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आंखों के रिलैक्स करने के लिए नींद आना बहुत जरूरी है। नींद पूरी न होने पर जब आंखें ठीक से आराम नहीं कर पातीं, तो उनमें मौजूद फ्लूड यानी द्रव्य सूखने लगता है। इसके बाद भी आंख फड़कने की समस्या हो सकती है। © Shutterstock.
हिचकी, छींक के साथ ही हमारी आंखों की हरकतों को लेकर भी कई तरह के भ्रम और अवधारणाएं लोगों के बीच प्रचलित हैं। कुछ लोगों को लगता है कि आंख फड़कना किसी अशुभ का संकेत हैं तो कुछ लोग दाई और बाई आंख फड़कने के हिसाब से शुभ और अशुभ की गणना करते हैं। जबकि यह सिर्फ भ्रम है, असल में आंख फड़कना आंख की सेहत से जुडे संकेत होते हैं। आइए जानें कैसे-
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क्या कहता है आंख का फड़कना
बदल सकता है चश्मे का नंबर - आंखों में मांस पेशियों से संबंधित समस्या होने पर भी आंख फड़क सकती है। अगर लंबे समय से आपकी आंख फड़क रही है, तो एक बार आंखों की जांच जरूर करवा लें। हो सकता है आपको चश्मा लगाने की जरूरत हो या आपके चश्मे का नंबर बदलने वाला हो।
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नींद पूरी न होने पर - तनाव के कारण भी आपकी आंख फड़क सकती है। खास तौर से जब तनाव के कारण आप चैन से सो नहीं पाते और आपकी नींद पूरी नहीं होती, तब आंख फड़कने की समस्या हो सकती है।
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थकान - अत्यधिक थकान होने पर आंखों में भी समस्याएं होती हैं। इसके अलावा आंखों में थकान या कम्यूटर, लैपटॉप पर ज्यादा देर काम करते रहने से भी यह समस्या हो सकती है। इसके लिए आंखों को आराम देना जरूरी है।
एलर्जी होने पर - आंखों में सूखापन होने पर भी आंख फड़कने की समस्या होती है। इसके अलावा आंखों में एलर्जी, पानी आना, खुजली आदि समस्या होने पर भी ऐसा हो सकता है।
शराब का सेवन - शरीर में मैग्नीशियम की कमी होने पर आंख फड़कने की समस्या पैदा सकती है। इसके अलवा अत्यधिक कैफीन का शराब का सेवन र्भी इस समस्या को जन्म देता है।