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जहरीली गैस और केमिकल का असर: युद्ध कैसे हेल्थ को डैमेज कर रहा है, एक्सपर्ट से जानें

Health News: दुनियाभर के अलग-अलग देशों में युद्ध चल रहा है, मिसाइलों व ड्रोन्स के धमाके लगातार हवा को खराब कर रहे हैं, जिससे सिर्फ वहां के लोगों का नहीं बल्कि दूसरे देश में रहने वाले लोगों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है।

जहरीली गैस और केमिकल का असर: युद्ध कैसे हेल्थ को डैमेज कर रहा है, एक्सपर्ट से जानें
VerifiedMedically Reviewed By: Dr. Bharat Gopal

Written by Mukesh Sharma |Updated : March 18, 2026 6:34 PM IST

Iran War Effect on Health: दुनियाभर में अलग-अलग देशों में आपस में युद्ध चल रहा है, मिसाइलें और ड्रोन्स एक-दूसरे पर दागे जा रहे हैं। जब भी हम ईरान और अमेरिका का युद्ध, इजरायल ईरान युद्ध या फिर रूस और यूक्रेन युद्ध से जुड़ी इन खबरों को देखते हैं, तो थोड़ा डर महसूस होता है और यह सच है कि दुनियाभर के अलग-अलग देशों में बढ़ रहा युद्ध मन में खतरा पैदा करता है, जिससे तनाव, डर और चिंता जैसी समस्याएं होने लगती हैं। लेकिन बात सिर्फ यहीं तक ही नहीं है बल्कि यही युद्ध लोगों की फिजिकल हेल्थ यानी शारीरिक स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा रहा है। मिसाइलों से निकलने वाली जहरीली गैसें, केमिकल और धमाकों से उड़ने वाली धूल आदि ये सभी वहां पर रह रहे लोगों के शरीर के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा रही हैं, जिसमें उनका ब्रेन, फेफड़े, गला और आंख आदि शामिल हैं। गुरुग्राम में मेदांता हॉस्पिटल सीनियर डायरेक्टर, रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. भरत गोपाल के अनुसार लंबे समय तक इन चीजों के संपर्क में आना कई गंभीर बीमारियां पैदा कर सकता है। साथ ही इसके अलावा भी उन्हें कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी, जिनके बारे में हम आगे जानेंगे।

हवा में जहरीले कण

तेल व बारूद आदि चलने से उठने वाले धुएं में कई खतरनाक केमिकल, गैसें व बारीक कण होते हैं, जो हवा में मिक्स हो जाते हैं। इनसे फेफड़े परमानेंट डैमेज हो सकते हैं और अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसे गंभीर रोग पैदा हो सकते हैं। साथ ही इससे कई तरह के कैंसर होने का खतरा भी बढ़ सकता है।

(और पढ़ें - खराब हवा से कौन से अंग सबसे ज्यादा डैमेज होते हैं?

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किन लोगों को ज्यादा खतरा?

डॉ. गोपाल के अनुसार इन जहरीले केमिकल व गैसों से खराब वातावरण वैसे तो हर किसी के लिए नुकसानदायक है। लेकिन सबसे ज्यादा खतरा छोटे बच्चों व बुजुर्गों को है, क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है। इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति पहले से सांस की बीमारी या फिर किसी क्रोनिक बीमारी से ग्रस्त है, तो उसे भी इस तरह की हवा बीमार कर सकती है।

(और पढ़ें - क्या फेफड़ों के अंदर जाकर जम जाता है प्रदूषण?)

भारत में कितना खतरा

यह समस्या सिर्फ युद्ध वाले इलाकों तक ही नहीं रहती। हवा के साथ ये जहरीले कण दूसरे देशों तक भी पहुंच सकते हैं। भारत जैसे देशों में, जहां पहले से ही हवा खराब है, यह हालत और ज्यादा खराब हो सकती है। इसलिए सरल शब्दों में कहें तो जो लोग भारत में रह रहे हैं, उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी इससे खतरा हो सकता है।

भारत में हवा की स्थिति

भारत में पहले से ही प्रदूषण ज्यादा है और सांस की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में यह और ज्यादा प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन सकता है। साथ ही देखा जा रहा है, कि ईंधन खत्म होने के डर को लेकर कुछ लोग मजबूरी में लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल भी बढ़ा सकते हैं, जिससे प्रदूषण और ज्यादा बढ़ेगा व उसका असर सीधे आपके स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

इसका असर हो सकता है -

  • अस्थमा, सीओपीडी और फेफड़ों की बीमारियों के मरीज बढ़ने पर अस्पतालों में ज्यादा प्रेशर पड़ सकताहै
  • हवा खराब होने के कारण कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ना और लोगों की जीवन प्रत्याशा दर (Life Expectancy) कम होना।
  • कम सुविधा वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को समय पर या पर्याप्त इलाज न मिल पाना

हमें यह समझना जरूरी है कि युद्ध का असर सिर्फ उस जगह तक ही नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की सेहत पर पड़ता है | साफ हवा और अच्छी सेहत हर किसी का अधिकार है, और इसके लिए जानकारी और सही उपाय करना बहुत जरूरी है

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अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।