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Debunking Myths about Childhood Cancers: कैंसर एक घातक बीमारी है। खासकर जब बच्चों में कैंसर की बात आए, तो स्थिति और भी ज्यादा घातक हो जाती है। बच्चों में होने वाले कैंसर को चाइल्डहुड कैंसर कहा जाता है। चाइल्डहुड कैंसर आमतौर पर 0 से 14 साल के बच्चों में देखा जाता है। बचपन का कैंसर (Childhood Cancer) एक ऐसा विषय है जिसके बारे में समाज में कई तरह की गलत धारणाएं फैली हुई हैं।
जानकारी की कमी, डर और अफवाहों के कारण लोग अक्सर सच और झूठ में फर्क नहीं कर पाते। जिसका परिणाम यह होता है कि मरीज और उनके परिवार को सामाजिक, मानसिक और भावनात्मक दबाव का सामना करना पड़ता है। 15 फरवरी को जब इंटरनेशनल चाइल्डहुड कैंसर डे (international childhood cancer day 2026) मनाया जा रहा है, तो हम आपको बताने जा रहे हैं चाइल्डहुड कैंसर से जुड़े 5 बड़े मिथकों के बारे में।
सच्चाई: फरीदाबाद के सेक्टर 8 स्थित सर्वोदय अस्पताल के सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. नवीन संचेती का कहना है कि वयस्कों के मुकाबले बच्चों में कैंसर के मामले कम देखे जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में जिस तरह से जीवनशैली, खानपान और बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी कम हो रही है, ऐसे में बच्चों में होने वाला कैंसर बिल्कुल भी दुर्लभ नहीं हैं। भारत में हर साल हजारों बच्चे कैंसर से प्रभावित होते हैं। शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
सच्चाई: बच्चों का कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर या कोई भी अन्य प्रकार का कैंसर छूने से बिल्कुल नहीं भी फैलता है। डॉक्टर बताते हैं कैंसर कोई संक्रामक बीमारी नहीं है। इस मिथक के कारण कई बार बच्चे सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिए जाते हैं, जो बिल्कुल गलत है।
सच्चाई : कैंसर किसी की गलती या कर्मों का फल नहीं है। यह एक जैविक बीमारी है जो शरीर की कोशिकाओं में असामान्य बदलाव के कारण होती है। अगर किसी बच्चे को कैंसर जैसी घातक बीमारी होती है, तो इसके लिए माता-पिता को दोषी ठहराना न केवल गलत है बल्कि मानसिक रूप से भी हानिकारक है। डॉ. नवीन संचेती कहते हैं कि अगर किसी बच्चे में कैंसर का पता चलता है, तो परिवार के अन्य सदस्यों, पास-पड़ोसियों और समाज के लोगों को माता-पिता के साथ खड़ा होना चाहिए, न की उनका तिरस्कार करना चाहिए। कैंसर पीड़ित बच्चे के माता-पिता मानसिक रूप से जितना मजबूत होंगे, बच्चे के रिकवरी की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी।
सच्चाई: यह बात सच है कि कैंसर के इलाज में कई साइड इफेक्ट सामने आ सकते हैं। कैंसर के इलाज के दौरान बालों का झड़ना, नाखूनों का खराब होना और शारीरिक कमजोरी आम बात है, लेकिन डॉक्टर आधुनिक तकनीकों और दवाओं के जरिए कैंसर के इलाज में होने वाले दर्द और असुविधा को काफी हद तक कम करने की कोशिश करते हैं। वयस्कों की तुलना में बच्चों में होने वाले कैंसर का इलाज में दर्द को कम से कम करने की कोशिश की जाती है।
सच्चाई: कई प्रकार के बचपन के कैंसर, जैसे ल्यूकेमिया, का इलाज सफलतापूर्वक किया जा सकता है। समय पर इलाज से 70 - 80% तक बच्चे पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। कैंसर होने के बाद बच्चा लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकता है, यह पूरी तरह से गलत है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।