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Does thyroid affect studies : जब किसी बच्चे की स्कूल परफॉर्मेंस अचानक गिरने लगती है, तो माता-पिता अक्सर इसका कारण मोबाइल, टीवी, पढ़ाई में मन न लगना, दोस्तों का असर या आलस मान लेते हैं। लेकिन कई मामलों में पढ़ाई खराब होने की असली वजह बच्चे के शरीर के हार्मोन भी हो सकते हैं। आमतौर पर थायरॉइड की बीमारी को बड़ों से जोड़ा जाता है, लेकिन डॉक्टर अब बच्चों और किशोरों में भी इस समस्या के मामले ज्यादा देख रहे हैं। इस विषय की जानकारी के लिए हमने मुंबई स्थित नारायणा हेल्थ SRCC चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, कंसल्टेंट डॉ. अभिषेक कुलकर्णी से बातचीत की है। आइए जानते हैं थायराइड और बच्चे की पढ़ाई के बीच क्या है संबंध?
मालूम हो कि हमारे शरीर में थायरंइड एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि होती है, जो गर्दन के नीचे होती है। यह ग्लैंड ऐसे हार्मोन बनाती है, जो शरीर के लगभग हर काम को कंट्रोल करने में मददगार होते हैं। यह मेटाबॉलिज्म, दिमाग के विकास और शरीर की ऊर्जा को संतुलित रखती है।
अगर थायराइड कम काम करे, तो इस स्थिति को हाइपोथायरॉइडिज़्म कह जाता है। वहीं, अगर थायराइड ज्यादा काम करे, तो यह हाइपरथायरॉइडिज़्म कहलाता है। ऐसे में अगर किसी बच्चे को थायराइड की परेशानी है, तो यह उनकी शारीरिक, मानसिक और पढ़ाई से जुड़ी कई परेशानियों का कारण हो सकती है।
डॉक्टर कुलकर्णी का कहना है कि थायराइड असंतुलन वाले बच्चे क्लास में ध्यान नहीं लगा पाते, धीरे जवाब देते हैं या पढ़ाया गया समझने में दिक्कत होती है। कई बार इसे सिर्फ व्यवहार की समस्या या सीखने की कमजोरी समझ ली जााती है। लेकिन इसका कारण थायराइड हो सकता है।
इस स्थिति में दिमाग धीरे काम करता है। इसके कारण -
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thyroid signs[/caption]
इसमें शरीर और दिमाग जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं। बच्चों में -
हाइपोथायरॉइडिज़्म में: सुस्ती, उदासी, भूलने की आदत, किसी चीज में दिलचस्पी न होना, ज्यादा नींद आना
हाइपरथायरॉइडिज़्म में: मूड बार-बार बदलना, चिड़चिड़ापन, घबराहट, बेचैनी, नींद की समस्या
थायरॉइड की समस्या में शारीरिक बदलाव साफ दिख सकते हैं। एक ही लक्षण नहीं, बल्कि कई लक्षण एक साथ दिखें तो सतर्क होना जरूरी है।
हाइपोथायरॉइडिज़्म में बढ़ता वजन बच्चों के आत्मविश्वास को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे वे खुद को दूसरों से अलग करने लगते हैं।
अगर बच्चे की पढ़ाई लगातार गिर रही हो और कोई साफ वजह न दिखे, या पूरी नींद के बाद भी बच्चा हमेशा थका रहे, तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए। व्यवहार में अचानक बदलाव, शारीरिक लक्षण, बढ़त में देरी या अचानक वजन में बदलाव होने पर पीडियाट्रिशन या बच्चों के हार्मोन विशेषज्ञ से सलाह जरूरी है। एक साधारण ब्लड टेस्ट से थायरॉइड की समस्या का पता लगाया जा सकता है। समय पर इलाज से स्थिति में काफी सुधार हो सकता है।
बच्चों में थायरॉइड की अधिकतर समस्याएं सही इलाज से कंट्रोल हो जाती हैं। दवा से हार्मोन संतुलित होने पर—
हर बच्चा जिसे स्कूल में दिक्कत हो रही हो, उसे ज्यादा डांट या ट्यूशन की जरूरत नहीं होती। कई बार यह शरीर का मदद मांगने का तरीका होता है। थायरॉइड की समस्या को समय पर पहचान लेने से बच्चे के भविष्य, आत्मविश्वास और सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है। बच्चे की सेहत का ध्यान रखना ही उसकी सफलता की पहली सीढ़ी है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।