
डॉक्टर आशीष चौधरी
डॉक्टर आशीष चौधरी एक अनुभवी ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं, जो हाल में आकाश हेल्थ केयर में अपनी सेवाएं प्रदान कर ... Read More
Gathiya Kab Hota Hai: उंगलियां चटकाने की आदत बहुत से लोगों में बचपन से ही देखी जाती है। कुछ लोग इसे तनाव कम करने का तरीका मानते हैं, तो कुछ के लिए यह एक अनजानी आदत बन जाती है। अक्सर घर में या आसपास यह चेतावनी सुनने को मिलती है- 'उंगलियां मत चटकाओ, आगे चलकर गठिया हो जाएगा।' लेकिन क्या वाकई उंगलियां चटकाने से गठिया जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है? इस लेख में हम इसी सवाल को वैज्ञानिक और चिकित्सकीय नजरिए से समझेंगे।
जब हम उंगलियां चटकाते हैं, तो जो आवाज आती है, वह हड्डियों के आपस में टकराने से नहीं होती। दरअसल, हमारी उंगलियों के जोड़ों यानी ज्वाइंट्स के बीच एक तरल पदार्थ होता है, जिसे Synovial Fluid कहा जाता है। इस तरल में गैस के छोटे-छोटे बुलबुले मौजूद रहते हैं।
जब हम उंगली को अचानक खींचते या मोड़ते हैं, तो जोड़ के अंदर दबाव तेजी से बदलता है और इन गैस बुलबुलों के फूटने या बनने की प्रक्रिया से ‘चटक’ जैसी आवाज आती है। यह एक सामान्य फिजिकल प्रक्रिया है, न कि हड्डियों को नुकसान पहुंचाने वाली क्रिया।
इस सवाल का सीधा जवाब है-नहीं, उंगलियां चटकाने से गठिया होने का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। अब तक किए गए कई मेडिकल रिसर्च और स्टडीज में यह साबित नहीं हो पाया है कि उंगलियां चटकाने और गठिया (विशेष रूप से Osteoarthritis) के बीच सीधा संबंध है। एक प्रसिद्ध अध्ययन में वर्षों तक नियमित रूप से उंगलियां चटकाने वाले लोगों की तुलना उन लोगों से की गई, जो ऐसा नहीं करते थे- दोनों में गठिया की दर लगभग समान पाई गई।
इस भ्रम के पीछे कुछ कारण हो सकते हैं:
हालांकि गठिया का सीधा खतरानहीं होता, लेकिन बहुत ज्यादा और जोर से उंगलियां चटकाने की आदतकुछ समस्याएं पैदा कर सकती है:

ऐसी समस्याएं हैं, तो उन्हें बार-बार उंगलियां चटकाने से बचना चाहिए और किसी ऑर्थोपेडिक डॉक्टर या रूमेटोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।
उंगलियां चटकाने से ज्यादा जरूरी है कि हम अपने जोड़ों की सही देखभाल करें:
उंगलियां चटकाने को लेकर डरने की जरूरत नहीं है। यह आदत अपने आप में गठिया का कारण नहीं बनती, लेकिन इसे बार-बार और जोर से करना भी समझदारी नहीं है। अगर यह केवल कभी-कभार किया जाए और इससे दर्द न हो, तो इसे गंभीर समस्या मानने की आवश्यकता नहीं है। फिर भी, अगर जोड़ों से जुड़ी कोई भी परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है, तो खुद से उपचार करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना ही सबसे बेहतर विकल्प है।