
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By:
World Cancer Day: अगर परिवार में किसी को कैंसर रहा हो, तो यह स्वाभाविक है कि व्यक्ति अपने भविष्य को लेकर चिंतित हो जाए। अक्सर लोगों को लगता है कि कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो जीन के जरिये सीधे अगली पीढ़ी तक पहुंच जाती है, लेकिन हकीकत इससे थोड़ी अलग है। मेडिकल साइंस के अनुसार, ज्यादातर कैंसर केवल आनुवंशिक कारणों से नहीं होते। वर्ल्ड कैंसर डे के अवसर पर धरमशिला नारायणा हॉस्पिटल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर शुभम गर्ग कहते हैं कि-
"लगभग 5 से 10 प्रतिशत कैंसर ही पूरी तरह से genetic mutations के कारण होते हैं, जबकि बाकी मामलों में लाइफस्टाइल, खानपान, पर्यावरण, तंबाकू, शराब, मोटापा और बढ़ती उम्र जैसी चीजें अहम भूमिका निभाती हैं। फिर भी अगर परिवार में कैंसर का इतिहास रहा हो, तो व्यक्ति को सामान्य से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है।"
डॉक्टर ने इसके अलावा और भी जानकारी सांझा की, जो हर एक व्यक्ति को पता होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि आप कैंसर होने से खुद को कैसे बचा सकते हैं।

डॉक्टर बताते हैं कि हमारे शरीर की कोशिकाएं जीन के नियंत्रण में काम करती हैं। ये जीन तय करते हैं कि कोशिकाएं कब बढ़ेंगी, कब रुकेंगी और कब खुद को ठीक करेंगी। कभी-कभी ये जीन खराब हो जाते हैं, जिन्हें mutations कहा जाता है। अगर ऐसे खराब जीन माता-पिता से विरासत में मिलते हैं, तो कुछ खास तरह के कैंसर जैसे स्तन, अंडाशय, कोलन, प्रोस्टेट या थायरॉइड कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। खासकर तब जब परिवार में कम उम्र में कैंसर का पता चला हो या एक ही तरह का कैंसर कई सदस्यों में पाया गया हो।
एक्सपर्ट कहते हैं कि ऐसे लोगों के लिए सबसे अहम कदम है समय पर और नियमित screening कराना। Screening का मतलब है कैंसर बीमारी के लक्षण दिखने से पहले ही जांच कर लेना। जिन लोगों में genetic risk होता है, उन्हें कई बार सामान्य लोगों से कम उम्र में और ज्यादा बार जांच कराने की सलाह दी जाती है।
डॉक्टर उदाहरण देते हुए कहते हैं कि "स्तन कैंसर के पारिवारिक इतिहास वाली महिलाओं को 40 साल से पहले मैमोग्राफी कराने की जरूरत पड़ सकती है। इसी तरह सर्वाइकल कैंसर के लिए Pap smear और HPV टेस्ट, कोलन कैंसर के लिए colonoscopy और पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के लिए PSA टेस्ट समय पर कराना बेहद जरूरी होता है। डॉक्टर परिवार के इतिहास को देखकर यह तय करते हैं कि किस व्यक्ति को कौन-सी जांच कितनी उम्र में शुरू करनी चाहिए।"

कुछ मामलों में डॉक्टर जैनेटिक काउंसलिंग या जैनेटिक टेस्टिंग की भी सलाह दे सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को यह जांच करानी चाहिए, बल्कि यह उन लोगों के लिए होती है जिनके परिवार में कैंसर के मामले ज्यादा रहे हों या कम उम्र में सामने आए हों।
हालांकि जीन बदले नहीं जा सकते, लेकिन उनके असर को काफी हद तक कम जरूर किया जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है, चाहे जैनेटिक मौजूद ही क्यों न हो। तंबाकू और शराब से दूरी, संतुलित और फाइबर युक्त आहार, नियमित व्यायाम, वजन को नियंत्रित रखना, प्रोसेस्ड और जंक फूड से बचना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव को मैनेज करना ऐसे कदम हैं जो कैंसर के खतरे को कम करने में मदद करते हैं। कई रिसर्च यह भी बताती हैं कि हेल्दी लाइफस्टाइल जैनेटिक रिस्क के असर को काफी हद तक न्यूटरल कर सकती है।
इसके साथ ही, अगर परिवार में कैंसर का इतिहास है, तो शरीर में होने वाले किसी भी बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अचानक वजन कम होना, लगातार थकान महसूस होना, शरीर में कहीं गांठ या सूजन, लंबे समय तक दर्द रहना या बिना वजह खून आना जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर डॉक्टर से सलाह लेने पर कैंसर शुरुआती स्टेज में पकड़ में आ सकता है, जहां इलाज ज्यादा आसान और सफल होता है।
कुल मिलाकर, परिवार में कैंसर का इतिहास होना डरने की वजह नहीं बल्कि समझदारी से कदम उठाने का संकेत है। सही जानकारी, समय पर स्क्रीनिंग, डॉक्टर की सलाह और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह याद रखना जरूरी है कि जीन आपके जोखिम को बढ़ा सकते हैं, लेकिन वे आपका भविष्य पूरी तरह तय नहीं करते।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।