क्या गर्भनिरोधक गोलियों की वजह से Breast Cancer हो सकता है?

ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं को होने वाले सबसे आम प्रकार के कैंसर में से एक है।

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Written By: Editorial Team | Published : October 11, 2017 10:58 AM IST

1960, में अस्तित्व में आई ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स या गर्भनिरोधक गोलियों ने महिलाओं को उनकी सेक्स लाइफ पर एक नियंत्रण दिया है और उन्हें प्रेगनेंसी से जुड़े अहम निर्णय लेने में मदद की है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि महिलाओं के लिए इसे एक बड़ी उपलब्धि के रूप में इसलिए भी देखा जा सकता है, क्योंकि इससे उन्हें गर्भनिरोध के लिए पुरुषों पर निर्भर होने से आज़ादी मिली है। जबकि यह गोली महिलाओं के लिए काफी  सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन हाल के वर्षों में इसके सुरक्षित होने से जुड़े कुछ सवाल उठ रहे हैं। महिलाओं के मन में जो सवाल अक्सर आता है वह यह है कि क्या, ओसीपी के सेवन से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा पैदा हो सकता है, जो महिलाओं को होने वाले सबसे आम प्रकार के कैंसर में से एक है।

संयुक्त या कम्बाइन्ड ओसीपी, जिसमें एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन का संयोजन होता है, महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की संभावना को बढ़ाने वाला माना जाता है, क्योंकि यह ब्रेस्ट टिश्यूज़ महिला स्टेरॉयड हार्मोन के लिहाज से कमज़ोर साबित होते हैं। एस्ट्रोजेन ब्रेस्ट टिश्यूज़ के विस्तार का कारण माना जाता है, जो स्टेम टिश्यूज़ को और मध्यवर्ती कोशिकाओं (intermediate cells) के विकास को उत्तेजित करके ब्रेस्ट कैंसर के ख़तरे को बढ़ा सकता है। हालांकि गर्भनिरोधक गोलियां लेनेवाली महिलाओं में से किसी में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बहुत कम होता है, लेकिन ओसीपी के प्रयोग से संबंधित काफी वाद-विवाद होता रहता है।

गायनकोलॉजिस्ट और फर्टिलिटी एक्सपर्ट  डॉ. बंदिता सिन्हा (डायरेक्ट,वर्ल्ड ऑफ वूमेन, नवी मुंबई) के निदेशक, इन आशंकाओं के बारे में बात करते हुए बताती हैं: "गर्भनिरोधक गोलियां का जब 1960 के दशक में आविष्कार हुआ तो उनमें हार्मोन की मात्रा बहुत अधिक थी। तब लोगों में यह डर था कि शायद इन गोलियों की वजह से सचमुच ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में हमने उत्पाद के प्रभावों के आधार पर गोली के बारे में अध्ययन किया है। जब एक हाई डोज़ वाली गोली दी गई थी, तो वजन में बढ़ोतरी जैसे कुछ साइड इफेक्ट्स देखे गए। उसके बाद हमने गोली की खुराक, लगभग 30 मिलीग्राम तक कम करने का फैसला किया। जहां साइड-इफेक्ट्स में कमी देखी गयी वहीं गोली के गर्भनिरोधक प्रभाव वैसे ही रहे।

हम पिल की खुराक लगातार कम करते रहे लेकिन साथ ही यह भी कोशिश की गयी वह अपने गर्भनिरोधक प्रभावों को बरकरार रखे। इसलिए, आज जो गोलियां बाज़ार में उपलब्ध हैं, वह बहुत कम ताकत की हैं। इसीलिए आज महिलाओं में गर्भनिरोधक गोलियों की वजह से ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना  लगभग न के बराबर है।”

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अनुवादक-Sadhna Tiwari

चित्रस्रोत-Shutterstock Images.

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