें सप्लीमेंट्स

विटामिन डी की पूर्ति का सबसे अच्छा स्रोत प्राकृतिक धूप है। लेकिन जब धूप में पर्याप्त समय न मिल पाए या ब्लड रिपोर्ट में कमी पाई जाए, तभी डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लेना चाहिए। बिना जांच के लंबे समय तक इनका सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है और आपको कई बड़ी परेशानियों में डाल सकता है।

ब्लड टेस्ट से तय होता है सेवन का समय

विटामिन डी सप्लीमेंट कितने समय तक लेना है, इसका सही निर्णय सिर्फ ब्लड टेस्ट के आधार पर किया जा सकता है। आमतौर पर जब लेवल 20 एनजी/एमएल से कम हो, तो 6 से 8 सप्ताह तक हाई डोज सप्लीमेंट दिया जाता है, फिर सामान्य डोज पर लाया जाता है और कब सप्लीमेंट लेना बंद करना है यह भी डॉक्टर ही तय करते हैं। इसलिए डॉक्टर से जांच करवाते रहें और अपनी तरफ से कोई भी कम ना उठाएं।

लंबे समय तक सेवन कर रहे हैं? सावधान रहें!

कई लोगों को लगता है कि यह नुकसान नहीं पहुंचता इसलिए वह इसका सेवन करते रहते हैं। अगर आप महीनों से या सालों से बिना रुकावट सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो यह शरीर में विटामिन डी की अधिकता (Toxicity) पैदा कर सकता है। इसके लक्षणों में उल्टी, कमजोरी, पेशाब में बदलाव और किडनी पर असर शामिल हैं, जो कि आपको कई परेशानियों में डालता है और आपके जीवन शैली को प्रभावित करता है।

डाइट और लाइफस्टाइल सुधारें

अगर डॉक्टर ने आपको सप्लीमेंट लेने की सलाह दी है तो आपको अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में सुधार करना होता है। सप्लीमेंट्स के साथ-साथ ऐसी डाइट ले, जिसमें प्राकृतिक रूप से विटामिन दी हो जैसे – अंडे की जर्दी, मशरूम, फोर्टिफाइड दूध और मछली। सुबह की धूप में 15–20 मिनट बिताना भी बेहद फायदेमंद है। इसलिए आप अपनी डाइट में सुधार करें तभी विटामिन डी की शरीर में सही पूर्ति कर सकते हैं।

अधिकता से सामने आएंगे यह परेशानियां

विटामिन डी सप्लीमेंट का अधिक समय तक बिना डॉक्टर की निगरानी में सेवन करने से शरीर में इसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा हो सकती है, जिसे विटामिन डी टॉक्सिसिटी कहते हैं। इससे हाइपरकैल्सीमिया (खून में कैल्शियम की अधिकता) हो सकता है, जिसके लक्षणों में उल्टी, कब्ज, कमजोरी, ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना और किडनी डैमेज तक शामिल हैं। लंबे समय तक अत्यधिक सेवन से हड्डियों में दर्द, दिल की धड़कन अनियमित होना और भ्रम या थकान जैसी मानसिक समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए इसकी खुराक हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लें।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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