शरीर के अंदर बढ़ रही सूजन से हार्ट अटैक जैसे कई जानलेवा खतरे? कौन से टेस्ट कराने से लगेगा पता?
शरीर के अंदर बढ़ रही सूजन से हार्ट अटैक जैसे कई जानलेवा खतरे? कौन से टेस्ट कराने से लगेगा पता?
शरीर के अंदर बढ़ने वाली सूजन बेहद खतरनाक हो सकती है और कई जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है। इसलिए इस लेख में एक्सपर्ट्स से जानेंगे कुछ ऐसे टेस्ट के बारे में जो क्रोनिक स्ट्रेस का पता लगा सकते हैं।
Written By:
Mukesh Sharma
| Published : July 9, 2026 5:43 PM IST
दरअसल इन्फ्लेमेशन (Inflammation) जो कि एक अंग्रेजी मेडिकल टर्म है, उसे हम आम बोलचाल वाली हिंदी में अक्सर ‘सूजन’ बोल देते हैं, लेकिन यह सिर्फ सूजन नहीं होती है बल्कि हल्की सूजन के साथ-साथ लालिमा और जलन पैदा करने वाली कंडीशन होती है। इन्फ्लेमेशन यानी शरीर के अंदरूनी हिस्से में होना कई बार एक बेहद गंभीर समस्या बन सकती है जिसे इग्नोर नहीं करना चाहिए। शरीर के अंदर सूजन यानी इन्फ्लेमेशन स्वास्थ्य के लिए कई गंभीर और जानलेवा समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है और इसलिए उससे बचना बेहद जरूरी है। डॉ. (कर्नल) विजय दत्ता, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन और रेस्पिरेटरी सर्विसेज, ISIC मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने बताया आखिर किस तरह से इन्फ्लेमेशन शरीर में हार्ट अटैक समेत कई समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है।
क्रोनिक इन्फ्लेमेशन कैसे शरीर को नुकसान पहुंचाती है?
अगर शरीर के अंदर लंबे समय से इन्फ्लेमेशन है, तो उससे शरीर को गंभीर नुकसान हो सकते हैं जैसे -
हार्ट अटैक का खतरा - लंबे समय से शरीर के अंदर क्रोनिक इन्फ्लेमेशन अंदर ही अंदर ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाने लगती है जिसके कारण रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी सतह खुरदरी होने लगती है जिसमें प्लाक जमने लगता है। इस कारण से ये रक्त वाहिकाएं सख्त होने लगती हैं और ब्लॉकेज का खतरा भी बढ़ जाता है। इस तरह से धीरे-धीरे समय के साथ-साथ हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ने लगता है।
ब्रेन हेल्थ को खतरा - ठीक हार्ट की तरह ही लंबे समय से इन्फ्लेमेशन ब्रेन को भी नुकसान पहुंचाती है, क्योंकि क्रोनिक इन्फ्लेमेशन ब्रेन में साइटोकिन्स जैसे हानिकारक केमिकल जमा होने लगते हैं। जिससे सेल्स ठीक से काम नहीं कर पाती हैं और न्यूरॉन्स भी डैमेज होने लगते हैं। ऐसी स्थिति ब्रेन से जुड़ी कई गंभीर रोग होने के खतरे को बढ़ा सकती है।
अंदरूनी अंगों के डैमेज होने का खतरा - शरीर के अंदर बढ़ती सूजन यानी क्रोनिक इन्फ्लेमेशन का असर शरीर के मेटाबॉलिज्म सिस्टम से जुड़े अंगों पर भी पड़ता है जैसे पैंक्रियाज और लिवर आदि। क्रोनिक इन्फ्लेमेशन आमतौर पर वेट गेन, मेटाबोलिक सिंड्रोम और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ाती है जिनका असर लिवर और पैनक्रियाज पर भी पड़ता है।
शरीर के अंदर विकसित होने वाली क्रोनिक स्ट्रेस के कारण शरीर में कुछ लक्षण देखे जा सकते हैं, जैसे थकान रहना, जोड़ों में दर्द व जकड़न और पाचन खराब रहना आदि। हालांकि, इन लक्षणों को कई बार आम समझ लिया जाता है और न ही इनकी मदद से क्रोनिक इन्फ्लेमेशन की पुष्टि की जा सकती है। इसलिए कुछ टेस्ट हैं जिनकी मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि शरीर में क्रोनिक इन्फ्लेमेशन है या नहीं और कितनी ज्यादा है:
सीआरपी ब्लड (CRP Blood) - इस टेस्ट की मदद से आपको सी-रिएक्टिव प्रोटीन (C-Reactive Protein) की जांच की जाती है। जब शरीर में किसी भी कारण से इन्फ्लेमेशन बढ़ती है, तो सीआरपी भी बढ़ने लगते हैं और इसलिए सीआरपी ब्लड टेस्ट की मदद से शरीर के अंदर की सूजन का पता लगाया जा सकता है।
ईएसआर टेस्ट (ESR Test) - एरिथ्रोसाइट सेडिमेंटेशन रेट एक ऐसी प्रोसेस है, जिसमें यह देखा जाता है कि लिए गए ब्लड सैंपल में रेड ब्लड सेल्स कितनी तेजी से नीचे की तरफ बैठती हैं और प्लाज्मा से अलग होती है। यह प्रक्रिया ये बताने में मदद करती है कि शरीर में क्रोनिक इन्फ्लेमेशन कितनी बढ़ी हुई है।
इंटरल्यूकिन-6 ब्लड टेस्ट (Interleukin-6 Blood test) - जब शरीर के अंदर इन्फ्लेमेशन शुरू हो जाती है, तो उससे शरीर के अंदर आईएल-6 या इंटरल्यूकिन-6 नाम का एक खास केमिकल भी रिलीज होने लगता है। आईएल-6 ब्लड टेस्ट की मदद से इस केमिकल की जांच करके शरीर के अंदर हो रही इन्फ्लेमेशन का पता लगाया जा सकता है।
होमोसिस्टीन टेस्ट (Homocysteine Test) - शरीर के अंदर की सूजन का पता लगाने के लिए होमोसिस्टीन टेस्ट का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह एक तरह का अमीनो एसिड है। अगर इसका लेवल खून में बढ़ जाए, तो यह ब्लड वेसल्स के अंदर की लाइनिंग को छीलने लगता है, जिससे सूजन बढ़ती है और क्लॉटिंग का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अगर होमोसिस्टीन बढ़ा हुआ है, इन्फ्लेमेशन का खतरा बढ़ा हुआ होने का भी काफी ज्यादा होता है।
हालांकि, क्रोनिक इन्फ्लेमेशन का लगाने के लिए कौन सा टेस्ट करना है यह निर्णय आपको नहीं लेना चाहिए बल्कि डॉक्टर से इस बारे में बात करना चाहिए। इसलिए अगर आपको हेल्थ से जुड़ी कोई भी समस्या है, तो डॉक्टर से इस बारे में बात करें और डॉक्टर के द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का पालन करें।
हालांकि, आपको कोशिश यह करनी चाहिए कि आपको कोई भी यह टेस्ट कराने की जरूरत ही नहीं पड़े, कुछ बातों का ध्यान रखकर क्रोनिक इन्फ्लेमेशन जैसी समस्याओं से बचे रहने में काफी मदद मिल सकती है -
घर का हेल्दी खाना खाएं
रोजाना पर्याप्त पानी पीएं
नियमित रूप से एक्सरसाइज करें
तनाव से विशेष रूप से बचें
रोजाना पर्याप्त नींद लें
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य शरीर के अंदर बढ़ने वाली क्रोनिक इन्फ्लेमेशन और उसका पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट किए जाने चाहिए आदि के बारे में जानकारी देना है। इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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