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Kya Ghutno Ka Dard Thik Ho Sakta Hai: आजकल जिसे देखो वह घुटनों के दर्द से परेशान है, फिर चाहे उम्र 40 साल हो या फिर 60। कुछ दर्द तो आम होते हैं, लेकिन कुछ घुटनों के दर्द ऐसे होते हैं जिन्हें चलना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम अपने दर्द को अनदेखा करते हैं, लेकिन आगे चलकर यह नी रिप्लेसमेंट की कगार पर पहुंच जाता है। आपको बता दें कि घुटने के रिप्लेसमेंट की जरूरत तब होती है जब गठिया या चोट के कारण घुटने में बहुत अधिक दर्द और अकड़न होनी शुरू हो जाती है।
आज भारत में घुटनों का दर्द एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन चुका है। 40 की उम्र पार करते ही जैसे ही घुटनों में हल्का दर्द शुरू होता है, मरीज और उसका परिवार एक ही शब्द से डरने लगता है- नी रिप्लेसमेंट। मानो घुटनों का दर्द मतलब सीधा ऑपरेशन। लेकिन बतौर डॉक्टर और हेल्थ ऑब्जर्वर मैं साफ कहना चाहता हूं कि Knee Replacement इलाज का आखिरी पड़ाव है, शुरुआती रास्ता नहीं।
घुटनों में दर्द कई वजहों से हो सकता है मोटापा, लाइफस्टाइल, कैल्शियम की कमी, पुरानी चोट या फिर ऑस्टियोआर्थराइटिस। ऑस्टियोआर्थराइटिस एक उम्र से जुड़ी बीमारी है, जिसमें घुटने के जोड़ की कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसती जाती है। लेकिन यह प्रक्रिया सालों में होती है, रातों-रात नहीं। चिंता की बात यह है कि आज भी बड़ी संख्या में मरीज शुरुआती स्टेज में ही खुद को सर्जरी के लिए मानसिक रूप से तैयार मान लेते हैं, जबकि मेडिकल साइंस कुछ और कहती है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस को आमतौर पर चार स्टेज में बांटा जाता है।

सवाल यह नहीं कि Knee Replacement गलत है, सवाल यह है कि कब किया जाए। इसका जवाब है जब-

Knee Replacement एक सर्जरी है, जिसमें खराब हो चुके घुटने के जोड़ को हटाकर उसकी जगह आर्टिफिशियल इम्प्लांट लगाया जाता है। यह सर्जरी जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाती है, लेकिन यह कोई “लाइफस्टाइल सर्जरी” नहीं है, बल्कि मेडिकल मजबूरी में किया जाने वाला कदम है।
भारत में मोटापा, डायबिटीज, कम फिजिकल एक्टिविटी और उम्रदराज़ आबादी बढ़ने के साथ Knee Replacement सर्जरी की संख्या भी बढ़ी है। अनुमान है कि हर साल 2.5 से 3 लाख से ज्यादा लोग यह सर्जरी करवा रहे हैं। लेकिन इनमें से एक बड़ा हिस्सा ऐसा भी है, जहां सही समय पर गैर-सर्जिकल इलाज से सर्जरी टाली जा सकती थी।
Knee Replacement से पहले मरीज को:
यह समझना चाहिए कि सर्जरी के बाद भी लाइफस्टाइल बदलनी पड़ेगी, क्योंकि Knee Replacement के बाद भी वजन बढ़ा, एक्सरसाइज नहीं की या लापरवाही बरती गई, तो दूसरा घुटना भी खतरे में आ सकता है।
घुटनों की सेहत किसी चमत्कारी दवा से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदतों से तय होती है, जैसे-
आखिर में डॉक्टर ने कहा कि 'Knee Replacement कोई दुश्मन नहीं है, लेकिन इसे जरूरत से पहले अपनाना भी समझदारी नहीं। सही समय पर सही इलाज, जागरूकता और धैर्य से लाखों लोग बिना सर्जरी के भी घुटनों के दर्द के साथ बेहतर जीवन जी सकते हैं।'