Advertisement

मानसून में फंगल इंफेक्शन के लिए घरेलू नुस्खे आजमाना सही है? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

मानसून में हवा में नमी, पसीना ज्यादा आने के कारण फंगल इंफेक्शन का खतरा कई गुणा ज्यादा हो जाता है। फंगल इंफेक्शन से राहत पाने के लिए अक्सर लोग घरेलू नुस्खों को आजमाते हैं, लेकिन क्या ये सही है?

Written By Ashu Kumar Das
Updated : July 14, 2026 6:12 PM IST

मानसून में फंगल इंफेक्शन होना आम बात है।

दिल्ली, गाजियाबाद समेत पूरे उत्तर भारत में मानसून ने दस्तक दे दी है। मानसून अपने साथ ठंडक और राहत जरूर लाता है, लेकिन यही मौसम त्वचा संबंधी कई समस्याओं का कारण भी बनता है। बारिश के दिनों में हवा में नमी बढ़ जाती है, पसीना आसानी से सूख नहीं पाता और कपड़े लंबे समय तक गीले रहते हैं। ऐसे हालात फंगल इंफेक्शन बढ़ने का खतरा कई गुणा ज्यादा होता है। यही कारण है कि बारिश के मौसम में दाद (Tinea), कैंडिडा (Candida) और अन्य फंगल संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते हैं।

मानसून में होने वाली इन परेशानियों को दूर करने के लिए अक्सर लोग घर पर रखी हुई कोई क्रीम या दादी- नानी नुस्खे आजमाने लगते हैं। अगर आप भी मानसून में होने वाली खुजली और दाद पर क्रीम के साथ ऐसा ही करते हैं तो रुक जाइए। श्लोक डर्मेटोलॉजी एंड वेलनेस क्लिनिक की संस्थापक और एडवांस्ड, इंटरवेंशनल एवं होलिस्टिक डर्मेटोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मनीषा मारेड्डी (Dr. Manisha Mareddy ) बताती हैं कि फंगल इंफेक्शन को सामान्य खुजली या रैश पर मेडिकल स्टोर से खरीदी गई क्रीम और घरेलू नुस्खों को आजमाने से ये और बढ़ सकता है।

Advertisement

मानसून में क्यों बढ़ता है फंगल इंफेक्शन?

डॉ. मनीषा मारेड्डी का कहना है कि फंगस गर्म और नमी वाले वातावरण में तेजी से बढ़ता है। बारिश के मौसम में पसीना कम सूखता है, त्वचा की सिलवटों में नमी बनी रहती है और जूते या कपड़े लंबे समय तक गीले रहते हैं। इसके अलावा गीले तौलिये, कपड़ों की शेयरिंग या जिम में वर्कआउट करने से भी फंगल इंफेक्शन का खतरा कई गुना ज्यादा रहता है।

मानसून में कौन- कौन से फंगल इंफेक्शन का खतरा रहता है?

एक्सपर्ट बताती हैं कि मानसून में टीनिया और कैंडिडा जैसे फंगल इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है। आइए आगे जानते हैं इन इंफेक्शन के बारे में-

Advertisement

  1. टीनिया एक फंगल संक्रमण है, जो डर्मेटोफाइट्स (Dermatophytes) नामक फंगस के कारण होता है। इसे आम भाषा में दाद या रिंगवर्म भी कहा जाता है।
  2. कैंडिडा (Candida) की बात करें तो यह एक प्रकार का यीस्ट है, जो सामान्य रूप से हमारी त्वचा पर मौजूद रहता है। लेकिन जब नमी, पसीना या कमजोर इम्यूनिटी जैसी परिस्थितियां बनती हैं, तो यह जरूरत से ज्यादा बढ़कर संक्रमण का कारण बन जाता है।

फंगल इंफेक्शन के लिए घरेलू नुस्खे आजमाना सही है?

स्किन केयर एक्सपर्ट का कहना है कि हर घरेलू नुस्खा नुकसानदायक नहीं होता। कुछ सामान्य सावधानियां फंगल संक्रमण को रोकने और दोबारा होने से बचाने में मदद कर सकती हैं। डॉ. मनीषा मारेड्डी के मुताबिक घरेलू नुस्खे में फंगल इंफेक्शन को अच्छे से साफ करना, ढीले कपड़े पहनना शामिल है तो यह पूरी तरह से बिल्कुल सुरक्षित है। लेकिन हल्दी, लहसुन का पेस्ट, टूथपेस्ट को फंगल इंफेक्शन पर लगाना गलत है। इस तरह के इंफेक्शन पर हल्दी, लहसुन लगाने से फायदे की बजाय नुकसान पहुंच सकता है।

फंगल इंफेक्शन पर स्टेरॉयड क्रीम लगाना सही है?

इस सवाल का जवाब देते हुए डॉ. मनीषा मारेड्डी कहती हैं कि फंगल इंफेक्शन होने पर सबसे बड़ी गलती बिना सलाह के स्टेरॉयड युक्त क्रीम का इस्तेमाल करना है। मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली कई कॉम्बिनेशन क्रीम में स्टेरॉयड और एंटीफंगल दवा दोनों होती हैं। ये क्रीम शुरुआत में खुजली और लालपन कम कर देती हैं, जिससे मरीज को लगता है कि संक्रमण ठीक हो रहा है, जबकि अंदर ही अंदर फंगस फैलता रहता है। समय के साथ संक्रमण शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल सकता है, उसका आकार बदल सकता है और सामान्य एंटीफंगल दवाओं का असर भी कम हो सकता है। लंबे समय तक स्टेरॉयड क्रीम लगाने से त्वचा पतली और कमजोर भी हो सकती है।

मानसून में फंगल इंफेक्शन होने पर क्या करें?

बारिश के दिनों में अगर आपको भी बार- बार फंगल इंफेक्शन की समस्या होती है तो आप नीचे बताई गई चीजों को अपना सकते हैं। इसमें मुख्य रूप से शामिल है:

  1. प्रभावित हिस्से को हमेशा साफ और सूखा रखें।
  2. ढीले और सूती कपड़े पहनें।
  3. पसीने वाले कपड़े तुरंत बदलें।
  4. नहाने के बाद त्वचा की सिलवटों को अच्छी तरह सुखाएं।
  5. तौलिये और अंडर गारमेंट्स को अच्छे से धोकर सुखाएं
  6. किसी का तौलिया, कपड़े को कभी भी शेयर न करें।

फंगल इंफेक्शन होने पर कब डॉक्टर से मिलें?

डॉ. मनीषा बताती हैं कि फंगल संक्रमण का इलाज मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाता है। कई मामलों में केवल क्रीम से ही फंगल इंफेक्शन ठीक हो जाता है, जबकि गंभीर संक्रमण में ओरल एंटीफंगल दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। यदि मरीज को डायबिटीज जैसी कोई बीमारी है, तो फंगल इन्फेक्शन का इलाज करना ज्यादा जरूरी हो जाता है।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। अगर आपकी त्वचा पर लगातार खुजली, दाद, लाल चकत्ते या किसी प्रकार का संक्रमण दिखाई दे रहा है, तो इस मामले में घरेलू नुस्खे आजमाने की बजाय इस बारे में डॉक्टर से बात करें।