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क्या घुटनों के दर्द का Knee Replacement ही आखिरी रास्ता है? डॉक्टर से जानें ऑस्टियोआर्थराइटिस के स्टेज 1-2 में क्या करें

क्या आपके भी घुटनों में दर्द होता है? अगर आपके मन में इस दर्द को लेकर नी रिप्लेसमेंट की बात आती है तो पहले डॉक्टर से जानें कि कितना दर्द होने पर Knee Replacement की जरूरत होती है।

क्या घुटनों के दर्द का Knee Replacement ही आखिरी रास्ता है? डॉक्टर से जानें ऑस्टियोआर्थराइटिस के स्टेज 1-2 में क्या करें
VerifiedVERIFIED By: Dr. Aashish Chaudhry

Written by Dr. Aashish Chaudhry |Updated : January 22, 2026 3:26 PM IST

Kya Ghutno Ka Dard Thik Ho Sakta Hai: आजकल जिसे देखो वह घुटनों के दर्द से परेशान है, फिर चाहे उम्र 40 साल हो या फिर 60। कुछ दर्द तो आम होते हैं, लेकिन कुछ घुटनों के दर्द ऐसे होते हैं जिन्हें चलना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम अपने दर्द को अनदेखा करते हैं, लेकिन आगे चलकर यह नी रिप्लेसमेंट की कगार पर पहुंच जाता है। आपको बता दें कि घुटने के रिप्लेसमेंट की जरूरत तब होती है जब गठिया या चोट के कारण घुटने में बहुत अधिक दर्द और अकड़न होनी शुरू हो जाती है।

आज भारत में घुटनों का दर्द एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन चुका है। 40 की उम्र पार करते ही जैसे ही घुटनों में हल्का दर्द शुरू होता है, मरीज और उसका परिवार एक ही शब्द से डरने लगता है- नी रिप्लेसमेंट। मानो घुटनों का दर्द मतलब सीधा ऑपरेशन। लेकिन बतौर डॉक्टर और हेल्थ ऑब्जर्वर मैं साफ कहना चाहता हूं कि Knee Replacement इलाज का आखिरी पड़ाव है, शुरुआती रास्ता नहीं।

घुटनों में दर्द का मतलब हमेशा सर्जरी नहीं

घुटनों में दर्द कई वजहों से हो सकता है मोटापा, लाइफस्टाइल, कैल्शियम की कमी, पुरानी चोट या फिर ऑस्टियोआर्थराइटिस। ऑस्टियोआर्थराइटिस एक उम्र से जुड़ी बीमारी है, जिसमें घुटने के जोड़ की कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसती जाती है। लेकिन यह प्रक्रिया सालों में होती है, रातों-रात नहीं। चिंता की बात यह है कि आज भी बड़ी संख्या में मरीज शुरुआती स्टेज में ही खुद को सर्जरी के लिए मानसिक रूप से तैयार मान लेते हैं, जबकि मेडिकल साइंस कुछ और कहती है।

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ऑस्टियोआर्थराइटिस: स्टेज 1 और 2 में घबराने की जरूरत नहीं

ऑस्टियोआर्थराइटिस को आमतौर पर चार स्टेज में बांटा जाता है।

स्टेज 1 और 2 में:

  • दर्द हल्का या मध्यम होता है
  • चलने-फिरने में पूरी तरह रुकावट नहीं आती
  • एक्स-रे में कार्टिलेज की मामूली घिसावट दिखती है
  • इस स्टेज में Knee Replacement की नहीं, बल्कि डिसिप्लिन और पेशेंस की जरूरत होती है।

फिर Knee Replacement की जरूरत कब पड़ती है?

सवाल यह नहीं कि Knee Replacement गलत है, सवाल यह है कि कब किया जाए। इसका जवाब है जब- 

  1. दर्द लगातार और असहनीय हो
  2. रात की नींद दर्द की वजह से टूटने लगे
  3. चलना मुश्किल हो जाए
  4. दवाइयों, इंजेक्शन और फिजियोथेरेपी से भी आराम न मिले
  5. तभी Knee Replacement पर विचार किया जाना चाहिए।

Knee Replacement है क्या?

Knee Replacement एक सर्जरी है, जिसमें खराब हो चुके घुटने के जोड़ को हटाकर उसकी जगह आर्टिफिशियल इम्प्लांट लगाया जाता है। यह सर्जरी जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाती है, लेकिन यह कोई “लाइफस्टाइल सर्जरी” नहीं है, बल्कि मेडिकल मजबूरी में किया जाने वाला कदम है।

भारत में क्यों बढ़ रहे हैं Knee Replacement?

भारत में मोटापा, डायबिटीज, कम फिजिकल एक्टिविटी और उम्रदराज़ आबादी बढ़ने के साथ Knee Replacement सर्जरी की संख्या भी बढ़ी है। अनुमान है कि हर साल 2.5 से 3 लाख से ज्यादा लोग यह सर्जरी करवा रहे हैं। लेकिन इनमें से एक बड़ा हिस्सा ऐसा भी है, जहां सही समय पर गैर-सर्जिकल इलाज से सर्जरी टाली जा सकती थी।

सर्जरी से पहले सोचें, समझें और पूछें

Knee Replacement से पहले मरीज को:

  1. दूसरी मेडिकल राय जरूर लेनी चाहिए
  2. सर्जन का अनुभव देखना चाहिए

यह समझना चाहिए कि सर्जरी के बाद भी लाइफस्टाइल बदलनी पड़ेगी, क्योंकि Knee Replacement के बाद भी वजन बढ़ा, एक्सरसाइज नहीं की या लापरवाही बरती गई, तो दूसरा घुटना भी खतरे में आ सकता है।

Knee Replacement से बचने का रास्ता आज भी मौजूद है?

घुटनों की सेहत किसी चमत्कारी दवा से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदतों से तय होती है, जैसे- 

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  • वजन नियंत्रण
  • रोजाना हल्की एक्सरसाइज
  • लंबे समय तक बैठने से बचाव
  • समय पर डॉक्टर से सलाह

आखिर में डॉक्टर ने कहा कि 'Knee Replacement कोई दुश्मन नहीं है, लेकिन इसे जरूरत से पहले अपनाना भी समझदारी नहीं। सही समय पर सही इलाज, जागरूकता और धैर्य से लाखों लोग बिना सर्जरी के भी घुटनों के दर्द के साथ बेहतर जीवन जी सकते हैं।'