
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : April 14, 2021 3:30 PM IST
प्रथम विश्व युद्ध के बाद सन् 1918 में सबसे पहले इस थेरेपी (Plasma Therapy ) का इस्तेमाल किया गया था।
Plasma Therapy Treatment: कोरोना वायरस का कहर अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस वायरस से दुनियाभर में अबतक 88 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी हैं। वहीं, 15 लाख से अधिक लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। भारत में भी कोरोना वायरस का प्रकोप काफी तेजी से फैल रहा है। भारत में अबतक इस वायरस से 166 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 5 हजार से अधिक लोग कोविड 19 से संक्रमित हो चुके हैं। देश में वायरस को फैलने से रोकने के लिए 14 अप्रैल तक लॉकडाउन का ऐलान किया गया है। इसके साथ ही सरकार द्वारा वायरस को फैलने से रोकने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
इस भयावह वायरस से निपटने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक दवाईयों की खोज में जुटे हुए हैं। इसके साथ ही चिकित्सकों द्वारा कई पद्धतियों को अपनाया जा रहा है। इसी कड़ी में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने केरल के चिकित्सकों को प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy ) के जरिए कोरोना के मरीजों का इलाज करने की अनुमति दे दी है। चलिए जानते हैं आखिर क्या है प्लाज्मा थेरेपी और कैसे करती है यह काम?
प्रथम विश्व युद्ध के बाद सन् 1918 में सबसे पहले इस थेरेपी (Plasma Therapy ) का इस्तेमाल किया गया था। 1918 में स्पेनिश फ्लू तमाम लोगों की जान ले चुका था, इस दौरान इस थेरेपी का विकास किया गया। इसके बाद कई संक्रमित बीमारियों को दूर करने के लिए प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। इस थेरेपी (Plasma Therapy ) में जो व्यक्ति उस संक्रमण से लड़ने में कामयाब हो जाता है। उस व्यक्ति का ब्लड संक्रमित व्यक्ति के अंदर डाला जाता है। इस थेरेपी से मरीज को ठीक होने में करीब 3 से 7 दिन का समय लगता है।
कोरोना वायरस (Coronavirus) जैसे संक्रमण को जब कोई व्यक्ति हराने में कामयाब हो जाता है या फिर ऐसा व्यक्ति जो वायरस से संक्रमित होने के बाद स्वस्थ हो जाता है, तो ऐसे में वह व्यक्ति एंटीबाडीज बन जाता है। ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति की इम्युनिटी कुछ या फिर कभी-कभी अधिक समय के लिए मजबूत हो जाती है। ऐसे व्यक्ति की बॉर्डी में इम्युनिटी सेल्स से प्रोटीन उत्सर्जित होता है, जो उसके शरीर के प्लाज्मा में पाया जाता है। प्लाज्मा ब्लड का थक्का बनाने में मदद करता हैं। इसे लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy ) से एक साथ कई मरीजों का इलाज आसानी से किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस थेरेपी से ऐसे मरीजों का इलाज तत्काल किया जाएगा, जिन्हें सबसे ज्यादा खतरा रहता है।
मालूम हो कि चीन के वुहान शहर से कोरोना वायरस फैलने की शुरुआत हुई थी। इस समय चीन पूरी तरह से इस भयावह बीमारी से छूटकारा पा चुका है। लेकिन कुछ दिनों पहले कोरोना वायरस के कारण इस देश का हाल बहुत ही बुरा था। कोरोना के मरीजों को ठीक करने के लिए चीन के डॉक्टर्स द्वारा भी प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल किया गया है। चीन के शंघाई में कोरोना मरीज को ठीक करने के लिए सबसे पहले इस थेरेपी का इस्तेमाल किया गया था। यहां के डॉक्टर ने उन मरीजों का प्लाज्मा कलेक्ट किया, जो कोरोना के संक्रमण से ठीक हो चुके थे, फिर इस प्लाज्मा को अन्य मरीजों में डाला, इस थेरेपी से कई मरीजों को ठीक किया गया।