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Medically Verified By: Dr. Sanjay Goja
Kya Hepatitis Ka Ilaj Ho Sakta Hai: बहुत से ऐसे रोग है, जिनके बारे में लोगों को बहुत कम जानकारी होती है। इंटरनेट के जमाने में भी हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है, जिसके बारे में लोगों को बहुत ही कम जानकारी है। यहां तक कि बहुत ही कम संख्या में लोग यह जानते हैं, कि हेपेटाइटिस लिवर को प्रभावित करने वाली बीमारी है।
इसलिए आज हेपेटाइटिस डे के मौके पर हमने गुरुग्राम के नारायणा हॉस्पिटल में निदेशक एवं क्लिनिकल लीड और लिवर ट्रांसप्लांट के विशेषज्ञ व एचपीबी, रोबोटिक लिवर एक्सपर्ट डॉ. संजय गोजा से बात की। उनसे पूछा की 'क्या हेपेटाइटिस का इलाज संभव है?' इस विषय पर उन्होंने क्या कहा, आइए जानते हैं।
हेपेटाइटिस का इलाज, इसके प्रकार, गंभीरता और समय पर पहचान पर निर्भर करता है। हेपेटाइटिस A और E सामान्यतः स्वयं ही ठीक हो जाते हैं। हेपेटाइटिस B और C में शुरुआती जांच और उपचार से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है, जबकि हेपेटाइटिस D अधिक जटिल होता है। कुछ प्रकार पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं, जबकि कुछ को जीवन भर नियंत्रित करना पड़ता है। समय पर निदान, जीवनशैली में बदलाव, और चिकित्सकीय सलाह से रोग को काबू में रखा जा सकता है।
वायरल हेपेटाइटिस फेफड़ों में सूजन पैदा करने वाले वायरसके संक्रमण से होता है। इसके पांच प्रमुख प्रकार हैं, हेपेटाइटिस A, B, C, D और E। यह वायरस दूषित भोजन, रक्त, शरीर द्रव या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैल सकते हैं।
हेपेटाइटिस A आमतौर पर दूषित भोजन या पानी के सेवन से फैलता है। यह एक तीव्र (acute) संक्रमण होता है जो अक्सर कुछ हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाता है। यह क्रोनिक (chronic) नहीं बनता। इसके लक्षणों में थकान, बुखार, पेट दर्द, और पीलिया शामिल हैं। इलाज में आमतौर पर विश्राम, हाइड्रेशन और पोषण का ध्यान रखा जाता है। HAV का टीका भी उपलब्ध है, जो रोकथाम में मदद करता है। अधिकतर मामलों में यह जीवन भर की प्रतिरक्षा प्रदान करता है।
हेपेटाइटिस B एक गंभीर वायरल संक्रमण है जो रक्त, वीर्य और अन्य शरीर द्रवों से फैलता है। यह संक्रमण तीव्र या क्रोनिक हो सकता है। इलाज में एंटीवायरल दवाएं दी जाती हैं जो वायरस की गतिविधि को कम करती हैं। क्रोनिक मामलों में, लिवर डैमेज (सिरोसिस या कैंसर) का खतरा होता है। हालांकि, HBV का प्रभावी टीकाउपलब्ध है, जिससे इस बीमारी से बचाव संभव है। समय पर जांच और नियमित निगरानी से रोग नियंत्रण में रहता है।
हेपेटाइटिस C खून के जरिए फैलता है और अधिकतर मामलों में यह क्रोनिक हो जाता है। पहले इसका कोई कारगर टीका नहीं था, लेकिन अब डायरेक्ट-एक्टिंग एंटीवायरल्स (DAAs) की मदद से 90% से अधिक मामलों में यह पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इसका जल्दी पता लगाना और तुरंत उपचार शुरू करना बेहद जरूरी है, ताकि लिवर को नुकसान से बचाया जा सके। टीका अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन इलाज में काफी प्रगति हुई है।
हेपेटाइटिस D केवल उन लोगों को प्रभावित करता है जिन्हें पहले से हेपेटाइटिस B है, क्योंकि यह वायरस अकेले सक्रिय नहीं होता। यह एक को-इन्फेक्शन के रूप में होता है और लिवर को तेजी से नुकसान पहुंचा सकता है। इसके लिए अभी तक कोई विशिष्ट एंटीवायरल उपचार उपलब्ध नहीं है, लेकिन हेपेटाइटिस B के नियंत्रण से इसे रोका जा सकता है। HBV का टीका अप्रत्यक्ष रूप से HDV से बचाव करता है। उन्नत मामलों में लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है।
हेपेटाइटिस E प्रायः दूषित पानी के सेवन से फैलता है और विकासशील देशों में आम है। यह अधिकतर मामलों में स्वतः ठीक हो जाता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं में यह जानलेवा हो सकता है। इसके लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा नहीं है, और इलाज लक्षणों को नियंत्रित करने पर केंद्रित होता है। साफ पानी और स्वच्छता के जरिए इसे रोका जा सकता है। कुछ देशों में टीका उपलब्ध है, लेकिन यह व्यापक रूप से इस्तेमाल नहीं होता।
गैर-वायरल हेपेटाइटिस में फेफड़ों में सूजन किसी वायरस के कारण नहीं बल्कि ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया, शराब के सेवन या दवाओं के दुष्प्रभाव से होती है। यह भी गंभीर हो सकता है और लिवर फेलियर का कारणबन सकता है।
यह एक प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी बीमारी है जिसमें शरीर की इम्यून सिस्टम खुद की लिवर कोशिकाओं पर हमला करती है। इसके लक्षणों में थकान, पीलिया, पेट दर्द आदि हो सकते हैं। इलाज में कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स (जैसे प्रेडनिसोन) और इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं (जैसे ऐज़ाथायोप्रिन) दी जाती हैं। समय पर इलाज से रोग को नियंत्रित किया जा सकता है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। बिना इलाज यह सिरोसिस या लिवर फेलियर में बदल सकता है।
यह बीमारी अत्यधिक और लंबे समय तक शराब के सेवन से होती है। इसके लक्षणों में भूख न लगना, उल्टी, पीलिया, और लीवर का सूजन शामिल है। इलाज का पहला कदम है – तुरंत शराब छोड़ना। इसके अलावा, पोषण संबंधी सुधार, विटामिन सप्लीमेंट और कुछ मामलों में कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स का इस्तेमाल किया जाता है। लिवर बहुत अधिक क्षतिग्रस्त हो जाए तो लिवर ट्रांसप्लांट भी विकल्प हो सकता है। शराब से पूर्ण परहेज़ ही सबसे प्रभावी बचाव है।
कुछ दवाएं, जैसे पेनकिलर्स, एंटीबायोटिक्स या आयुर्वेदिक/जड़ी-बूटी उत्पाद, लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसे ड्रग-इंड्यूस्ड हेपेटाइटिस कहते हैं। इसका इलाज होता है – दवा को तुरंत बंद करना और लिवर फंक्शन की निगरानी करना। गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती की जरूरत हो सकती है। मरीज को भविष्य में लिवर पर असर डालने वाली दवाओं से बचने की सलाह दी जाती है। डॉक्टरी देखरेख में दवा लेना सबसे जरूरी है।
आरएनए टेस्ट से पता चलेगा कि आपको हेपेटाइटिस सी है या नहीं।
हां, हेपेटाइटिस सी खतरनाक हो सकता है, लेकिन इसका इलाज संभव है।
हेपेटाइटिस डी को सह-संक्रमण होने पर हेपेटाइटिस बी की तुलना में अधिक खतरनाक माना जाता है।
हेपेटाइटिस बी दुनिया में सबसे आम गंभीर लिवर संक्रमण है। यह हेपेटाइटिस बी वायरस के कारण होता है जो लिवर पर हमला करता है और उसे नुकसान पहुंचाता है।