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क्या थायराड की समस्या आपके बच्चे की पढ़ाई को प्रभावित कर रही है? डॉक्टर से समझें

Thyroid disorders in children : बच्चों को थायराइड होने पर उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। अक्सर माता-पिता इस बात से अनजान होते हैं। आइए जाानते हैं इस विषय के बारे में विस्तार से-

क्या थायराड की समस्या आपके बच्चे की पढ़ाई को प्रभावित कर रही है? डॉक्टर से समझें
thyroid and Study
VerifiedMedically Reviewed By: Dr. Abhishek Kulkarni

Written by Kishori Mishra |Published : February 14, 2026 11:51 AM IST

Does thyroid affect studies : जब किसी बच्चे की स्कूल परफॉर्मेंस अचानक गिरने लगती है, तो माता-पिता अक्सर इसका कारण मोबाइल, टीवी, पढ़ाई में मन न लगना, दोस्तों का असर या आलस मान लेते हैं। लेकिन कई मामलों में पढ़ाई खराब होने की असली वजह बच्चे के शरीर के हार्मोन भी हो सकते हैं। आमतौर पर थायरॉइड की बीमारी को बड़ों से जोड़ा जाता है, लेकिन डॉक्टर अब बच्चों और किशोरों में भी इस समस्या के मामले ज्यादा देख रहे हैं। इस विषय की जानकारी के लिए हमने मुंबई स्थित नारायणा हेल्थ SRCC चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, कंसल्टेंट डॉ. अभिषेक कुलकर्णी से बातचीत की है। आइए जानते हैं थायराइड और बच्चे की पढ़ाई के बीच क्या है संबंध?

थायराइड ग्लैंड का अहम रोल

मालूम हो कि हमारे शरीर में थायरंइड एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि होती है, जो गर्दन के नीचे होती है। यह ग्लैंड ऐसे हार्मोन बनाती है, जो शरीर के लगभग हर काम को कंट्रोल करने में मददगार होते हैं। यह मेटाबॉलिज्म,  दिमाग के विकास और शरीर की ऊर्जा को संतुलित रखती है।

अगर थायराइड कम काम करे, तो इस स्थिति को हाइपोथायरॉइडिज़्म कह जाता है। वहीं, अगर थायराइड ज्यादा काम करे, तो यह हाइपरथायरॉइडिज़्म कहलाता है। ऐसे में अगर किसी बच्चे को थायराइड की परेशानी है, तो यह उनकी शारीरिक, मानसिक और पढ़ाई से जुड़ी कई परेशानियों का कारण हो सकती है।

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थायराइड की समस्या पढ़ाई को कैसे प्रभावित करती है?

डॉक्टर कुलकर्णी का कहना है कि थायराइड असंतुलन वाले बच्चे क्लास में ध्यान नहीं लगा पाते, धीरे जवाब देते हैं या पढ़ाया गया समझने में दिक्कत होती है। कई बार इसे सिर्फ व्यवहार की समस्या या सीखने की कमजोरी समझ ली जााती है। लेकिन इसका कारण थायराइड हो सकता है।

हाइपोथायरॉइडिज़्म में पढ़ाई पर क्या असर होता है?

इस स्थिति में दिमाग धीरे काम करता है। इसके कारण -

  • चीजें समझने में ज्यादा समय लगता है
  • ध्यान और एकाग्रता कम हो जाती है
  • पढ़ा हुआ याद रखने में दिक्कत
  • नंबर लगातार गिरने लगते हैं
  • थकान या बार-बार बीमार पड़ने से स्कूल जाना कम हो जाता है

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हाइपरथायरॉइडिज़्म का असर बच्चों की पढ़ाई पर क्या पड़ता है?

इसमें शरीर और दिमाग जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं। बच्चों में -

  • बच्चों को बेचैनी और जरूरत से ज्यादा चंचलता
  • घबराहट और तनाव काफी रहना।
  • ध्यान न लगना और एक जगह बैठ न पाना।
  • व्यवहार में होने वाले बदलाव, जिन्हें अक्सर गलत समझ लिया जाता है
  • बच्चे के व्यवहार और बॉडी लैंग्वेज में बदलाव सबसे पहले नजर आते हैं। शुरुआत में ये बदलाव हल्के हो सकते हैं, लेकिन समय के साथ बच्चे के स्कूल और दोस्तों के रिश्तों पर असर डालते हैं।
  • थायरॉइड असंतुलन वाले बच्चों में होमवर्क करने या पढ़ने में मन नहीं लगता। वे दोस्तों से दूरी बनाने लगते हैं।

माता-पिता कुछ लक्षणों पर ध्यान दे सकते हैं-

हाइपोथायरॉइडिज़्म में: सुस्ती, उदासी, भूलने की आदत, किसी चीज में दिलचस्पी न होना, ज्यादा नींद आना

हाइपरथायरॉइडिज़्म में: मूड बार-बार बदलना, चिड़चिड़ापन, घबराहट, बेचैनी, नींद की समस्या

शारीरिक बदलाव, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

थायरॉइड की समस्या में शारीरिक बदलाव साफ दिख सकते हैं। एक ही लक्षण नहीं, बल्कि कई लक्षण एक साथ दिखें तो सतर्क होना जरूरी है।

हाइपोथायरॉइडिज़्म में में दिखते हैं ये शारीरिक बदलाव

  • बिना वजह वजन बढ़ना
  • लंबाई का सही से न बढ़ना
  • हमेशा थकान रहना
  • चेहरे पर सूजन, खासकर आंखों के आसपास
  • रूखी त्वचा, बाल झड़ना
  • प्यूबर्टी आने में देरी

हाइपरथायरॉइडिज़्म में  दिखाई देते हैं ये बदलाव

  1. ज्यादा खाने के बावजूद वजन कम होना
  2. तेजी से बढ़त या जल्दी यौवन
  3. ज्यादा पसीना आना
  4. हाथों में कंपन
  5. गर्दन में सूजन (घेंघा), जो दोनों स्थितियों में हो सकता है

हाइपोथायरॉइडिज़्म में बढ़ता वजन बच्चों के आत्मविश्वास को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे वे खुद को दूसरों से अलग करने लगते हैं।

माता-पिता को डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

अगर बच्चे की पढ़ाई लगातार गिर रही हो और कोई साफ वजह न दिखे, या पूरी नींद के बाद भी बच्चा हमेशा थका रहे, तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए। व्यवहार में अचानक बदलाव, शारीरिक लक्षण, बढ़त में देरी या अचानक वजन में बदलाव होने पर पीडियाट्रिशन या बच्चों के हार्मोन विशेषज्ञ से सलाह जरूरी है। एक साधारण ब्लड टेस्ट से थायरॉइड की समस्या का पता लगाया जा सकता है। समय पर इलाज से स्थिति में काफी सुधार हो सकता है।

अच्छी खबर: इलाज से फर्क पड़ता है

बच्चों में थायरॉइड की अधिकतर समस्याएं सही इलाज से कंट्रोल हो जाती हैं। दवा से हार्मोन संतुलित होने पर—

  • बच्चे में फिर से ऊर्जा आने लगती है
  • ध्यान और पढ़ाई में सुधार होता है
  • व्यवहार और मूड स्थिर होते हैं
  • लंबाई और वजन सामान्य होने लगता है

हर बच्चा जिसे स्कूल में दिक्कत हो रही हो, उसे ज्यादा डांट या ट्यूशन की जरूरत नहीं होती। कई बार यह शरीर का मदद मांगने का तरीका होता है। थायरॉइड की समस्या को समय पर पहचान लेने से बच्चे के भविष्य, आत्मविश्वास और सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है। बच्चे की सेहत का ध्यान रखना ही उसकी सफलता की पहली सीढ़ी है।

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Highlights

  • थायराइड बच्चों की पढ़ाई पर असर डालता है।
  • थायराइड की वजह से एकाग्रता में कमी आती है।
  • मूड को भी थायराइड प्रभावित करता है।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।