इस राज्य में लोग गाय के गोबर से कर रहे हैं कोरोना का इलाज, डॉक्टर्स ने दी चेतावनी फायदे नहीं होंगे ये नुकसान

गुजरात में कोरोनावायरस के इलाज और इससे बचाव के लिए कुछ लोग गाय के गोबर (Cow Dung) को अपने शरीर पर लगा रहे हैं। इनका मानना है कि इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी और कोरोनावायरस से उबरने में मदद मिलेगी। लेकिन, डॉक्टर्स की राय इस बारे में बिल्कुल अलग है......

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Written By: Anshumala | Published : May 13, 2021 4:54 PM IST

Cow Dung To Treat Coronavirus: देश में कोरोना के प्रसार (Corona spread) को रोकने के लिए जहां वैक्सीनेशन कैंपने तेजी से चल रहा है, गंभीर मरीजों का इलाज कुछ दवाओं जैसे स्टेरॉएड, रेमडेसिविर इंजेक्शन, प्लाज्मा आदि से किया जा रहा है, तो वहीं गुजरात में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो कोरोनावायरस का इलाज गाय के गोबर (Cow Dung) से कर रहे हैं। इन लोगों का मानना है कि गाय के गोबर (Cow Dung To Cure Corona) और मूत्र को अपने शरीर पर लगाने से कोरोना का नाश हो जाएगा। लोग ऐसा करके ठीक हो जाएंगे। इसके लिए ये लोग आश्रमों में जा रहे हैं, इन्हें विश्वास है कि इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा मिलेगा या कोरोनावायरस (Coronavirus) से उबरने में मदद करेगा।

गुजरात में आजमा रहे हैं कोविड के इलाज में ये तरीका

कुछ लोग इसके लिए सप्ताह में एक बार गौशाला (cow shelters) जाते हैं और वहां अपने पूरे शरीर को गाय के गोबर और मूत्र लगाकर ढंकते हैं। इन लोगों का मानना है कि इससे उनके शरीर कि रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी। वे जल्द ही कोरोना से ठीक हो जाएंगे।

गाय का गोबर एक पवित्र प्रतीक

हिंदू धर्म में, गाय जीवन और पृथ्वी का एक पवित्र प्रतीक है और वर्षों से घरों को साफ करने, पूजा-पाठ आदि में गाय के गोबर का उपयोग किया जाता रहा है। ऐसा माना जाता है कि गाय के गोबर में चिकित्सीय (Therapeutic) और एंटीसेप्टिक गुण (Antiseptic properties) होते हैं।

क्या गाय के गोबर से बूस्ट होती है इम्यूनिटी?

इन लोगों का मानना है कि यह एक थेरेपी है, जिससे इम्यूनिटी बढ़ती है। कई लोग तो ये भी कह रहें कि ऐसा करके वे कोरोना से जल्दी ठीक हो चुके हैं। लोग गौशाला में जाकर वहां अपनी पारी का इंतजार करते हैं। गाय के गोबर और मूत्र को मिलाकर बने पेस्ट को शरीर पर लगाया जाता है। उसे थोड़ी देर के लिए सूखने दिया जाता है। उसके बाद गायों को गले लगाने या उन्हें सम्मान देते हैं। फिर एनर्जी लेवल को बढ़ाने के लिए योगाभ्यास किया जाता है। फिर गोबर के लेप को शरीर से साफ करने के लिए दूध या छाछ का इस्तेमाल होता है।

डॉक्टर्स दे रहे हैं चेतावनी

भारत के डॉक्टर्स और वैज्ञानिक इस रिवाज को गलत बता रहे हैं। इस तरह की किसी भी प्रैक्टिस को गलत बताते हुए वे लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि गाय का गोबर या पेशाब लगाने से कोरोना का इलाज संभव है, बल्कि ऐसा करके दूसरी अन्य बीमारियों के होने की संभावना बढ़ जाती है। कोरोना के इलाज में इस्तेमाल किए जा रहे इस तरह के वैकल्पिक उपचार (alternative treatments for Covid-19) के लिए डॉक्टर्स बार-बार मना कर रहे हैं।

इस तरह के इलाज से लोगों में गलत धारणा बैठ जाती है कि वे कोरोना से सुरक्षित हो गए हैं, जिससे कोरोना या कोई दूसरी बीमारी को और भी ज्यादा गंभीर बना देते हैं। विशेषज्ञ के अनुसार, ऐसा कहीं भी कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि गाय का गोबर या मूत्र कोरोना के खिलाफ इम्यूनिटी को मजबूत (Cow Dung To Cure Corona in Hindi) करने में मदद करते हैं। यह सिर्फ लोगों के मन और विश्वास पर आधारित बात है। इतना ही नहीं, इन चीजों के उपभोग से भी सेहत को कई नुकसान हो सकते हैं। जानवरों से मनुष्यों में होने वाली बीमारियों के होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इतना ही नहीं इस प्रैक्टिस को करने के लिए लोग भीड़ इकट्ठी करेंगे, जिससे कोरोनावायरस के फैलने का रिस्क बढ़ सकता है।

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