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International Albinism Awareness Day : जानें, क्या है एल्बिनिज्म, कारण, लक्षण और इलाज

ऐल्बिनिज्म तब होता है, जब मानव शरीर भोजन को मेलेनिन में परिवर्तित करने में विफल रहता है। यह एक आनुवंशिक स्थिति है। लोगों में यह मिथ व्याप्त है कि यह रोग तब होता है, जब मछली और दूध एक साथ खा लिया जाता है।

International Albinism Awareness Day : जानें, क्या है एल्बिनिज्म, कारण, लक्षण और इलाज
क्या है एल्बिनिज्म? © Shutterstock.

Written by Anshumala |Published : June 13, 2019 3:59 PM IST

अंतर्राष्ट्रीय एल्बिनिज्म (धवलता या रंगहीनता) दिवस International Albinism Awareness Day आज यानी 13 जून को हर साल मनाया जाता है। एल्बिनिज्म एक दुर्लभ और गैर संक्रामक, अनुवांशिक रूप से जन्म के समय मौजूद रहने वाला विकार है। इस बीमारी में पीड़ित व्यक्ति अधिकतर द्दष्टहीन होते हैं और इन्हें त्वचा कैंसर होने का भी खतरा होता है। इस दिवस को एल्बिनिज्म के शिकार लोगों से विश्व में होने वाले भेदभाव के विरुद्ध जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

क्या है एल्बिनिज्म ?

लैटिन शब्द ऐल्बस "सफेद'' से इसकी उत्पत्ति हुई है। मेलेनिन के उत्पादन में शामिल एंजाइम के अभाव के कारण यह समस्या होती है। इसमें त्वचा, बाल और आंखों के बाल के रंग सफेद होते हैं। यह एक जन्मजात विकार है। ऐल्बिनिज्म, वंशानुगत तरीके से रिसेसिव जीन एलील्स को प्राप्त करने के परिणामस्वरूप होता है। इसमें दृष्टि दोष जैसे फोटोफोबिया और ऐस्टिगमैटिज्म (साफ दिखाई न देना) त्वचा रंजकता (Skin pigmentation) के अभाव में जीवधारियों में धूप से झुलसने और त्वचा कैंसर होने का खतरा अधिक होता है।

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किन्हें हो सकता है ?

- ऐल्बिनिज्म तब होता है, जब मानव शरीर भोजन को मेलेनिन में परिवर्तित करने में विफल रहता है। यह एक आनुवंशिक स्थिति है। लोगों में यह मिथ व्याप्त है कि यह रोग तब होता है, जब मछली और दूध एक साथ खा लिया जाता है।

- ऐल्बिनिज्म एक दुर्लभ स्थिति है। अनुमान है कि 17,000 लोगों में से एक को यह रोग होता है। मां-बाप इस रोग से ग्रस्त हैं, तो बच्चे में इस रोग के होने की संभावन बढ़ जाती है। ऐसे मामले 4 में से 1 में देखी जाती है। भारत में भी इस रोग से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ रही है।

- इस रोग से सिर्फ इंसान ही प्रभावित नहीं होते हैं, बल्कि जानवरों और पौधों में भी यह रोग होता है।

इलाज क्या है

इसका इलाज अभी अधिक उपलब्ध नहीं है। इसमें आंखों और त्वचा की देखभाव अच्छी तरह से करनी चाहिए। यदि आप इस रोग से ग्रस्त हैं, तो अपनी आंखों और त्वचा की जांच करवाते रहें। ऐसा करके स्किन कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं। तेज धूप में जाने से बचें। सनबर्न के जोखिम को कम करें। सनस्क्रीन का यूज करें। ऐसे सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें, जिसमें सन प्रोटेक्शन फैक्टर यानी एसपीएफ अधिक हों। रोशनी से होने वाली संवेदनशीलता को कम करने के लिए यूवी प्रोटेक्शन वाले उच्च क्वालिटी का धूप का चश्मा पहनें।

क्या हैं इसके लक्षण

त्वचा, बाल सफदे होता है। आंखों का रंग हल्का नीला, पीला या ग्रे होता है।

दूर दृष्टि दोष, निकट दृष्टि दोष (मायोपिया)

तेज रोशनी के प्रति अतिसंवेदनशीलता यानी फोटोफोबिया

मोनोक्युलर विजन यानी एक आंख से देखना आदि कुछ मुख्य लक्षण होते हैं।

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कैसे करें बचाव

इसे रोका नहीं जा सकता है, क्योंकि यह एक अनुवांशिक विकार है। धूप में निकलें तो सनस्क्रीन का यूज करें। बड़ी सी टोपी पहनें। जितना हो सके त्वचा को धूप में बचाए रखने की कोशिश करें, ताकि आपको सनबर्न और स्किन कैंसर की समस्या ना हो। धूप व यूवी किरणों से बचाने वाले कपड़े पहनें।

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