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Colorectal Cancer Awareness Month- कोलोरेक्टल कैंसर जागरूकता माह का उद्देश्य केवल इस बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाना ही नहीं है, बल्कि उन कैंसर योद्धाओं को सम्मान देना और सहायता प्रदान करना भी है, जिन्होंने सर्जरी, कीमोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन की दर्दनाक यात्रा पूरी की है। ऐसे लोगों की साझा की गई कहानियां दूसरों के मन से डर को दूर करने में मदद कर सकती हैं। लेकिन इन सब से इतर, बहुत ही कम लोग कोलोरेक्टल कैंसर के बारे में जानते हैं।
नारायणा हेल्थसिटी, बेंगलुरु के गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोबोटिक सर्जन, कैंसर सर्जन डॉक्टर सुश्रुत शेट्टी का कहना है कि ‘अक्सर हम कब्ज को खराब खान-पान या पानी की कमी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जब यह समस्या पुरानी हो जाए या मल के साथ खून आने लगे, तो यह कोलोरेक्टल कैंसर का शुरुआती अलार्म हो सकता है।’ जी हां, यानी कि आपका आम पेट दर्द कैंसर का लक्षण भी हो सकता है। आइए कैंसर के इस प्रकार के बारे में
जब कोलन (बड़ी आंत) में कोई ट्यूमर बढ़ने लगता है, तो वह आंत के रास्ते को संकरा कर देता है। इससे मल को गुजरने में कठिनाईहोती है, जिसे हम पुरानी कब्ज या मल के पतला होने के रूप में देखते हैं। यदि आपको बार-बार ऐसा महसूस होता है कि पेट पूरी तरह साफ नहीं हुआ है, तो यह ट्यूमर द्वारा पैदा की गई रुकावट का संकेत हो सकता है।
कोलोरेक्टल कैंसर अचानक पैदा नहीं होता। यह आमतौर पर पॉलीप्स नामक छोटी गांठों के रूप में शुरू होता है। समय के साथ, ये पॉलीप्स अनुवांशिक बदलावों के कारण कैंसर का रूप ले सकते हैं। अच्छी खबर यह है कि यदि इन पॉलीप्स को शुरुआती चरण में ही पहचान लिया जाए, तो कैंसर को होने से रोका जा सकता है।
कोलोरेक्टल कैंसर उन कैंसरों में से एक है जिसका इलाज सबसे आसान है, बशर्ते इसे समय पर पकड़ लिया जाए। शुरुआती चरणों में जीवित रहने की दर 90 प्रतिशत से भी अधिक होती है।
आगे के कदम और जांच- यदि डॉक्टर को कैंसर का संदेह है, तो वे निम्नलिखित जांच की सलाह दे सकते हैं:
कोलोनोस्कोपी- यह सबसे सटीक जांच है। इसमें एक छोटे कैमरे के जरिए पूरी आंत को देखा जाता है और यदि कोई पॉलीप मिलता है, तो उसे तुरंत निकाला भी जा सकता है।
मल इम्यूनोकेमिकल परीक्षण- यह मल में छिपे हुए खून की जांच करता है।
बायोप्सी- यदि कोई गांठ मिलती है, तो उसका छोटा सा हिस्सा लेकर लैब में जांचा जाता है।
सिर्फ दवाएं ही काफी नहीं हैं। अपने आहार में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं, पर्याप्त पानी पिएं और प्रोसेस्ड मीट से बचें। सक्रिय जीवन शैली और नियमित व्यायाम कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं। अपने शरीर के संकेतों को अनसुना न करें। कब्ज या खून आना केवल एक लक्षण नहीं, बल्कि आपके शरीर की चेतावनी हो सकती है। सही समय पर की गई जांच 'इलाज' से कहीं बेहतर है, क्योंकि कोलोरेक्टल कैंसर को हराना मुमकिन है, बशर्ते हम शर्म को छोड़कर स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
डॉक्टर के पास जानकारी साझा करने में कभी कोई कमी नहीं होनी चाहिए। हमारी आंतें हमारे शरीर का हिस्सा हैं और हमें उनके बारे में बात करने से जुड़ी शर्म या झिझक को दूर करना चाहिए। शौचालय की आदतों के बारे में एक साधारण बातचीत या मल इम्यूनोकेमिकल परीक्षण की मांग करना किसी की जान बचा सकता है।
जल्द पहचान को बढ़ावा देकर और समय रहते प्री-कैंसरस पॉलीप्स (कैंसर बनने से पहले की गांठें) को हटाकर, हम एक ऐसी दुनिया बना सकते हैं जहाँ किसी को भी कोलोरेक्टल कैंसर से अपनी जान न गंवानी पड़े। यदि आपकी आयु 45 वर्ष या उससे अधिक है, तो इसी महीने अपनी स्क्रीनिंग (जांच) का प्रबंध करें। यदि आप में कोई लक्षण हैं, तो प्रतीक्षा न करें; सही समय अभी है। कोलोरेक्टल कैंसर के मामले में, बचाव ही न केवल सबसे अच्छी दवा है; बल्कि यही इसका उपचार भी है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।