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World Lung Cancer Day 2025- फेफड़ों का कैंसर या लंग कैंसर आमतौर पर स्मोकिंग करने की आदत, वायु प्रदूषण और रसायनों (Chemicals) के संपर्क में आने की वजह से होता है। हर साल कई रिपोर्ट्स सामने आती हैं जिनमें ये बताया जाता है कि किस तरह तेजी से बढ़ रहा प्रदूषण लोगों के फेफड़ों को कमजोर बना रहा है। वहीं, एक्टिव स्मोकिंग के साथ-साथ पैसिव स्मोकिंग से भी लंग्स को नुकसान पहुंचने के चौंकानेवाले आंकड़ें अक्सर सामने आते रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि, अनुवांशिक कारणों यानी जेनेटिक्स भी कैंसर का एक बड़ा कारण बन सकते हैं। कुछ रिसर्च और डॉक्टरों की मानें तो कुछ मामलों में लंग कैंसर का कारण परिवार की मेडिकल हिस्ट्री और डीएनए से भी जुड़े हुए पाए गए हैं।
डीएनए या जेनेटिक्स और लंग कैंसर के बीच क्या कनेक्शन है इस बारे में ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर विभोर शर्मा (Dr. Vibhor Sharma, Senior Consultant & Head - BMT & Medical Oncology (Unit II), Asian Hospital) कहते है कि, “हम यह नहीं कह सकते कि लंग कैंसर पूरी तरह अनुवांशिक बीमारी है, लेकिन यह ज़रूर है कि जिन लोगों के परिवार में पहले लंग कैंसर के मामले रहे हैं, उनमें फेफड़ों का कैंसर होने का रिस्क अधिक हो सकता है। ”
हाल के वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय स्टडीज़ सामने आयी हैं जिनमें कुछ ऐसे जेनेटिक म्यूटेशन पाए गए हैं जो फेफड़ों की कोशिकाओं में कैंसर पनपने का खतरा बढ़ा सकते हैं। खासकर EGFR, ALK और KRAS जीन में बदलाव लंग कैंसर के ऐसे मरीजों में देखे गए हैं जो स्मोकिंग नहीं करते। ये जीन शरीर में कोशिकाओं के बढ़ने और नष्ट होने की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं और जब इनमें गड़बड़ी होती है, तो अनियंत्रित कोशिका वृद्धि यानी कैंसर हो सकता है।
अगर किसी व्यक्ति के माता-पिता, भाई-बहन या नजदीकी रिश्तेदारों को लंग कैंसर हुआ है, तो उन्हें खुद पर विशेष ध्यान देना चाहिए। हालांकि यह गारंटी नहीं है कि कैंसर होगा ही, लेकिन उनकी निगरानी और स्क्रीनिंग नियमित होनी चाहिए।
डॉक्टरों के अनुसार, “परिवार में कैंसर का इतिहास होने पर व्यक्ति को कम उम्र से ही कुछ टेस्ट करवाने चाहिए। इसके साथ ही अगर वे धूम्रपान करते हैं, तो उनका रिस्क कई गुना बढ़ जाता है,”।
ऐसे मामलों में जेनेटिक काउंसलिंग और ज़रूरत पड़ने पर DNA टेस्ट करवाना उचित होता है। किसी भी लक्षण को नजरअंदाज करने की बजाय तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें और जरूरी टेस्ट कराएं। ध्यान रखें कि कैंसर की बीमारी जितनी जल्दी पकड़ में आएगी, कैंसर ट्रीटमेंट के सफल होने के चांसभी उतने अधिक बढ़ जाएंगे।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
हां, जो लोग सिगरेट-बीड़ी या तम्बाकू का सेवन नहीं करते उन्हें भी फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। प्रदूषण, धुआं और केमिकल्स के सम्पर्क में आने से फेफड़ों के कैंसर का रिस्क बढ़ता है।
हां , कुछ स्टडीज और रिसर्च के अनुसार, किसी व्यक्ति के परिवार में अगर किसी को पहले कैंसर हो चुका है तो उस व्यक्ति में भी कैंसर होने का रिस्क बढ़ जाता है।