सप्लीमेंट लेने के बाद भी नहीं बढ़ रहा आयरन लेवल, जानें Iron Lock Syndrome क्या है और कैसे होता है?
आयरन शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है। यह कई अहम कार्यों के लिए जिम्मेदार होता है।
क्या आपको भी हर वक्त थकान और कमजोरी होती है? क्या आपको चक्कर आने या सांस फूलने जैसी समस्याएं हो रही हैं? अगर हां, तो ये शरीर में आयरन की कमी का संकेत हो सकते हैं। कुछ मामलों में शरीर में आयरन तो होता है, लेकिन शरीर इसे लॉक करके रखता है, इस स्थिति में भी हर वक्त थका-थका महसूस हो सकता है। आपको बता दें कि यह Iron Lock Syndrome होता है, जो आजकल लोगों में ज्यादा देखने को मिल रहा है।
Iron Lock Syndrome: यह शरीर की एक ऐसी स्थिति है, जिसमें आयरन मौजूद होने के बावजूद शरीर उसे ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाता है। इस स्थिति में शरीर में आयरन तो होता है, लेकिन वह “लॉक” हो जाता है। शरीर हीमोग्लोबिन बनने के लिए आयरन का उपयोग नहीं कर पाता है। इसकी वजह से एनीमिया हो जाता है। वैसे तो यह समस्या किसी भी लिंग या उम्र के लोगों को हो सकती है। लेकिन, महिलाओं में इसके मामले ज्यादा सामने आते हैं। आज इस लेख में हम आपको Iron Lock Syndrome के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। Iron Lock Syndrome क्या होता है? यह कैसे होता है और इसकी पहचान करने के लिए कौन-सी जांचें की जाती हैं? जानें इसके बारे में- एशियन हॉस्पिटल की कंसल्टेंट-पीडियाट्रिक हेमाटोलॉजिस्ट एंड ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. आरुषी अग्रवाल से जानते हैं इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब-
आयरन शरीर के लिए क्यों जरूरी होता है?
- आयरन शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है। यह कई अहम कार्यों के लिए जिम्मेदार होता है।
- आयरन हीमोग्लोबिन बनाने का काम करता है। यह खून में ऑक्सीजन पहुंचाता है।
- आयरन दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है।
- यह मसल्स की ताकत बनाए रखने में मदद करता है।
- आयरन शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखता है।
- जब शरीर में आयरन होता है, तो इससे थकान और कमजोरी दूर रहती है।
शरीर में आयरन की कमी के लक्षण
जब शरीर में आयरन की कमी होती है, तो शरीर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होनी शुरू हो जाती हैं। शरीर में आयरन का स्तर कम होने पर कुछ लक्षण महसूस होते हैं, इनमें शामिल हैं-
- थकान और कमजोरी का अनुभव होना: शरीर में आयरन का स्तर कम होने से आपको थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है।
- सांस फूलना: अगर आपका थोड़ा-सा काम करने के बाद भी सांस फूली जा रही है तो इस संकेत को नजरअंदाज न करें। यह आयरन की कमी का संकेत हो सकता है।
- चेहरे पर पीलापन नजर आना: आयरन की कमी की वजह से चेहरे पर पीलापन नजर आने लगता है। इस स्थिति में शरीर में खून की कमी होने लगती है।
- बालों का झड़ना शुरू होना: जब शरीर में आयरन की कमी होती है, तो इस स्थिति में बालों का झड़ना शुरू हो सकता है।
- नाखूनों का टूटना: आयरन की कमी की वजह से नाखून कमजोर होकर टूट सकते हैं।
- चक्कर आना: आयरन की कमी से थकान होने लगती है। इससे आपको चक्कर आने की समस्या हो सकती है।
- दिल की धड़कन तेज होना: आयरन की कमी से दिल की धड़कन तेज हो सकती है।
- एकाग्रता में कमी होना: आयरन की कमी ध्यान लगाने और एकाग्रता में कमी हो सकती है। इसलिए अगर आपको ध्यान लगाने में मुश्किल हो रही है तो एक बार आयरन के स्तर की जांच जरूर कराएं।
ज्यादातर लोग इन लक्षणों को सामान्य या काम का दबाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि ये आयरन की कमी के संकेत भी हो सकते हैं।
आयरन सप्लीमेंट लेने के बाद भी क्यों नहीं बढ़ता इसका लेवल?
कई लोगों के मन में सवाल यह आता है कि आयरन सप्लीमेंट लेने के बाद इसका लेवल क्यों नहीं बढ़ता है? आमतौर पर लोग सोचते हैं कि अगर आयरन कम है तो दवा खाने से यह ठीक हो जाएगा। लेकिन सच्चाई यह है कि हर आयरन की कमी एक जैसी नहीं होती है। कई मामलों में शरीर में आयरन की कमी नहीं होती, बल्कि शरीर आयरन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता है। यहीं से शुरू होता है Iron Lock Syndrome।
Iron Lock Syndrome क्या है?
आयरन लॉक सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में आयरन मौजूद होता है। व्यक्ति आयरन सप्लीमेंट भी ले रहा होता है, लेकिन शरीर इस आयरन को अवशोषित नहीं कर पा रहा है। यानी इस स्थिति में आयरन शरीर के अंदर "लॉक" हो जाता है।
Iron Lock Syndrome कोई अलग बीमारी नहीं है। यह शरीर की एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर पर्याप्त आयरन होने के बावजूद भी उसे ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता है। अगर आसान भाषा में कहें तो शरीर आयरन को लॉक कर देता है। इस स्थिति में शरीर, आयरन को खून बनाने की प्रक्रिया में इस्तेमाल नहीं होने देता है।
Iron Lock Syndrome में शरीर के अंदर क्या होता है?
इस सिंड्रोम को समझने के लिए सबसे पहले आपको एक खास हार्मोन को समझना जरूरी है, वह है- हेप्सिडिन (Hepcidin)। आपको बता दें कि हेप्सिडिन एक हार्मोन है, जिसे लिवर द्वारा बनाया जाता है। यह शरीर में कई जरूरी कार्यों को तय करता है, जैसे-
- आयरन आंतों से खून में जाएगा या नहीं
- स्टोर किया हुआ आयरन रिलीज होगा या नहीं
जब हेप्सिडिन का स्तर बढ़ जाता है, तो आंतों में आयरन का अवशोषण रुक जाता है। इस स्थिति में शरीर आयरन को स्टोर करके रख लेता है और इसे काम करने से रोकता है। इस स्थिति में खून में आयरन का स्तर कम दिखाई देता है। यानी हाई हेप्सिडिन लेवल की वजह से ही आयरन लॉक सिंड्रोम होता है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर हेप्सिडिन का स्तर बढ़ता क्यों है?
हेप्सिडिन लेवल बढ़ने के कारण
शरीर में हेप्सिडिन का स्तर कई कारणों से बढ़ सकता है। इसमें शामिल हैं-
1. शरीर की सूजन (Chronic Inflammation)
जब शरीर में लंबे समय तक सूजन बनी रहती है, तो इस स्थिति में हेप्सिडिन का स्तर बढ़ सकता है। आपको बता दें कि मोटापा, पीसीओएस, ऑटोइम्यून डिजीज, संक्रमण, डायबिटीज और थायराइड डिसऑर्डर जैसी स्थितियां शरीर में सूजन का कारण बन सकते हैं और इसकी वजह से हेप्सिडिन लेवल बढ़ सकता है।
2. आंतों की खराब सेहत (Poor Gut Health)
जब आंतों में कुछ गड़बड़ी होती है या आंतें ठीक तरीके से काम नहीं कर पाती हैं, तो इस स्थिति में हेप्सिडिन का स्तर बढ़ सकता है। इस स्थिति में शरीर आयरन को अवशोषित नहीं कर पाता है और दवा का असर भी नहीं होता है। जब आंतों से जुड़ी समस्याएं जैसे- गैस, एसिडिटी, आईबीएस, डायरिया, कब्ज आदि होता है, तो आंतों में गड़बड़ी शुरू हो सकती है।
3. गलत तरीके से आयरन लेना
अगर आप गलत तरीके से आयरन लेते हैं, तो भी इसका कोई फायदा नहीं होता है। चाय-कॉफी के साथ आयरन लेने, खाना खाने के तुरंत बाद आयरन सप्लीमेंट लेने से आयरन अवशोषण रुक सकता है और हेप्सिडिन लेवल बढ़ सकता है।
4. लंबे समय तक आयरन सप्लीमेंट लेना
अगर आब बिना जरूरत के लंबे समय से आयरन सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो इससे हेप्सिडिन का स्तर बढ़ सकता है। इस स्थिति में शरीर डिफेंस मोड में चला जाता है और आयरन को जहर समझकर अवशोषित करने से रोक देता है।
Iron Lock Syndrome के लक्षण क्या हैं?
- बिना वजह लगातार थकान बने रहना
- हीमोग्लोबिन का स्तर लगातार कम होना
- फेरिटिन (Ferritin) हाई हो सकता है।
- सीरम आयरन का स्तर कम हो सकता है।
Iron Lock Syndrome की जांच कैसे होती है?
आयरन लॉक सिंड्रोम की जांच के लिए सबसे पहले हीमोग्लोबिन की जांच कराई जाती है। इसका निदान करने के लिए कुछ दूसरी जांचें भी कराई जा सकती हैं। इसमें शामिल हैं-
- सीबीसी (Complete Blood Count): सीबीसी एक सामान्य ब्लड टेस्ट है। इसके माध्यम से खून में लाल रक्त कोशिकाओं (RBC), श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBC) और प्लेटलेट्स की संख्या का पता चलता है। इस टेस्ट के जरिए एनीमिया, संक्रमण, सूजन या रक्त विकारों का पता चल जाता है।
- सीरम फेरिटिन: सीरम फेरिटिन का बहुत ज्यादा या कम स्तर कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है। जब सीरम फेरिटिन का स्तर कम होता है, तो इसका मतलब है कि शरीर में आयरन की कमी हो गई है। हाई सीरम फेरिटिन, सूजन या आयरन की अधिकता का संकेत हो सकता है।
- सीरम आयरन: सीरम आयरन टेस्ट की मदद से रक्त में आयरन के स्तर को मापा जाता है। इस टेस्ट की मदद से पता चलता है कि शरीर में आयरन की कमी है या अधिकता। इस टेस्ट को आमतौर पर सुबह खाली पेट किया जाता है।
- टीआईबीटी (Total Iron Binding Capacity): टीआईबीटी एक रक्त परीक्षण है। इस टेस्ट की मदद से यह पता चलता है कि आपका रक्त आयरन को कितनी अच्छी तरह से ले जा सकता है। इस टेस्ट की मदद से भी आयरन के स्तर का पता लगाया जाता है।
- सीआरपी(CRP- सूजन देखने के लिए): सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP) टेस्ट एक सामान्य रक्त परीक्षण है, जो शरीर में सूजन या संक्रमण के स्तर को मापता है। इस टेस्ट की मदद से लिवर द्वारा उत्पादित प्रोटीन के स्तर की जांच होती है।
- विटामिन बी12 और फोलेट: आयरन लॉक सिंड्रोम की जांच करने के लिए विटामिन बी12 और फोलेट की जांच की जाती है। जब शरीर में इनका स्तर कम होता है, तो यह आयरन लॉक सिंड्रोम का कारण बन सकता है।
Iron Lock Syndrome का इलाज कैसे होता ?
डॉ. बताते हैं कि इसका इलाज सिर्फ आयरन टैबलेट नहीं है। इसके अलावा भी आपको कुछ विटामिन्स और मिनरल्स की जरूरत पड़ती है।
- ओमेगा-3 फैटी एसिड
- विटामिन बी12
- फोलेट
- विटामिन डी
- विटामिन सी
आयरन की कमी पूरी करने के लिए क्या खाएं?
- आयरन की कमी पूरी करने के लिए आप प्रो-बायोटिक फूड्स का सेवन भी जरूर करें।
- अपनी डाइट में दही और छाछ शामिल करें।
- फाइबर युक्त भोजन अपनी डाइट में शामिल करें।
- अपनी डाइट में विटामिन सी और बी12 से भरपूर डाइट जरूर लें।
आयरन लेने का सही तरीका क्या है?
- आयरन सप्लीमेंट खाली पेट या हल्का खाना खाने के बाद ही लिया जाना चाहिए।
- आयरन के सही अवशोषण के लिए, इसके सप्लीमेंट को विटामिन सी के साथ लेना चाहिए।
- आयरन सप्लीमेंट लेने से पहले या बाद में चाय-कॉफी के सेवन से बचें।
IV आयरन थेरेपी क्या है?
आपको बता दें कि कुछ मामलों में आयरन सप्लीमेंट से ज्यादा फायदा नहीं होता है। इस स्थिति में डॉक्टर IV Iron Therapy की सलाह दे सकते हैं।
क्या Iron Lock Syndrome खतरनाक है?
जी हां, अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह स्थिति खतरनाक हो सकती है। इसकी वजह से गंभीर एनीमिया के लक्षण महसूस हो सकते हैं।
- आयरन लॉक सिंड्रोम का दिल पर बुरा असर पड़ सकता है। इससे हृदय रोगों का जोखिम बढ़ जाता है।
- इसकी वजह से गर्भावस्था में जटिलताएं काफी बढ़ जाती है।
- आयरन लॉक सिंड्रोम शरीर के इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है।
किन लोगों को रहना चाहिए सावधान?
- पीसीओएस वाली महिलाओं में Iron Lock Syndrome का जोखिम ज्यादा रहता है।
- गर्भवती महिलाओं को भी इस बीमारी का खतरा ज्यादा बना रहता है।
- जिन लोगों के शरीर में बार-बार आयरन की कमी होती है, उनमें इसका खतरा ज्यादा रहता है।
इन बातों का भी ध्यान रखना है जरूरी
- प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इससे आयरन अवशोषण में मदद मिलती है।
- शुगर का सेवन कम मात्रा में करें। इससे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहेगा।
- रोजाना वॉक भी जरूर करें। आप हल्की एक्सरसाइज और योगाभ्यास भी कर सकते हैं।
- आयरन के अवशोषण को बढ़ाने के लिए विटामिन सी लेना जरूरी होता है।
Highlights:
- आयरन शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है।
- पीसीओएस वाली महिलाओं में आयरन लॉक सिंड्रोम ज्यादा देखने को मिलता है।
- आयरन सप्लीमेंट खाली पेट लेना फायदेमंद होता है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।