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Medically Verified By: Dr. Praveen Gupta
brain forgetfulness (AI generated image)
क्या आपके साथ भी अक्सर ऐसा होता है कि आप अभी सोचते हैं और अगले ही पल उसी चीज को भूल जाते हैं? कई बार ऐसा भी होता है कि आप किसी कमरे में किसी काम से गए हों, लेकिन वहां पहुंचते ही भूल जाते हैं कि यहां पर आप करने क्या आए थे? किचन में कई बार फ्रिज खोलते हैं लेकिन याद ही नहीं रहता है कि इसमें से निकलना क्या है? ऐसा अमूमन सभी के साथ होता है। जबकि हमें बचपन की छोटी-छोटी बातें याद रहती है। लेकिन अभी क्या सोचा है? कल क्या बातचीत हुई है? यह सब कुछ दिमाग से गायब हो जाता है। लेकिन ऐसे में अक्सर सवाल आता है कि क्या ये बार-बार भूलने की बीमारी या सिर्फ आदत है और ये इन चीजों को दिमाग खुद से अपने डेटाबेस से डिलीट कर देता है। डॉ. प्रवीण गुप्ता, चेयरमेन, मेन्स, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम ने इस बारे में कुछ बेहद जरूरी जानकारियां दी हैं जिनके बारे में हम इस लेख में जानेंगे।
डिलीट करना एक पूरी तरह से एक अलग शब्द है और दिमाग के अंदर कोई डिलीट करने जैसी कोई प्रोसेस नहीं होती है। हमारा दिमाग कोई कंप्यूटर हार्ड डिस्क नहीं होती कि जो चीज जरूरी ना हो उसे कोई करप्ट कर दे। भूलना याददाश्त की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और उसके लिए दिमाग कोई डिलीट प्रोसेस शुरु नहीं करता लेकिन यह जरूर करता है कि जरूरी बातों और यादों को छांट लेता है।
दरअसल होता यह है कि हम दिन भर हजारों चीजों को देखते, सुनते व महसूस करते हैं और ये सभी चीजें हमारे दिमाग में एक जानकारी की तरह सेव होती रहती हैं। ऐसे में अगर अगर हमारा दिमाग घर की छोटी बड़ी जानकारी को इस तेजी से हमेशा के लिए सुरक्षित रखने लगे तो नई और जरूरी जानकारी को व्यवस्थित करना और जरूरत के समय सही जानकारी निकालना मुश्किल हो सकता है।
अगर सामान्य तौर पर बात करें तो भूलना कोई बीमारी नहीं होती बल्कि यह हमारे दिमाग की जरूरी जानकारियों को व्यवस्थित करने की एक प्रक्रिया होती है। इसलिए भूलने को बीमारी या किसी कमजोरी की निशानी मानना सही नहीं है, हमारे दिमाग को लगता है कि यह चीज उतनी जरूरी नहीं है। इसलिए अगर आप कई बार कुछ चीज भूल जाते हैं तो यह नई जानकारी सीखने और भविष्य में जरूरी यादों को आसानी से हासिल करने में मदद कर सकता है।
इस तकनीक को मेमोरी इंटरफ्रेंस के नाम से जाना जाता है। दरअसल जब नईं यादें बनती हैं, तो उनसे मिलती-जुलती पुरानी यादें एक दूसरे के साथ कंपीट कर सकती हैं। यही वजह है कि कई बार जानकारी दिमाग में मौजूद होने के बावजूद उसे सही समय पर रिकॉल करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए अगर आप रोजमर्रा की चीज भूल रहे हैं, तो इसे दिमाग के कमजोर होने की निशानी समझना सही नहीं होगा। हमारा दिमाग जरूरी चीजों को याद रखने को कोशिश करता है। इसलिए भूलना भी इसी प्रोसेस का हिस्सा है।
एकदम से हम जो चीजें भूल जाते हैं जैसे हम कमरे में आप भूल गये कि हम किस चीज के लिए आए हैं ये यह आमतौर पर मल्टीटास्किंग के दोरान होता है, जब दिमाग में कई चीजें एक साथ चल रही हों। मल्टीटास्किंक के दौरान कई बार ऐसा होता है कि हम कोई काम कर तो रहे होते हैं, जो दिमाग में एक तरह से रजिस्टर हो जाता है कि हम कर रहे है लेकिन कई प्रक्रियाएं चलने के कारण दिमाग उस जानकारी को सेव नहीं कर पाता है।
यह वास्तव में होता कैसे है, यह समझने के लिए आपको दिमाग की पूरी प्रोसेस को समझना पड़ेगा। सबसे पहले हम सबजेक्ट को रजिस्टर करते हैं और फिर उसको ब्रेन में सेव किया जाता है। यह ठीक उसी तरह होता है जैसे हमने डोक्यूमेंट्स दो बना दिया लेकिन उसे सेव नहीं किया। क्योंकि हम मल्टी टास्किंग कर रहे होते हैं और हमारे दिमाग में 3-4 चीजें चल रही होती हैं, इसलिए ऐसा होता है कि हम चीजें भूल जाते हैं।
डिसक्लेमर: भूलना जरूरी नहीं है कि कोई बीमारी ही हो लेकिन कई बार यह किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत भी हो सकता है और इसलिए डॉक्टर से जांच बेहद जरूरी है। इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल शैक्षणिक एवं सूचनात्मक है। Thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।