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Written By: Editorial Team | Updated : November 21, 2017 12:32 PM IST
ब्लड ग्लूकोज़ लेवल पर नज़र रखने के लिए आदर्श तरीका क्या है- हर दिन एक बार ब्लड टेस्ट करना या दिन में कई बार ब्लड जांचना या हर 15 दिन में एक बार ब्लड टेस्ट करना। डॉ. प्रदीप गाडगे (श्रेया डायबिटीज सेंटर, मुंबई) बता रहे हैं इसी बारे में।
क्या बार-बार डायबिटीज़ की जांच करना ज़रूरी है?
डॉ. प्रदीप गाडगे कहते हैं, "यह डायबिटीज के टाइप और उसकी गंभीरता के ऊपर निर्भर करता है। अगर आपकी डायबिटीज बहुत गंभीर नहीं है और जो डायट और एक्सरसाइज़ से कंट्रोल हो सकता है, तो आपको अपने ग्लूकोज लेवल पर निरंतर नज़र रखने के लिए घर पर ग्लूकोमीटर रखने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन अगर आप चाहें और आप खर्च कर सकते हैं, तो घर पर एक ग्लूकोमीटर रख सकते हैं। हालांकि, यदि आपको जेस्टेशनल डायबिटीज़ (टाइप 1 या टाइप 2) है, तो घर पर ग्लूकोमीटर रखना ठीक होगा।"
अक्सर लोग कहते हैं कि ग्लूकोमीटर लैब रीडिंग्स की विश्वसनीय नहीं हैं, फिर ग्लूकोमीटर में निवेश करना ठीक है क्या। खैर, आपको बता दें कि कोई भी टेस्ट लैब टेस्ट के रिजल्ट जैसे सटीक नहीं होते है। हालांकि, ग्लूकोमीटर आपके ब्लड शुगर के लेवल के बारे मे तुरंत बताता है और स्तर की निगरानी करने में आपकी मदद करता है। इसलिए यह आपके साथ-साथ आपके डॉक्टर को भी यह समझने में मदद करता है कि आपका ब्ल़ड ग्लूकोज़ लेवल कितना कंट्रोल में है।
इसलिए, अगर आप दिन में कई बार अपने ग्लूकोज लेवल की जांच करते हैं, तो यह दिनभर में होनेवाले उतार-चढ़ाव को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगा। दरअसल रीडिंग उतनी महत्वपूर्ण नहीं है जितनी की आपके ब्लड शुगर लेवल में होनेवाले उतार-चढ़ाव, जो आपकी समस्या के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह प्रेगनेंसी के समय होनेवाले डायबिटीज़ यानि जेस्टेशनल डायबिटीज़, टाइप 1 डायबिटीज़ और क्रोनिक किडनी डिज़िज़ वाले लोगों के लिए अहम है क्योंकि उनकी डायबिटीज़ अस्थिर होती है।
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अनुवादक: Sadhana Tiwari
चित्र स्रोत: Shutterstock Images.