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Written By: Yogita Yadav | Updated : October 1, 2018 9:19 AM IST
बढ़ती उम्र में महसूस होने वाली शारीरिक और मानसिक समस्याओं को योग के द्वारा किया जा सकता है मैनेज।© Shutterstock
उम्र का बढ़ना एक सहज स्वभाविक प्रक्रिया है। विभिन्न माध्यमों से आप उम्र के संकेतों को तो छुपा सकते हैं , परंतु उम्र का बढ़ना नहीं रोक सकते। इसलिए जरूरी है कि अपनी उम्र को स्वीकार करें और इसमें होने वाली परेशानियों का सकारात्मक रूप से समाधान करें। इसमें योग कर सकता है बहुत मदद। वृद्ध दिवस पर जानें कि कैसे योग है इस उम्र का सबसे प्यारा दोस्त यानी बेस्ट फ्रेंड।
उम्र का बढ़ना महत्वपूर्ण और अनिवार्य प्रक्रिया है। बुढ़ापा जुड़ा है अनेक चिकित्सा-संबंधी परिस्तिथियों से। जिसका मुख्य कारण है शरीर में शारीरिक और प्रतिरक्षा तंत्र की क्षमता में कमी। अपनी जवानी के दौरान लोगों द्वारा किए गए अस्वस्थ जीवन शैली के चुनाव के कारण हृदय रोग, टाइप 2 मधुमेह (T2DM), कैंसर, मोटापा और गठिया जैसी क्रोनिक अस्वस्थता पैदा हो सकती है। अवसाद और मानसिक बीमारियों के साथ-साथ दर्द, थकान, सीमित गतिशीलता और अनिद्रा जैसी कई शिकायतें इस उम्र में आम हो जाती हैं।
योग है बेस्ट फ्रेंड
योगासन बढ़ती उम्र को स्वस्थ रखने में सहायक हैं। नियमित योगाभ्यास से बुज़ुर्गों के सामान्य स्वास्थ्य, चाल और संतुलन, लचीलापन और मूड़ में सुधार आता है। कई मानसिक और शारीरिक बीमारियों को भी इलाज और नियमित रूप से योगाभ्यास से नियंत्रण में रखा जा सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य में सुधार:
अवसाद: विश्व स्वास्थ्य संगठन [WHO] के अनुसार, 2020 तक, अवसाद सबसे व्यापक रूप से प्रचलित स्वास्थ्य की स्थिति में दूसरे स्थान पर होगा। बुज़ुर्गों में अवसाद के लक्षणों का पता लगाना मुश्किल है क्योंकि इन लक्षणों को हम बढ़ती उम्र के लक्षण मानकर नज़र-अंदाज़ कर देते हैं। अध्ययन के अनुसार अवसाद-ग्रस्त बुज़ुर्ग आबादी 16.5% है जिसमें महिलाएँ पुरुषों की तुलना में ज़्यादा ज़ोखिम में है। तीन महीनों के योग चिकित्सा से अवसाद ग्रस्त बुज़ुर्गों में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर कम किया जा सकता जो अवसाद का मुख्य कारण है। विभिन्न अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि महिलाओं में, व्यायाम की तुलना में योग चिकित्सा चिंता, अवसाद कम कर जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला सकता है।
शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार
टाइप २ मधुमेह (T2DM) , हृदय रोग के साथ-साथ, भारत सहित कई देशों में एक प्रमुख उपापचयी (मेटबॉलिक) सिंड्रोम है। बुज़ुर्गों के आठ हफ़्तों के योग कार्यक्रम में भाग लेने का फल ये था कि उनका वज़न काफ़ी कम हुआ और कमर की परिधि भी कम हुई जो चलने से नहीं हो पाई थी। इससे साबित होता है कि योग से मधुमेह रोग को दूर रख सकते हैं और मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार आता है।
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गठिया बुजुर्ग, विशेष रूप से महिलाओं में विकलांगता का सबसे आम कारण है। नियमित योगाभ्यास करने से दर्द कम किया जा सकता है, ताकत बढ़ती है और अच्छी नींद भी आती है, गठिया के प्रभावी प्रबंधन में भी योग सहायक है।
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मूत्र असंयम या मूत्राशय पर नियंत्रण न होना, 40 और उससे अधिक उम्र की महिलाओं में विकलांगता का एक प्रमुख कारण है। छह सप्ताह का योग चिकित्सा कार्यक्रम महिलाओं में मूत्र असंयम के लिए प्रभावी और सुरक्षित साबित हुई है।
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योगाभ्यास से पहले इन बातों का भी रखें ध्यान