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Lung Cancer Kaise Hota Hai: आजकल कैंसर का खतरा इतना बढ़ गया कि लोग अपना जान बचाने के लिए साल में एक बार टेस्ट जरूर करवा रहे हैं। खासकर हम किसी एक कैंसर की बात करें तो हर ओर बीड़ी-सिगरेट का उड़ता धुआं सबको लंग्स कैंसर का शिकार बना रहा है। ऐसे में हर किसी के मन में ये सवाल आना लाजमी है कि 'क्या हमें इतनी खांस होने का कारण लंग्स कैंसर तो नहीं?'
ऐसा इसलिए क्योंकि कई दफा लोग अपनी खांसी को आम समझ कर अनदेखा कर देते हैं और जब तक पता चलता है कि कैंसर है, तब तक बहुत देर हो जाती है। इसलिए हमने इस विषय पर डॉक्टर जितेश राजपुरोहित से बातचीत की और जाना कि क्या सच में ज्यादा खांसी होना लंग्स कैंसर का संकेत हो सकता है?
जब डॉक्टर से सवाल पूछा गया तो उन्होंने बताया कि 'हां, लगातार खांसी खासतौर से जो 2-3 सप्ताह से अधिक समय तक जारी रहती है, या जो धीरे-धीरे बदतर होती जाती है या जिसके साथ बलगम में खून आता है, फेफड़ों के कैंसर का लक्षण हो सकता है। फिर भी, हर खांसी कैंसर का लक्षणनहीं होती। हर किसी को चेतावनी के संकेतों के मिश्रण पर नजर रखनी चाहिए।'
अगर आप यह पहचान करना चाहते हैं कि आपको या आपके किसी परिजन को फेफड़ों का कैंसरहै या नहीं तो इन कुछ जो फेफड़ों के कैंसर का संकेत हो सकते हैं वे हैं
डॉक्टर जितेश ने बताया कि निम्नलिखित परीक्षण डॉक्टरों द्वारा किए जा सकते हैं-
जब आपके पास ऐसे लक्षण होते हैं, खासकर जब आप धूम्रपान करते हैं या प्रदूषकों के संपर्क में रहने का इतिहास रखते हैं, तो जल्द से जल्द पल्मोनोलॉजिस्ट या ऑन्कोलॉजिस्ट से मिलना बेहतर होता है। बचाव ही इलाज है।
फेफड़ों के कैंसर के 0 से 4 तक स्टेज होती हैं।
लंग कैंसर मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है: नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (NSCLC) और स्मॉल सेल लंग कैंसर (SCLC)।
लंग कैंसर का पता लगाने के लिए सीटी स्कैन, एक्स-रे, ब्रोंकोस्कोपी, बायोप्सी और पीटी स्कैन जैसे टेस्ट किए जाते हैं।
हां, जो लोग सिगरेट-बीड़ी या तम्बाकू का सेवन नहीं करते उन्हें भी फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। प्रदूषण, धुआं और केमिकल्स के सम्पर्क में आने से फेफड़ों के कैंसर का रिस्क बढ़ता है।