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क्या आपको भी हर वक्त थकान और कमजोरी होती है? क्या आपको चक्कर आने या सांस फूलने जैसी समस्याएं हो रही हैं? अगर हां, तो ये शरीर में आयरन की कमी का संकेत हो सकते हैं। कुछ मामलों में शरीर में आयरन तो होता है, लेकिन शरीर इसे लॉक करके रखता है, इस स्थिति में भी हर वक्त थका-थका महसूस हो सकता है। आपको बता दें कि यह Iron Lock Syndrome होता है, जो आजकल लोगों में ज्यादा देखने को मिल रहा है।
Iron Lock Syndrome: यह शरीर की एक ऐसी स्थिति है, जिसमें आयरन मौजूद होने के बावजूद शरीर उसे ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाता है। इस स्थिति में शरीर में आयरन तो होता है, लेकिन वह “लॉक” हो जाता है। शरीर हीमोग्लोबिन बनने के लिए आयरन का उपयोग नहीं कर पाता है। इसकी वजह से एनीमिया हो जाता है। वैसे तो यह समस्या किसी भी लिंग या उम्र के लोगों को हो सकती है। लेकिन, महिलाओं में इसके मामले ज्यादा सामने आते हैं। आज इस लेख में हम आपको Iron Lock Syndrome के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। Iron Lock Syndrome क्या होता है? यह कैसे होता है और इसकी पहचान करने के लिए कौन-सी जांचें की जाती हैं? जानें इसके बारे में- एशियन हॉस्पिटल की कंसल्टेंट-पीडियाट्रिक हेमाटोलॉजिस्ट एंड ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. आरुषी अग्रवाल से जानते हैं इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब-

जब शरीर में आयरन की कमी होती है, तो शरीर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होनी शुरू हो जाती हैं। शरीर में आयरन का स्तर कम होने पर कुछ लक्षण महसूस होते हैं, इनमें शामिल हैं-
ज्यादातर लोग इन लक्षणों को सामान्य या काम का दबाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि ये आयरन की कमी के संकेत भी हो सकते हैं।
कई लोगों के मन में सवाल यह आता है कि आयरन सप्लीमेंट लेने के बाद इसका लेवल क्यों नहीं बढ़ता है? आमतौर पर लोग सोचते हैं कि अगर आयरन कम है तो दवा खाने से यह ठीक हो जाएगा। लेकिन सच्चाई यह है कि हर आयरन की कमी एक जैसी नहीं होती है। कई मामलों में शरीर में आयरन की कमी नहीं होती, बल्कि शरीर आयरन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता है। यहीं से शुरू होता है Iron Lock Syndrome।
आयरन लॉक सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में आयरन मौजूद होता है। व्यक्ति आयरन सप्लीमेंट भी ले रहा होता है, लेकिन शरीर इस आयरन को अवशोषित नहीं कर पा रहा है। यानी इस स्थिति में आयरन शरीर के अंदर "लॉक" हो जाता है।
Iron Lock Syndrome कोई अलग बीमारी नहीं है। यह शरीर की एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर पर्याप्त आयरन होने के बावजूद भी उसे ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता है। अगर आसान भाषा में कहें तो शरीर आयरन को लॉक कर देता है। इस स्थिति में शरीर, आयरन को खून बनाने की प्रक्रिया में इस्तेमाल नहीं होने देता है।
इस सिंड्रोम को समझने के लिए सबसे पहले आपको एक खास हार्मोन को समझना जरूरी है, वह है- हेप्सिडिन (Hepcidin)। आपको बता दें कि हेप्सिडिन एक हार्मोन है, जिसे लिवर द्वारा बनाया जाता है। यह शरीर में कई जरूरी कार्यों को तय करता है, जैसे-
जब हेप्सिडिन का स्तर बढ़ जाता है, तो आंतों में आयरन का अवशोषण रुक जाता है। इस स्थिति में शरीर आयरन को स्टोर करके रख लेता है और इसे काम करने से रोकता है। इस स्थिति में खून में आयरन का स्तर कम दिखाई देता है। यानी हाई हेप्सिडिन लेवल की वजह से ही आयरन लॉक सिंड्रोम होता है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर हेप्सिडिन का स्तर बढ़ता क्यों है?
शरीर में हेप्सिडिन का स्तर कई कारणों से बढ़ सकता है। इसमें शामिल हैं-
जब शरीर में लंबे समय तक सूजन बनी रहती है, तो इस स्थिति में हेप्सिडिन का स्तर बढ़ सकता है। आपको बता दें कि मोटापा, पीसीओएस, ऑटोइम्यून डिजीज, संक्रमण, डायबिटीज और थायराइड डिसऑर्डर जैसी स्थितियां शरीर में सूजन का कारण बन सकते हैं और इसकी वजह से हेप्सिडिन लेवल बढ़ सकता है।
जब आंतों में कुछ गड़बड़ी होती है या आंतें ठीक तरीके से काम नहीं कर पाती हैं, तो इस स्थिति में हेप्सिडिन का स्तर बढ़ सकता है। इस स्थिति में शरीर आयरन को अवशोषित नहीं कर पाता है और दवा का असर भी नहीं होता है। जब आंतों से जुड़ी समस्याएं जैसे- गैस, एसिडिटी, आईबीएस, डायरिया, कब्ज आदि होता है, तो आंतों में गड़बड़ी शुरू हो सकती है।
अगर आप गलत तरीके से आयरन लेते हैं, तो भी इसका कोई फायदा नहीं होता है। चाय-कॉफी के साथ आयरन लेने, खाना खाने के तुरंत बाद आयरन सप्लीमेंट लेने से आयरन अवशोषण रुक सकता है और हेप्सिडिन लेवल बढ़ सकता है।
अगर आब बिना जरूरत के लंबे समय से आयरन सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो इससे हेप्सिडिन का स्तर बढ़ सकता है। इस स्थिति में शरीर डिफेंस मोड में चला जाता है और आयरन को जहर समझकर अवशोषित करने से रोक देता है।

आयरन लॉक सिंड्रोम की जांच के लिए सबसे पहले हीमोग्लोबिन की जांच कराई जाती है। इसका निदान करने के लिए कुछ दूसरी जांचें भी कराई जा सकती हैं। इसमें शामिल हैं-
डॉ. बताते हैं कि इसका इलाज सिर्फ आयरन टैबलेट नहीं है। इसके अलावा भी आपको कुछ विटामिन्स और मिनरल्स की जरूरत पड़ती है।
आपको बता दें कि कुछ मामलों में आयरन सप्लीमेंट से ज्यादा फायदा नहीं होता है। इस स्थिति में डॉक्टर IV Iron Therapy की सलाह दे सकते हैं।
जी हां, अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह स्थिति खतरनाक हो सकती है। इसकी वजह से गंभीर एनीमिया के लक्षण महसूस हो सकते हैं।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।