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कंडोम का यूज करने से नहीं होती है एलर्जी, Condom Day पर जानें इससे जुड़े 4 Myths के Facts

International Condom Day 2026: कंडोम के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए हर साल 13 फरवरी को वर्ल्ड कंडोम डे मनाया जाता है। वर्ल्ड कंडोम डे के खास मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं, इससे जुड़े 4 ऐसी बातों के बारे में, जो पूरी तरह से मिथक हैं।

कंडोम का यूज करने से नहीं होती है एलर्जी, Condom Day पर जानें इससे जुड़े 4 Myths के Facts
VerifiedVERIFIED By: Dr Mannan Gupta

Written by Ashu Kumar Das |Updated : February 13, 2026 11:32 AM IST

Myths and facts about condom :आज भी हमारे समाज में कंडोम को लेकर कई तरह की गलतफहमियां और मिथक (Myths) फैले हुए हैं। सही जानकारी के अभाव में लोग या तो इसका उपयोग करने से हिचकते हैं या फिर गलत तरीके से इस्तेमाल करते हैं, जिससे अनचाही प्रेग्नेंसी और यौन संचारित रोगों का खतरा बढ़ता है। कंडोम के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए हर साल 13 फरवरी को वर्ल्ड कंडोम डे मनाया जाता है। वर्ल्ड कंडोम डे के खास मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं, इससे जुड़े 4 ऐसी बातों के बारे में, जो पूरी तरह से मिथक हैं। इन मिथकों की सच्चाई बता रहे हैं दिल्ली के एलांटिस हेल्थ केयर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मनन गुप्ता।

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मिथक 1 : कंडोम 100% सुरक्षित नहीं होते, इसलिए बेकार हैं

सच्चाई: डॉ. मनन गुप्ता बताते हैं कि सही तरीके से इस्तेमाल करने से कंडोम बहुत प्रभावी होती हैं। कई लोग मानते हैं कि कंडोम पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते, इसलिए उनका उपयोग करने का कोई फायदा नहीं। यह धारणा पूरी तरह से गलत है। यदि कंडोम को सही तरीके से और यौन संबंधों के दौरान हर बार इस्तेमाल किया जाए, तो यह अनचाही प्रेग्नेंसी से 98% तक सुरक्षा मिलती है। यौन संबंध के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करने से अनचाही प्रेग्नेंसी के साथ-साथ HIV, गोनोरिया, सिफिलिस और अन्य यौन संचारित संक्रमणों से भी बचाव होता है। डॉक्टर बताते हैं कि जहां पर कंडोम का इस्तेमाल करने से भी प्रेग्नेंसी कंसीव हो जाती है, उसमें अधिकांश गलत तरीके से पहनने, एक्सपायरी डेट वाले कंडोम का इस्तेमाल करने की वजह से होती है।

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मिथक 2 : कंडोम केवल पुरुषों के लिए होते हैं

सच्चाई: नहीं, यह धारणा अगर 2 दशक पहले तक होती तो शायद सही भी हो सकती थी। लेकिन अब पुरुषों के साथ-साथ बाजार में फीमेल कंडोम भी उपलब्ध हैं, जो महिलाओं को भी सुरक्षा का विकल्प देते हैं। फीमेल कंडोम का इस्तेमाल करके महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित संबंध बनाने में मदद मिलती है। महिलाएं फीमेल कंडोम का इस्तेमाल करें, तो इससे उनमें संक्रमण का खतरा भी कम होता है।

मिथक 3: कंडोम से एलर्जी होती है।

सच्चाई: डॉक्टर बताते हैं कि कंडोम का इस्तेमाल करने से हर किसी को एलर्जी नहीं होती है। कंडोम का यूज करने से सिर्फ उन्हीं लोगों को एलर्जी होती है, जिन्हें लेटेक्स से एलर्जी हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कंडोम सभी के लिए हानिकारक हैं। आजकल बाजार में लेटेक्स-फ्री कंडोम भी उपलब्ध हैं, जो एलर्जी की समस्या को कम करते हैं।

मिथक 4: सभी लोगों के लिए कंडोम का एक ही साइज होता है।

सच्चाई: हर व्यक्ति के लिए एक ही साइज का कंडोम सही नहीं होता। कंडोम अलग-अलग साइज, शेप, रंग और टेक्सचर में उपलब्ध होते हैं, ताकि हर कोई अपने लिए आरामदायक और सुरक्षित विकल्प चुन सके। डॉक्टर बताते हैं कि- अक्सर लोग कहते हैं कि वे कंडोम इस्तेमाल करने के लिए बहुत बड़े हैं, लेकिन यह जानना जरूरी है कि स्टैंडर्ड साइज के कंडोम काफी हद तक खिंच सकते हैं। आपके अंग पर कंडोम का सही फिट होना बहुत महत्वपूर्ण है। अगर कंडोम बहुत छोटा होगा, तो इसके फटने का खतरा बढ़ सकता है और असहजता महसूस हो सकती है। वहीं अगर कंडोम बहुत बड़ा होगा, तो उसके फिसलने की संभावना रहती है, जिससे सुरक्षा कम हो सकती है और टूटने का जोखिम भी बढ़ सकता है।

डॉक्टर के अनुसार, किसी भी व्यक्ति के लिए कंडोम खरीदते समय थोड़ा रिसर्च करना फायदेमंद होता है। कंडोम को खरीदने से पहले जानें कि कौन सा साइज और ब्रांड आपके लिए बेहतर है। यदि आपको कंडोम के सही फिट को लेकर किसी प्रकार की इंफ्यूजन है, तो आप विभिन्न प्रकार की वैरायटी पैक खरीदकर साइज ट्राई कर सकते हैं।

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Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।