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क्या ऑटिज्म एक जन्मजात डिसऑर्डर होता है? डॉक्टर दे रहे हैं हर माता-पिता के लिए जरूरी जानकारी

ऑटिज्म एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चा सही ढंग से अपने व्यवहार और भावनाओं को प्रकट नहीं कर पाता है। अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या यह जन्मजात डिसऑर्डर है? आइए डॉक्टर से जानते हैं इस बारे में-

क्या ऑटिज्म एक जन्मजात डिसऑर्डर होता है? डॉक्टर दे रहे हैं हर माता-पिता के लिए जरूरी जानकारी
Autism Disorder
VerifiedMedically Reviewed By: Dr. Sumit Gakkhar

Written by Kishori Mishra |Published : April 2, 2026 5:58 PM IST

ऑटिज्म एक बीमारी नहीं, बल्कि एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर  है। इस स्थिति में बच्चे के मस्तिष्क का विकास अलग तरीके से किया जाता है। यह स्थिति आमतौर पर बचपन के शुरुआती वर्षों में ही दिखाई देना शुरू किया जाता है। ऑटिज्म के लेकर लोगों में कई तरह से सवाल रहते हैं। अक्सर देखा गया है कि लोगों को यह पता ही नहीं होता है कि आखिर ऑटिज्म क्यों होता है? कुछ लोगों को लगता है कि यह एक जन्मजात समस्या है। वहीं, कुछ लोग मानते हैं कि यह जन्म के बाद  होता है। इस बारे में हम जपुयर के नारायणा हॉस्पिटल के साइकेट्रिस्ट, विजिटिंग कंसल्टेंट सुमित गक्खर से जानते हैं कि क्या ऑटिज्म जन्मजात होता है या यह  जन्म के बाद होने वाली स्थिति है?

क्या ऑटिज्म जन्म से होता है?

डॉ. सुमित का कहना है कि ऑटिज्म को मुख्य रूप से जन्मजात स्थिति के रूप में माना जाता है। यानी बच्चे के जन्म के समय ही मस्तिष्क के विकास में कुछ बदलाव होते हैं, जिसकी वजह से यह स्थिति होती है। हालांकि, यह बदलाव तुरंत दिखाई नहीं दिया जाता है। आमतौर पर 1 से 3 साल की उम्र के बीच इसके संकेत पहचाने जाते हैं।

यह भी देखा जाता है कि कुछ जेनेटिक फैक्टर्स इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। परिवार में पहले से ही अगर किसी को ऑटिज्म है, तो  दूसरे बच्चे में इसका जोखिम थोड़ा बढ़ जाता है।  साथ ही, गर्भावस्था के दौरान कुछ पर्यावरणीय कारण भी इसमें योगदान दिए जाते हैं।

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शुरुआती संकेत कैसे पहचाने जाते हैं?

ऑटिज्म के लक्षण हर बच्चे में अलग-अलग तरीके से दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ सामान्य संकेतों पर ध्यान देकर इसकी समय पर पहचान की जा सकती है, जैसे-

  • बच्चा आंखों में आंखें डालकर बात न करता हो।
  • नाम पुकारे जाने पर प्रतिक्रिया कम देता हो।
  • बोलने में देरी या भाषा का विकास धीमा हो।
  • बार-बार एक ही व्यवहार दोहराता हो।
  • सामाजिक गतिविधियों में रुचि कम दिखाई दे।

इन संकेतों को शुरुआती स्तर पर पहचाना जाना बेहद जरूरी माना जाता है, क्योंकि अगर समय पर पहचान हो तो बच्चे की स्थिति में काफी हद तक सुधार किया जा सकता है।

परिवार के लिए क्यों जरूरी है जागरूकता?

जब किसी बच्चे में ऑटिज्म के लक्षण देखे जाते हैं, तो परिवार में चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है।  ऐसे में सही जानकारी और समझ होना बहुत जरूरी माना जाता है। यह समझा जाना चाहिए कि ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं है, जिसे पूरी तरह ठीक किया जा सके, बल्कि यह एक स्थिति है जिसे सही सपोर्ट और थेरेपी के जरिए मैनेज किया जाता है।

परिवार का सहयोग बच्चे के विकास में अहम भूमिका निभा सकता है। बच्चे को स्वीकार किया जाना, उसकी जरूरतों को समझना और धैर्य के साथ उसका साथ देना बहुत ही जरूरी होता है।

क्या ऑटिज्म का इलाज संभव होता है?

डॉक्टर कहते हैं कि ऑटिज्म का कोई स्थाई इलाज नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया सकताा है। इसके लिए कई तरह की थेरेपी का उपयोग किया जाता है, जैसे-

  • बिहेवियरल थेरेपी
  • स्पीच थेरेपी
  • ऑक्यूपेशनल थेरेपी

इन सभी थेरेपी के जरिए बच्चे के कम्युनिकेशन, सामाजिक कौशल और दैनिक गतिविधियों में सुधार किया जा सकता है। जितनी जल्दी इनका उपयोग शुरू किया जाए, ये उतने बेहतर रिजल्ट देते हैं।

माता-पिता क्या कदम उठाएं?

अगर बच्चे में ऑटिज्म के संकेत दिखे, तो तुरंत अपने एक्सपर्ट से सलाह लें। इसके बाद एक उचित थेरेपी प्लान करें। साथ ही, घर का माहौल सकारात्मक और सहयोगी बनाए रखें, ताकि बेहतर रिजल्ट मिल  सके।

माता-पिता को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ऐसे बच्चे की तुलना, दूसरे बच्चों से नहीं की जाती है। हर बच्चा अपनी गति से विकास करता है और उसी अनुसार उसे सपोर्ट दिया जाना चाहिए।

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Highlights

  • ऑटिज्म एक जन्मजात स्थिति है।
  • यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक न्यूरो डेवलेपमेंट स्थिति है।
  • सही समय पर पहचान करते बच्चे  की स्थिति में काफी हद तक सुधार किया जा सकता है।

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।