
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : May 1, 2026 10:47 AM IST
Medically Verified By: Dr. Malini Saba
Image credits by: बच्चों की मेंटल हेल्थ
Bache Ki Mental Health: बड़ों को लगता है कि क्योंकि वह घर व ऑफिस की सारी जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं, इसलिए वह अधिक टेंशन में रहते हैं। बच्चों का क्या है? वह तो स्कूल-कॉलेज जाते हैं और फिर खेलकर अपनी थकान मिटा देते हैं। लेकिन यह सोच गलत है। भले ही बच्चे छोटे होते हैं, लेकिन उनके जीवन में उनकी उम्र के दौरान आने वाली चुनौतियां भी बहुत ही अधिक होती हैं। आज के समय में बच्चों की मानसिक सेहत उतनी ही जरूरी है जितनी उनकी शारीरिक सेहत। लेकिन समस्या यह है कि अधिकतर मामलों में बच्चों की मानसिक परेशानियां पहचानी ही नहीं जातीं।
UNICEF और World Health Organization की रिपोर्ट्स बताती हैं कि दुनिया भर में हर 7 में से 1 बच्चा या किशोर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन अधिकतर मामलों में इलाज नहीं मिल पाता। इसलिए हमने कुछ रिसर्च और साइकोलॉजिस्ट के इनपुट्स की मदद से आप तक सही व सटीक जानकारी पहुंचाने की कोशिश की है। आइए विस्तार से जानें कि हमारे बच्चे की मेंटल हेल्थ ठीक है या नहीं।
यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार भारत में बच्चों और किशोरों की संख्या लगभग 43.6 करोड़ है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी बहुत सीमित हैं। वहीं यूनिसेफ की दूसरी रिपोर्ट कहती है कि 50% मानसिक बीमारियां 14 साल की उम्र से पहले शुरू हो जाती हैं, लेकिन पहचान नहीं हो पाती। WHO की रिपोर्ट के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं जैसे एंग्जायटी, डिप्रेशन और बिहेवियरल डिसऑर्डर बच्चों में तेजी से बढ़ रही हैं।
साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा हमें बता रही हैं, इसका मतलब साफ है। अगर समय पर संकेत पहचान लिए जाएँ, तो बच्चे को बड़ी मानसिक समस्या से बचाया जा सकता है।
साइकोलॉजिस्ट के अनुसार बच्चों में मानसिक परेशानी अक्सर उनके व्यवहार और आदतों में बदलाव के रूप में दिखती है।
| बदलाव | लक्षण |
| 1. व्यवहार में अचानक बदलाव |
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| 2. अकेलापन और सोशल दूरी |
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| 3. पढ़ाई में गिरावट |
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| 4. नींद और खाने में बदलाव |
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| 5. बार-बार शारीरिक शिकायतें |
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| 6. डर, चिंता और घबराहट |
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| उम्र | लक्षण |
| छोटे बच्चों में विशेष संकेत (0–5 वर्ष) |
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| किशोरों में संकेत (10–19 वर्ष) |
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वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार बच्चों की मानसिक सेहत पर कई फैक्टर्स असर डालते हैं जैसे-
डॉ. मालिनी सबा माता-पिता को सलाह देती हैं कि बच्चे की बात ध्यान से सुनें, उसे जज न करें, भावनाओं को व्यक्त करने दें, नियमित दिनचर्या और नींद सुनिश्चित करे और जरूरत पड़े तो विशेषज्ञ से संपर्क करें। साथ ही याद रखें कि मेंटल हेल्थ की समस्या सिर्फ ‘नखरा’ नहीं, बल्कि एक वास्तविक स्थिति होती है।
डिस्क्लेमर- बच्चों की मानसिक सेहत अक्सर चुपचाप खराब होती है, और जब तक हम समझते हैं, तब तक समस्या गहरी हो चुकी होती है। इसलिए सबसे जरूरी है कि संकेतों को पहचानना, समय पर समझना और सही मदद लेना। साथ ही जरूरत पड़ने पर एक्सपर्ट की सलाह लेना है।
बअगर बच्चा लगातार उदास, बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा, सामाजिक गतिविधियों से दूर या स्कूल में खराब प्रदर्शन कर रहा है, तो यह खराब मानसिक स्वास्थ्य के संकेत हो सकते हैं।
बच्चों की मानसिक सेहत ठीक करने के लिए उनके साथ खुलकर बात करें, उनकी भावनाओं को समझें, उन्हें प्यार और सुरक्षित माहौल दें। साथ ही, संतुलित दिनचर्या, पौष्टिक आहार, पर्याप्त नींद और स्क्रीन टाइम सीमित करना बहुत ज़रूरी है।
जी हां, बच्चों को भी डिप्रेशन और स्ट्रेस जैसी मानसिक समस्याएं हो सकती हैं। कई स्टडीज और रिसर्च में बच्चों में मेंटल हेल्थ से जुड़ी कई गम्भीर समस्याएं देखी गयी हैं।
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