क्या वाकई गोमूत्र से कैंसर का इलाज संभव है?

इन दिनों एक बार फि‍र से यह बहत छिड़ गई है कि क्‍या वाकई गोमूत्र से कैंसर का इलाज किया जा सकता है? आयुर्वेद में गोमूत्र को एक खास औषधि माना गया है जबकि मेडिकल साइंस कैंसर को एक घातक बीमारी मानती है।

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Written By: Yogita Yadav | Published : April 27, 2019 12:10 PM IST

कैंसर के बारे में लगातार शोध हो रहे हैं। यह एक घातक बीमारी है। पर ऐसे मरीजों की संख्‍या भी कम नहीं है जिन्‍होंने कैंसर का डटकर मुकाबला किया और अपनी जिंदगी की जंग जीत ली। आम लोगों के साथ इनमें युवराज सिंह, सोनाली बेंद्रे जैसे सेलिब्रिटीज भी शामिल हैं। पर यह लड़ाई आसान नहीं थी। इसके लिए इन्‍हें सघन चिकित्‍सा और सतत जीजिविषा की जरूरत थी। हाल ही में खबर आई कि साध्‍वी प्रज्ञा ठाकुर को भी ब्रेस्‍ट कैंसर था और उन्‍होंने इसके इलाज के लिए गोमूत्र का सहारा लिया। हालांकि उनके इलाज करने का दावा करने वाले डॉ. एसएस राजपूत ने एक वेबसाइट को दिए इंटरव्‍यू में बताया कि साध्‍वी प्रज्ञा ठाकुर के ब्रेस्‍ट कैंसर का इलाज गोमूत्र से नहीं बल्कि सर्जरी से किया गया। उनके इस दावे और गोमूत्र समर्थकों के बीच फि‍र से यह बहस शुरू हो गई है। आइए जानते हैं क्‍या है इस पर विशेषज्ञों की राय।

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क्‍या है कैंसर

शरीर कई प्रकार की कोशिकाओं से बना होता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए ये कोशिकाओं वृद्धि करती हैं और नियंत्रित रूप से विभाजित होती हैं। कोशिकाएं जब पुरानी या क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो वे मर जाती हैं और उनके स्थान पर नई कोशिकाएं आ जाती हैं। हालांकि कभी कभी यह व्यवस्थित प्रक्रिया गलत हो जाती है। जब किसी सेल की आनुवंशिक सामग्री (डीएनए) क्षतिग्रस्त हो जाती है या वे बदल जाती हैं, तो उससे उत्परिवर्तन (म्युटेशन) पैदा होता है, जो कि सामान्य कोशिकाओं के विकास और विभाजन को प्रभावित करता है। जब ऐसा होता है, तब कोशिकाएं मरती नहीं, और उसकी बजाए नई कोशिकाएं पैदा होती हैं, जिसकी शरीर को जरूरत नहीं होती। ये अतिरिक्त कोशिकाएं बड़े पैमाने पर ऊतक रूप ग्रहण कर सकती हैं, जो ट्यूमर कहलाता है। हालांकि सभी ट्यूमर कैंसर नहीं होते, ट्यूमर सौम्य या घातक हो सकता हैं। पर घातक ट्यूमर आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेते हैं, जो अपने आसपास की कोशिकाओं पर हमला शुरू कर देते हैं। कैंसर के उपचार के दौरान इन्‍हीं अवांछित कोशिकाओं को खत्‍म करना होता है जा अन्‍य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा रही होती है। इसके लिए डॉक्‍टर रोग की स्थिति के आधार पर सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, किमोथेरेपी, जीवाणु थेरेपी तथा जैविक थेरेपी का चुनाव करते हैं।

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गौमूत्र में मौजूद तत्‍व

गौमूत्र को भी आयुर्वेद में एक औषधि के रूप में माना गया है। इसमें प्रतिजैविक, रोगाणु रोधक (antiseptic), ज्वरनाशी (antipyretic), कवकरोधी (antifungal) और प्रतिजीवाणु (antibacterial) तत्‍व पाए जाते हैं। गौमूत्र समर्थक यह भी दावा करते हैं कि गौमूत्र में निओप्लासटन विरोधी, एच -11 आयोडोल - एसेटिक अम्ल, डीरेकटिन, 3 मेथोक्सी इत्यादि किमोथेरेपीक औषधियों से अलग होते हैं जो सभी प्रकार के कोशिकाओं को हानि और नष्ट करते हैं | यह कर्क रोग के कोशिकाओं के गुणन को प्रभावकारी रूप से रोकता है और उन्हें सामान्य बना देता है |

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गौमूत्र समर्थकों का दावा

पिछले वर्ष गुजरात के जूनागढ़ विश्वविद्यालय के बायोटेक्नॉलजी वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि वे गोमूत्र से कैंसर का इलाज करने में सफल हो गए हैं। हालांकि इसके समर्थन में अभी तक कोई केस हिस्‍ट्री मीडिया के सामने नहीं आई है, जिसमें केवल गोमूत्र के सेवन से कैंसर का इलाज हो गया हो।  इस दावे की रिपोर्ट अंग्रेजी समाचार पत्र दि टाइम्‍स ऑपिफ इंडिया में प्रकाशित की गई थी।

एक्‍सपर्ट की राय

इस दुविधापूर्ण स्थ्‍िाति पर अपनी राय लिखते हुए मेडिकल एंड पीडियाट्रिक ऑन्कॉलजी के एसोसिएट प्रोफेसर वेंकटरमन राधाकृष्णन ने पिछले साल एक पोस्‍ट लिखी। उनका मानना था कि केवल गौमूत्र पीने से कैंसर का इलाज संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मैंने और मेरे साथी ऑन्कॉलजिस्ट ने अभी तक एक भी ऐसा कैंसर का मरीज़ नहीं देखा जिसने सिर्फ गौमूत्र पिया हो और उसका कैंसर ठीक हो गया हो। वे आगे लिखते हैं गौमूत्र आदमी के मूत्र से अलग नहीं है। इसमें 95 फीसदी पानी के अलावा सोडियम, पोटेशियम, फास्फोरस और क्रेटिनिन जैसे खनिज होते हैं। इनमें से कोई भी कैंसर-रोधी तत्व नहीं है। उन्होंने कहा कि गोमूत्र खेतों में डालने वाली चीज़ है ताकि उन्हें उपजाऊ बनाया जा सके, न कि इसे बोतल में भरकर कैंसर की दवा के रूप में बेचना चाहिए।

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