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Written By: Anshumala | Updated : October 21, 2019 1:08 PM IST
Apart from the physical aspects, emotional problems or stress can dis balance your hormonal cycle.
अक्सर कुछ महिलाओं को इर्रेगुलर पीरियड्स (irregular periods in women) की समस्या होती है। दो-तीन महीने तक पीरियड्स नहीं आता है। इसे पीरियड्स का अनियमित होना, इर्रेगुलर पीरियड्स या पीरियड्स का मिस होना भी कहते हैं। पीरियड्स इर्रेगुलर (irregular periods) होता है, तो हेवी ब्लीडिंग या फिर बहुत ही कम ब्लीडिंग होती है। पेट दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द, उल्टी जैसी कई समस्याएं अलग से झेलनी पड़ती है। एक-दो बार पीरियड्स मिस हो, तो ठीक है या फिर इसकी वजह आपका प्रेग्नेंट होना भी हो सकता है, लेकिन बार-बार यह समस्या हो, तो जरूरी नहीं कि आप प्रेग्नेंट ही हों।
पीरियड्स का मिस होना यानी इर्रेगुलर पीरियड्स (problem of irregular periods) के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। कई बार शारीरिक गड़बड़ियों के कारण भी पीरियड्स अनियमित (causes of irregular periods) हो जाती है। पीरियड्स कई कारणों जैसे शरीर में खून की कमी, पीरियड्स के समय ठंडी चीजें खाना, मोटापा, तनाव, मानसिक दबाव, अनहेल्दी जीवनशैली आदि से भी प्रभावित हो सकता है।
1. क्या आप हर चीज का बहुत ज्यादा तनाव लेने लगी हैं? घर, ऑफिस, बच्ची, पति, परिवार के अन्य सदस्यों की देखभाल आदि का प्रेशर आपके ऊपर बहुत है, तो इन सभी बातों से भी शरीर पर नकारात्मक असर पड़ता है। तनाव पीरियड्स की नियमितता (causes of irregular periods) को प्रभावित कर सकता है। खासकर, पीरियड्स आने के समय तनाव में रहना ठीक नहीं है।
इससे पीरियड्स साइकल बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। तनाव से स्ट्रेस हार्मोन के ऊपर सीधा असर पड़ता है, जो कि एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन (दो सेक्स हार्मोन) की शरीर से ज्यादा या कम उत्पत्ति के लिए जिम्मेदार होता है। अगर रक्त प्रवाह में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाता है, तो पीरियड्स की साइकिल पर असर पड़ता है। हो सके तो खुद को टेंशन फ्री रखें, खुश रहें, दिमागी रूप से शांत रहें।
2. क्या आप किसी गंभीर या लंबी बीमारी से पीड़ित थीं, जिसका सफल इलाज करवाकर उस बीमारी से अभी-अभी उबरी हैं? यदि हां, तो इससे भी भविष्य में या आने वाले महीनों में पीरियड्स अनियमित या इर्रेगुलर (irregular periods) हो सकता है। कई बार अधिक दवाओं के सेवन से भी पीरियड्स कुछ दिनों के लिए रुक जाता है। कुछ दवाओं के सेवन से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के लेवल पर असर पड़ता है।
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3. ओवरी में सिस्ट होने पर भी पीरियड्स इर्रेगुलर होने लगती है। सिस्ट की जांच कराना जरूरी है। हार्मोन में बदलाव भी मासिक धर्म के चक्र पर असर डालता है। हार्मोन में बदलाव को आप कई शारीरिक लक्षणों के जरिए जैसे चेहरे पर छोटे-छोटे बाल उगना, मुंहासे अधिक होना, पिग्मेंटेशन, इर्रेगुलर पीरियड्स, सेक्स में कम दिलचस्पी, गर्भधारण करने में परेशानी से पहचान सकती हैं।
4. 40-50 वर्ष पहुंचते-पहुंचते शरीर में हार्मोन लेवल में परिवर्तन होने लगता है। ये भी काफी हद तक पीरियड्स को प्रभावित करते हैं। इस उम्र की कई महिलाओं में मेनोपॉज भी हो जाता है।
5. वजन अधिक बढ़ने से भी पीरियड्स प्रभावित होता है। यदि आपका वजन बहुत अधिक है या आप काफी दुबली हैं, तो पीरियड्स एक-दो महीने तक रुक भी सकता है। वजन पर काबू रखें, उसे कम करने के उपायों को अपनाएं।
6. क्या आप बहुत ज्यादा एक्सरसाइज, वर्कआउट करती हैं? यदि हां, तो जान लें आवश्यकता से अधिक शारीरिक कसरत मासिक धर्म के चक्र में अनियमितता ला सकती है। पीरियड्स होने के लिए शरीर में ताकत होना जरूरी है। जिम में जाकर अपनी सारी ताकत, एनर्जी ना बर्न करें, खासकर जब आपके पीरियड्स की डेट करीब आ रही हो।